Pet Animals: भारत में किन-किन जानवरों के पालने पर है प्रतिबंध, क्या कहता है कानून?
Pet Animals: हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को एक अधिकारिक निर्देश जारी किया गया है। जिसमें कुत्ते की पिटबुल टेरियर, अमेरिकन बुलडॉग, रॉटवीलर आदि कुछ 'क्रूर' नस्लों को प्रतिबंधित करने के निर्देश दिये गये हैं।
इसमें इन नस्लों के आयात पर प्रतिबंध के साथ-साथ उनको बेचने, प्रजनन व अन्य उद्देश्यों के लिए इन नस्लों के कुत्तों को रखना शामिल है। जारी निर्देश में यहां तक कहा गया है कि इन नस्लों के आगे प्रजनन को रोकने के लिए इनकी नसबंदी भी की जानी चाहिए। कुत्तों की इन नस्लों पर यह प्रतिबंध इनके मनुष्यों पर हमलों, काटने व क्रूर घटनाओं में वृद्धि के कारण लगाया गया है।

कुत्ते की वे नस्लें, जिन पर प्रतिबंध के निर्देश
पशुपालन व डेयरी विभाग द्वारा गठित एक समिति ने कुत्तों की कुछ विदेशी नस्लों को मानव जीवन के लिए खतरनाक बताया, जिसके चलते इन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। जिनमें पिटबुल टेरियर, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टेरियर, टोसा इनु, फिला ब्रासीलीरो, अमेरिकन बुलडॉग, डोगो अर्जेंटीना, बोएरबोएल कांगल, मध्य एशियाई शेफर्ड कुत्ता, कोकेशियान शेफर्ड कुत्ता, दक्षिण रूसी शेफर्ड कुत्ता, टॉर्नजैक, सरप्लानिनैक, जापानी टोसा और अकिता, मास्टिफ़्स (बॉएरबुल्स), रॉटवाईलर, टेरियर्स, रोडेशियन रिजबैक, वुल्फ डॉग्स, कैनारियो, अकबाश डॉग, मॉस्को गार्ड डॉग, केन कोरसो और बैंडोग शामिल है।
भारत में प्रतिबंधित कुछ जानवर
इसके अलावा भारत में ऐसे अनेक जानवर है जिस पर उनके 'क्रूरता' अथवा अन्य कारणों से उनको पालने अथवा रखने पर पूर्णतय प्रतिबंध व गैर-काननी है।
भारतीय पैंगोलिनः इसे सल्लू सांप के रूप में भी जाना जाता है, जो एक स्तनधारी प्राणी है तथा लुप्त होने की कगार पर है। रोग-निवारण हेतु इसको खाने की झूठी व अंधविश्वासी प्रथाओं के कारण इसका शिकार किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैंगोलियन प्रति वर्ष लगभग 7 करोड़ कीडे़ (चींटियां, दीमक व छोटे कीड़े-मकोड़े) खा जाता है। इसके विलुप्त होने पर प्रकृति में असुंतलन होने का खतरा है। जिसके चलते इसके शिकार व पालने पर पूर्णतया प्रतिबंध है।
पिटबुल कुत्ताः दुनिया के सबसे खूंखार कुत्तों की नस्लों में 'पिटबुल' का स्थान सबसे ऊपर है। इस नस्ल को बुलडॉग व टेरियर के बीच क्रॉस करके पैदा किया गया है। भारत में लगभग 45 प्रतिशत कुत्ते के काटने के मामले पिटबुल के हैं। भारत व विश्व में ऐसे अनेकों मामले हैं, जिसमें पिटबुल ने हमलाकर अनेकों जान ली है। यहां तक कि इस नस्ल के कुत्ते ने अपने मालिक को भी नहीं छोड़ा है। इसलिए इस नस्ल को भारत सहित कुछ अन्य देशों में प्रतिबंधित किया गया है।
इसके अलावा कछुओं व तोते की कुछ प्रजातियां, बड़ी बिल्लियां (शेर, चीता, बाघ आदि), हाथी, गैंड़ा, भालू, गोह (मोनिटर लिजार्ड), मगरमच्छ आदि जानवरों व पक्षियों को भारत में प्रतिबंधित किया गया है।
क्या कहता है कानून
क्या आप जानते हैं कि जानवरों/पक्षी को सताना, कैद करना, पालतू बनाना व उनको मारना अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए कानून में सजा व जुर्माने का प्रावधान है। चलिए ऐसे कुछ कानून के बारे में जानते हैं।
1. प्रिवेंशन ऑन क्रूशियल एनिमल एक्ट 1960 की धारा 11(1) के अनुसार पालतू जानवर को छोड़ने, उसे भूखा रखने, कष्ट पहुंचाने, भूख और प्यास से मारना अपराध है। जिस पर सजा व जुर्माने पर प्रावधान है।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(ए) के मुताबिक, हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना, भारत के हर नागरिक का मूल कर्तव्य है।
3. अपने पालतू जानवर को घर से निकालना अपराध है। इसके लिए पीसीए एक्ट, 1960 की धारा 11(1)(i) और धारा 11(1)(j) के तहत तीन महीने की जेल हो सकती है।
4. किसी भी जानवर को मारना अथवा अपंग करना कानून अपराध है। ऐसा करने पर आईपीसी की धारा 428 व 429 के तहत 5 साल तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है।
5. पीसीए अनुच्छेद 22(2) के अनुसार भालू, बंदर, बाघ, तेंदुए, शेर और बैल को मनोरंजन के लिए प्रशिक्षण देना और इस्तेमाल करना गैरकानूनी है।
6. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के अनुसार किसी जानवर को जहर देना, जान से मारा अपराध है। इसमें दो साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है।
7. एंटी बर्थ कंट्रोल (2001) कानून के तहत पालतू अथवा आवारा कुत्ते को मारना गैरकानूनी है। पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्ते का बर्थ कंट्रोल यानि प्रजनन को नसबंदी द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
8. पशुओं के प्रति क्रूरता रोकथाम (बूचड़खाना) नियम, 2000 के तहत किसी भी जानवर (चिकन सहित) को बूचड़खाने के अलावा कहीं और नहीं काटा जा सकता है। बीमार व गर्भधारक जानवरों को भी नहीं काटा जा सकता है।
9. स्लॉटर हाउस नियम (2001) के अनुसार देश के पशु बलि देना गैरकानूनी है।
10. जानवरों को लंबे समय तक बांधकर रखना, अपराध की श्रेणी में आता है। अगर आप जानवर को घर के बाहर नहीं निकालते, तो यह भी कैद मानी जाती है। इसमें 3 माह की जेल और जुर्माना भी हो सकता है।
11. प्रिवेंशन ऑन क्रूशियल एनिमल एक्ट, 1960 की धारा 11(1) के तहत अगर किसी गोशाला, कांजीहाउस अथवा घर में जानवर को खाना और पानी नहीं दिया जा रहा है, तो यह अपराध है।
12. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 16 (सी) के तहत जंगली पक्षियों या सरीसृपों को नुकसान पहुंचाना, उनके अंड़ों को नुकसान पहुंचाना, घोंसलों को नष्ट करना अपराध है। ऐसे में अपराधी को 3 से 7 साल का कारावास और 25,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। इसके साथ-साथ इस कानून का उद्देश्य वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना है। इस कानून में वर्ष 2003 में संशोधन किया गया, जिसमें दंड और जुर्माने को और अधिक कठोर किया गया है।
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