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Organ Transplant: मनुष्य में धड़का फिर सूअर का दिल, भविष्य में अंग प्रत्यारोपण के लिए बनेगा विकल्प?

Organ Transplant: एक बार फिर एक सूअर का दिल एक मनुष्य का दिल बनकर धड़क रहा है। अमेरिका के मैरीलैंड में डॉक्टरों ने मरने की कगार पर पहुंच चुके एक व्यक्ति की जान बचाने के लिए सूअर का दिल लगा कर उसे ज़िंदा कर दिया। 58 वर्षीय पूर्व नौसैनिक का हार्ट काम नहीं कर रहा था और वह लगभग अंतिम स्थिति में पहुंच गए थे, लेकिन 22 सितंबर को उनका दिल प्रत्यारोपण के जरिये फिर धड़कने लगा, पर वह दिल सूअर का था। डॉक्टरों के अनुसार ट्रांसप्लांट के दूसरे दिन से ही वह अभी तक स्वस्थ हैं और खूब हंसी मजाक कर रहे हैं।

मेडिकल साइंस में यह दूसरा अवसर है, जब किसी मनुष्य में सूअर का दिल लगाया गया हो। इसके पहले भी अमेरिका में ही वर्ष 2022 के प्रारंभ में मानव शरीर में सूअर के हृदय का प्रत्यारोपण किया गया था जो काफी हद तक तक सफल रहा। 2022 में यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन की ही टीम ने सर्जन मुहम्मद मोहिउद्दीन, एमडी के नेतृत्व में आनुवंशिक रूप से परिवर्धित सुअर के दिल का दुनिया का पहला प्रत्यारोपण 'डेविड बेनेट' के शरीर में किया था। निश्चित मृत्यु तक पहुंच चुके डेविड इस प्रत्यारोपण के बाद दो महीने तक जीवित रहे थे। यह प्रत्यारोपण जेनोट्रांसप्लांट कहलाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

pigs heart in humans again will become an option for organ transplant in future?

क्या है ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन सर्जरी की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक प्रजाति के अंगों, ऊतकों या कोशिकाओं का प्रत्यारोपण दूसरे प्रजाति के जीव में किया जाता है। यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए एक आशाजनक खोज की तरह है जो अपने अंगों की खराबी की समस्या से जूझ रहे हैं और अंगों की कमी के कारण जीने की आस खोते जा रहे हैं।

मानव शरीर में दो बार सूअर के हृदय का प्रत्यारोपण होने के बाद ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ सकता है। हालांकि, चिकित्सा क्षेत्र में अभी यह एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है और इस चिकित्सा प्रणाली को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन यह अंगों की कमी से पीड़ित लोगों के लिए एक संभावित जीवन रक्षक उपचार हो सकता है।

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन सर्जरी का भविष्य

अंग प्रत्यारोपण से जुड़े चिकित्सक, शोधकर्ता और वैज्ञानिक सावधानी पूर्वक इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, और आशावान हैं कि दुनिया में इस प्रकार की सर्जरी भविष्य में रोगियों के लिए एक नया विकल्प प्रदान करेगी। वे सूअर के अंगों को मनुष्यों में प्रत्यारोपित करने पर लगातार काम कर रहे हैं। क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए अधिक डेटा एकत्र करने के लिए जानवरों और ब्रेन डेड मनुष्यों पर निरंतर प्रयोग कर रहे हैं।

लेकिन चिकित्सा वैज्ञानिकों के सामने एक मुख्य प्रश्न यह है कि क्या प्रत्यारोपित अंग लंबे समय तक चलेंगे या मानव अंग मिलने तक लोगों को जिंदा रखने के लिए इस सर्जरी का उपयोग है। फिर ब्रेन डेड लोगों में प्रत्यारोपण की उपयोगिता की सही जानकारी प्राप्त नहीं हो पा रही है क्योंकि ब्रेन डेड के बाद शारीरिक अंग तेजी से खराब होते हैं और प्रत्यारोपित अंगों के प्रभाव का आकलन करना लगभग असंभव बना देते हैं। हालांकि, विभिन्न चुनौतियों के बावजूद, शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह शोध अंग प्रदाताओं की भारी कमी को दूर करने का एक बेहतर विकल्प बन सकता है।

संभावित खतरे

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन से चिकित्सा अनुसंधान क्षेत्र में कुछ सफलता अवश्य मिली है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार अंग प्रत्यारोपण से जुड़े खतरे काफी अधिक हो सकते हैं, जिनमें अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के जोखिम शामिल हैं। मानव में पशुओं के अंग से संक्रमित बीमारियों का स्थानांतरण होने का खतरा होता है, जिसका जोखिम वायरस की आक्रमण शक्ति, ग्राफ्ट स्वीकृति, और प्रतिरक्षा उपाय की तीव्रता पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन में पशुओं के साथ क्रूरता और विभिन्न प्रकार की अनैतिकता भी अपनाई जाती है। कुछ देशों में ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के जरिये पशुओं का अंग और खून निकाल कर दवाइयां बनाई जा रही हैं। कुछ देशों में सूअर को लेकर भावनात्मक तनाव भी रहता है।

जर्मनी पैदा करेगा हार्ट डोनर सूअर

लुडविग मैक्सिमिलियंस यूनिवर्सिटी (एलएमयू), म्यूनिख, जर्मनी में जेनोट्रांसप्लांट पर 20 वर्षों से रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक "एकहार्ड वुल्फ" का कहना है कि जर्मन वैज्ञानिकों ने इस वर्ष मनुष्यों के लिए हृदय दाता के रूप में काम करने के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित सूअरों का क्लोन बनाने और फिर प्रजनन करने की योजना बनाई है। रायटर्स के अनुसार जर्मनी ने 2025 तक मानव हृदय प्रत्यारोपण हेतु संशोधित नई प्रजाति के सूअरों का प्रजनन करने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि कई पशु प्रेमी संगठन इस प्रकार अंग प्रत्यारोपण के खिलाफ लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं और मनुष्य के इलाज हेतु पशुओं पर क्रूरता के लिए वैज्ञानिकों को दोषी ठहरा रहें हैं।

ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए लंबा इंतजार

अमेरिकन वेबसाइट ऑर्गन डोनर के सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 110,000 लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं और हर दिन 17 मरीज अंग प्रत्यारोपण के बिना मर जाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के सर्जरी विभाग की अध्यक्ष डॉ. क्रिस्टीन लाउ का कहना है कि "अगर हम आनुवंशिक रूप से संशोधित किए गए सूअरों के अंगों का उपयोग कर सकते हैं, तो लोगों को अंग प्रत्यारोपण के लिए कभी भी इंतजार करने की आवश्यकता नहीं रहेगी, और अंग प्राप्तकर्ताओं के लिए उपयुक्त अंग तुरंत उपलब्ध हो सकेंगे। इसके साथ ही, हमें अंग प्राप्त करने और उन्हें प्राप्त कर्ताओं तक भेजने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने की आवश्यकता नहीं होगी। समय, धन और मेहनत तीनों की बचत होगी।"

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