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इंद्रा नूई ने माना कामकाजी महिलाओं को नहीं हासिल हो सकता सबकुछ

Indra Nooyi-discussion
न्‍यूयॉर्क। वर्ष 2011 में जब भारत के तमिलनाडु राज्‍य की राजधानी चेन्‍नई में जन्‍म लेने वाली इंद्रा नूई को पेप्सिको को सीईओ बनाया गया था तो भारत के खाते में एक और गौरवशाली पल जुड़ गया था।

नूई को आज दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शुमार किया जाता है। दुनिया की इस सबसे शक्तिाशाली महिला ने माना है कि कोई भी कामकाजी महिला अगर कहती है कि उसने सबकुछ हासिल कर लिया है तो वह सिर्फ दिखावा करती है।

पढ़िए यह रिपोर्ट और जानिए कि आखिर ऐसी क्‍या बात हो गई कि इंद्रा नूई यह कहने पर मजबूर हो गईं।

बातों बातों में निकल गई बात
नूई के मुताबिक किसी भी कामकाजी महिला के लिए घर और आफिस के बीच संतुलन बना पाना काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इंटरनेट पर वह डिस्‍कशन वायरल हो गया है जिसमें नूई ने यह बात कही थी।

नूई ने इस डिस्‍कशन के दौरान कहा, 'मुझे नहीं लगता कि महिलाएं सभी कुछ हासिल कर सकती हैं। मैं इस बात से बिल्‍कुल भी सहमत नहीं हूं। हम सिर्फ दिखावा करते हैं कि हमें सबकुछ हासिल हो गया है।'

58 वर्षीय नूई ने यह बातें अटलांटिंक मीडिया कंपनी के मालिक डेविड ब्रैडले के साथ उस समय कहीं जब वह एस्‍पैन आइडियाज फेस्टिवल में शिरकत कर रही थीं तो कि कोलोराडो में इसी हफ्ते आयोजित हुआ था।

अच्‍छी मां होने पर भी इंद्रा को है शक

नूई ने कहा कि कई बार उन्‍हें इस बात का अपराध बोध होता है कि वह 34 वर्षों तक अपनी बेटियों का पालन पोषण ठीक से करने की कोशिश करती रहीं। उन्‍होंने याद किया कि कैसे वह अपनी बेटियों के स्‍कूल में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में अपने काम की वजह से शामिल ही नहीं हो पाती थी।

नूई ने इस दौरान उस सपोर्ट सिस्‍टम के बारे मे भी बात की जिसे हर कामकाजी महिला को तैयार करना ही पड़ता है।

नूई ने कहा, 'हर दिन आपको यह फैसला करना पड़ता है कि आज आप एक पत्‍नी बनकर रहेंगी या फिर एक मां के रोल में नजर आएंगी। सिर्फ इतना ही नहीं आपको दिन में कई बार इस फैसले को लेना पड़ता है। फिर आपको काम के दौरान कई ऐसे लोगों की मदद लेनी पड़ती है जो आपके आसपास होते हैं। हम अपने परिवार का सहयोग इसलिए करते हैं, ताकि वह हमारी मदद कर सके।'

नूई ने आगे कहा, 'हमने अपनी जिंदगी इस तरह से जी है कि हम एक अच्‍छे माता-पिता बन सकें। लेकिन मैं इस बात को लेकर निश्चित नहीं हूं कि मैं अपनी बेटियों के लिए एक अच्‍छी मां साबित हो पाईं हूं या नहीं। मैं नहीं जानती कि जब आप उनसे यह सवाल करेंगे तो वह क्‍या जवाब देंगी। मैं हर उस तरीके के साथ खुद को समायोजित करने की कोशिश करती हूं जो मुझे मदद कर सके।'

हर पल करना पड़ता है संघर्ष

नूई की ओर से कहीं गई कुछ बातों को शायद उन महिलाओं का समर्थन हासिल हो सकता है जो यह अपने करियर और घर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं और जो अक्‍सर सोशल मीडिया पर सक्रिय नजर आती हैं।

नूई ने इस डिस्‍कशन के दौरान कहा, 'मेरा मानना है कि पूरी जिंदगी आपको आपकी शारीरिक क्षमताओं और करियर के बीच संघर्ष करना पड़ता है और आप करती हैं। जब आपको बच्‍चे चाहिए होते हैं, उसी समय पर आपको

अपना करियर भी संवारना होता है। उसी तरह से जब आप अपनी उम्र के मध्‍य में होती हैं तो आपके बच्‍चों को आपकी जरूरत होती है क्‍योंकि वह टीनएज से गुजर रहे होते हैं। उन्‍हें उस दौर में आपकी जरूरत होती है।'

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है, आपके माता-पिता को आपकी जरूरत होती क्‍योंकि वह वृद्धावस्‍था में होते हैं। नूई कहती हैं कि हम सबकुछ हासिल नहीं कर सकती हैं।

घर के बाहर ही रहे पद और प्रतिष्‍ठा

पेप्सिको के 44 वर्षों के इतिहास में पांचवीं सीईओ नूई को आज तक याद है कि आज से 14 वर्ष पहले जब उन्‍हें बताया गया था कि उन्‍हें कंपनी का प्रेसीडेंट बनाया जाएगा और बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स में शामिल किया जाएगा, उस समय उनकी मां ने कैसी प्रतिक्रिया दी थी।

नूई की मां ने उनसे कहा, 'मैं तुम्‍हें बता दूं कि तुम भले ही कंपनी की सीईओ बन जाओ या फिर बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स में शामिल हो जाओ लेकिन जैसे ही तुम इस घर में दाखिल होगी तुम एक पत्‍नी, एक बेटी, एक बहू और एक मां होगा। वह जगह कोई नहीं ले पाएगा। इसलिए जो भी पद तुम्‍हें हासिल हो, उसे बाहर ही छोड़कर आओ।'

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