बंद हो रहा है आपका प्यारा Parle-G, एक बार फिर याद कर लीजिए स्वाद
नयी दिल्ली। ''बचपन से बड़ा कोई स्कूल नहीं, क्यूरोसिटी से बड़ी कोई टीचर नहीं'' का संदेश देते हुए झोपड़ी से लेकर रईसजादों तक की पहली पसंद रही पारले जी बिस्कुट की सबसे पुरानी यूनिट बिलेपार्ले को बंद किया जा रहा है। कंपनी प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। जो जानकारी आ रही है उसके मुताबिक आने वाले समय में पारले जी की सारी यूनिटें बंद की जा सकती हैं।
अभी यह कहना मुश्किल होगा कि पारले जी हमेशा के लिए बॉय-बॉय कह देगा या फिर इसका कुरकुरा स्वाद लोगों मिलता रहेगा। आज बाजार में बिस्कुट के तौर पर कई विकल्प मौजूद हैं लेकिन पारले जी के साथ जो बचपन की यादें जुड़ी हैं उन्हें भुलाया नहीं जा सकता। तो आईए आज उन्हीं यादों को ताजा करते हुए पारले जी के बारे में आपको कुछ मजेदार बातें बताते हैं जो शायद दुनिया नहीं जानती होगी।

90 साल से लोगों के जुबान पर छाया है पारले जी
पारले जी कंपनी की शुरुआत 1929 में हुई थी। बिस्कुट का उत्पादन 1939 से शुरु किया। मुम्बई में ही कंपनी का मुख्यालय भी है। पार्ले जी बिस्कुट की शुरुआत पार्ले ग्लुको के काम से हुई थी यह 1980 तक इसी नाम से बिकता रहा।

पारले जी ने कभी नहीं बदला अपना LOGO
पारले जी ने कभी अपना लोगो नहीं बदला। पैक पर छपा मासूम सा बच्चा आज भी पारले-जी की पहचान है।

जान लीजिए G का मतलब
शुरुआत में ''पारले जी'' में G का मतलब ''Glucose'' था जिसे बाद में बदल कर G माने ''Genius'' कहा जाने लगा।

स्वाद भरे, शक्ति भरे Parle-G
दूरदर्शन पर पहली बार पार्ले जी ने विज्ञापन किया जो कुछ इस तरह था स्वाद भरे, शक्ति भरे Parle-G... जिसमे एक बूढ़े दादाजी और बच्चो को दिखाया गया था। यह विज्ञापन पहली बार 1982 में आया था।

पैकजिंग भी थी खास
पहले पार्ले जी वैक्स कागज के पैकेटों में आया करता था लेकिन 2001 से प्लास्टिक के पैकेट में पैक किया जाने लगा।

पारले जी गर्ल को जानते हैं आप
नीचे तस्वीर नीरू देशपांडे की है जो नागपुर में रहती हैं। जिन्हें parle G girl समझा जाता है। इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है parle g girl एक काल्पनिक चित्रण है जिसे Everest creative Maganlal Daiya ने 1960 में बनाया था।












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