Plastic Waste in Seas: समुद्रों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा, बन रहा करोड़ों जलीय जीवों की मौत का कारण
दुनिया भर में सालाना लाखों टन प्लास्टिक मलबा पैदा होता है। यह कचरा अब जमीन के साथ-साथ समुद्री जीवन पर भी गहरा विपरीत प्रभाव डाल रहा है। भारत भी सबसे ज्यादा कचरा फैलाने वाले देशों में शामिल।

Plastic Waste in Seas: हाल ही के एक अध्ययन में पता चला कि दुनिया के महासागरों में 171 ट्रिलियन से अधिक प्लास्टिक के टुकड़ों का कचरा मौजूद है। इसका वजन लगभग 2.3 बिलियन टन प्लास्टिक के बराबर है। प्रतिवर्ष 8 से 10 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में फेंक दिया जाता है। यह एक अनुमान है जोकि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने 1979 और 2019 के बीच अटलांटिक, प्रशांत और भारतीय महासागरों और भूमध्य सागर में लगभग 12,000 नमूनों से एकत्रित वैश्विक डेटा का विश्लेषण कर जारी किया है।
इस अध्ययन में पता चला कि साल 2005 के बाद से प्लास्टिक प्रदूषण में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गयी है कि अगर प्लास्टिक कचरे पर जल्द कार्रवाई नहीं की गयी, तो 2040 तक दुनिया के महासागरों में प्लास्टिक मलबे में 2.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो जायेगी।
जीव-जंतुओं का जीवन प्रभावित
महासागरों और समुद्रों में प्लास्टिक कचरा पानी के जीव-जंतुओं को बहुत नुकसान पहुंचाता है। जैसे, अधिकतर समुद्री जीव-जंतु इस प्लास्टिक कचरे को अपना भोजन समझ कर खा लेते हैं। वहीं कई बार प्लास्टिक के बड़े मलबों में समुद्री जीव फंसकर भी मर जाते हैं।
इसके अलावा, प्लास्टिक कचरे में कई नुकसानदायक केमिकल्स होते हैं, जैसेकि डाईक्लोरो डाईफेनाइल ट्राईक्लोरोइथेन (Dichlorodiphenyltrichloroethane) और पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल (polychlorinated biphenyls)। यहीं नहीं, प्लास्टिक कचरा समुद्री जीव-जंतुओं की फूड चेन को बिगाड़ देता है जोकि उनके प्राकृतिक जीवन पर विपरीत असर डालता है।
कंडोर फेरीज की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल प्लास्टिक कचरे से 100 मिलियन से भी अधिक समुद्री जीव मर जाते हैं। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण सर्वाधिक 100 प्रतिशत कछुओं, 59 प्रतिशत व्हेल और 36 प्रतिशत सीलों को नुकसान पहुंचा रहा है। दुनिया का लगभग 70 प्रतिशत प्लास्टिक मलबा समुद्रों में डूब जाता है। जबकि 15 प्रतिशत तैरता रहता है और बाकि का 15 प्रतिशत समुद्र तटों पर आ जाता है।
प्लास्टिक नष्ट नहीं होता आसानी से
महासागरों और समुद्रों में प्लास्टिक कचरा डिग्रेड होने में आमतौर पर सैकड़ों साल लग जाते हैं। गौरतलब है कि अधिकांश प्लास्टिक मलबा कभी पूरी तरह से डिग्रेड नहीं होता। प्लास्टिक डिग्रेडेशन का मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह से गायब हो जायेगा। दरअसल, यह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट सकता है, जिसे माइक्रो प्लास्टिक कहा जाता है। यह भी समुद्री जीवन और उसके पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा कहां?
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक प्लास्टिक का सबसे ज्यादा कचरा उत्तरी प्रशांत सागर में है। इस क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण और सीवेज बहुत ही ज्यादा है। इसी तरह, यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी की एक रिपोर्ट में बताया गया कि मेडिटेरेनियन सागर भी अत्यधिक प्रदूषित है। यहां भी प्लास्टिक प्रदूषण एक प्रमुख चिंता का विषय है। बाल्टिक सागर और काला सागर (ब्लैक सी) को यूरोप में पानी के सबसे प्रदूषित समुद्रों में भी माना जाता है।
हालांकि, अभी कुछ महासागर और समुद्र ऐसे भी हैं जो अत्यधिक साफ-सुथरे हैं। द हेल्थी जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक वेडेल सागर दुनिया के सभी समुद्रों में सबसे साफसुथरा है। जबकि दक्षिण प्रशांत महासागर में 297 बिलियन और दक्षिण अटलांटिक महासागर में 491 बिलियन प्लास्टिक के कण मौजूद हैं। वैज्ञानिकों एवं अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक यह दोनों समुद्र फिलहाल अन्य सभी महासागरों से बेहतर स्थिति में है।
महासागरों और समुद्र में प्लास्टिक को कम करने के लिए वैश्विक पहल
● संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने समुद्रों में प्लास्टिक प्रदूषण के नुकसान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 2017 में स्वच्छ समुद्र अभियान शुरू किया था। अभियान के तहत यूएनईपी ने सभी देशों से प्लास्टिक की खपत को कम करने की मांग की थी।
● ग्लोबल प्लास्टिक एक्शन पार्टनरशिप (जीपीएपी) वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और एलेन मैकआर्थर फाउंडेशन द्वारा 2018 में शुरू की गई एक पहल है। जीपीएपी प्लास्टिक कचरे को कम करने और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को बढ़ावा देने के लिए सरकारों, व्यवसायों, आदि के साथ काम करता है।
● ओशन क्लीनअप एक संगठन है जो समुद्रों और महासागरों से प्लास्टिक को हटाने के लिए नयी तकनीकों का विकास करता है। संगठन का लक्ष्य 2040 तक समुद्रों और महासागरों में प्लास्टिक की मात्रा को 90 प्रतिशत तक कम करना है।
● महासागर संरक्षण द्वारा आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई' एक वैश्विक कार्यक्रम है जिसमें समुद्र तटों और जलमार्गों से प्लास्टिक कचरा एकत्र किया जाता है। यह आयोजन 100 से अधिक देशों में सालाना होता है।
● प्लास्टिक प्रदूषण गठबंधन, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए काम कर रहे संगठनों और व्यवसायों का एक वैश्विक गठबंधन है। यह गठबंधन प्लास्टिक के विकल्पों को बढ़ावा देता है और प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए उपाय करता है।
भारत और समुद्रों में प्लास्टिक
भारत, दुनिया के महासागरों और समुद्रों में प्लास्टिक प्रदूषण करने वाले सबसे मुख्य देशों में से एक है। भारत सालाना लगभग 3.4 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। इसका ज्यादातर हिस्सा बिना ट्रीटमेंट किये सीवेज के जरिये नदियों और फिर समुद्रों में मिल जाता है।
दरअसल, भारत में वेस्ट मैनेजमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। वहीं सरकार द्वारा प्रतिबन्ध के बावजूद भी यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग प्रचलन में है। इसके अलावा, भारत का रिसाइक्लिंग सेक्टर काफी हद तक व्यवस्थित नहीं है, जिससे प्लास्टिक वेस्ट का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है।
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