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Pakistan Army Chief आसिम मुनीर: क्या है पाकिस्तान में सेना प्रमुख, तख्तापलट और तानाशाही का आपसी सम्बन्ध

Pakistan Army Chief की नियुक्ति को लेकर लंबे समय चल रहा सस्पेंस हट गया है। सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह को पाकिस्तान का नया आर्मी चीफ बनाया गया है। वे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी - ISI के चीफ रह चुके है और जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह लेंगे। असीम 2018-2019 में 8 महीनों के लिए ISI चीफ रह चुके है।

pakistan army chief asim munir history of Pakistan Army Coup

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    PM इमरान खान को कुर्सी से हटाने में भी जनरल मुनीर का हाथ बताया जाता है। कुछ खबरों के मुताबिक 14 फरवरी 2019 को भारत के पुलवामा में आतंकवादी हमलें की साजिश में भी मुनीर का नाम सामने आता है।

    जनरल मुनीर, पाकिस्तान में सेना प्रमुख तब बने है जब वहां सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। दरअसल, इमरान खान की कुर्सी जाने के बाद से इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि पाकिस्तान में तख्तापलट हो सकता है।

    हालाँकि, ऐसा अभी तक तो हुआ नहीं है, लेकिन इसकी संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान में अब क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा लेकिन पाकिस्तान में हुए अब तक के सभी तख्तापलट और सैन्य तानाशाही के बारे में जरुर जान लेना चाहिए।

    क्या होता है तख्तापलट?

    दुनिया में पहली बार तख्तापलट शब्‍द का प्रयोग 19वीं सदी से चलन में आया है। उस समय लैटिन अमेरिका, स्‍पेन और पुर्तगाल में तख्‍तापलट की कई घटनाएं हुई थीं। दरअसल, जब किसी भी देश में सेना या विपक्षी दल, किसी निर्वाचित सरकार को जबरन हटाकर खुद सत्‍ता पर काबिज हो जाते हैं, उस स्थिति को तख्तापलट कहते है।

    सेना द्वारा किये गए तख्तापलट को मिलिट्री कू (coup) कहा जाता है। इस स्थिति में सामान्यतः देश में तानाशाही लागू हो जाती है जिसमें नागरिकों के मूलभूत अधिकार लगभग समाप्त हो जाते हैं। संविधान में बिना किसी सहमति के मनचाहे फेरबदल किये जाते हैं।

    किस देश में हुआ सबसे ज्यादा तख्तापलट?

    डेटासेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, बोलिविया दुनिया का वह देश है जिसने अब तक कई बार तख्‍तापलट का दौर देखा है। सन 1950 से लेकर 2019 तक देश में 23 बार तख्‍तापलट या तख्‍तापलट की कोशिशें हुई हैं।

    बोलिविया के अलावा अफ्रीकी देशों में सबसे ज्‍यादा बार तख्‍तापलट हुआ और इसके बाद एशियाई देशों का नंबर आता है। अफ्रीकी देश सूडान में 16 बार तख्‍तापलट के प्रयास हुए तो इराक में 12 बार तख्‍तापलट की कोशिशें हुईं।

    इसके अलावा 1950 से 2019 तक अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर 476 बार तख्‍तापलट हुए हैं। 1960 से 1979 तक 224 बार अलग-अलग देशों में तख्‍तापलट हुआ। पाकिस्तान में कुल चार बार तख्तापलट हुआ है।

    पाकिस्तान में कब-कब हुआ तख्तापलट?

    भारत विभाजन के फलस्वरूप पाकिस्‍तान के रूप में एक नए देश का गठन हुआ। तब से लेकर अब तक वहां की सत्ता पर सेना ने कई दशकों तक राज किया है। दरअसल, पाकिस्तान के शुरूआती वर्षों में ही वहां पहला तख्‍तापलट 1953 में हो गया था। हालाँकि, यह सैन्‍य नहीं, बल्कि संवैधानिक तख्‍तापलट था लेकिन इसने सैन्‍य अधिकारियों को निर्वाचित सरकारों को बेदखल करने का रास्‍ता जरुर खोल दिया था।

    तब गवर्नर-जनरल गुलाम मोहम्मद ने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री ख्वाजा की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। बावजूद इसके, नजीमुद्दीन की सरकार को संविधान सभा का समर्थन प्राप्त था लेकिन गुलाम मोहम्‍मद ने संविधान सभा को ही खारिज कर दिया।

    1958 में पाकिस्‍तान में दोबारा तख्‍तापलट हुआ। पाकिस्तानी के पहले राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर मिर्जा ने संविधान सभा और प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त कर किया था। जिसके बाद, आर्मी कमांडर-इन-चीफ जनरल अयूब खान को चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्‍ट्रेटर नियुक्त किया गया। तेरह दिन बाद अयूब खान ने मिर्जा को ही चलता कर खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। यह पाकिस्तान का पहला मिलिट्री कू था।

    अयूब, पूर्वी पाकिस्तान के पाकिस्तान से विभाजन को लेकर बढ़ रहे तनाव को रोकने में असफल रहे और 1969 में उन्होंने याह्या खान को पाकिस्तान की सत्ता सौंप दी। वे खुद एक सैन्य अधिकारी थे और सत्ता मिलते ही उन्होंने वहां मार्शल लॉ लागू कर दिया।

    1971 में, बांग्लादेश के गठन के बाद, पाकिस्तान में चुनाव करवाए गए और जुल्फीकार अली भुट्टो निर्वाचित सरकार के मुखिया बने। मगर छह साल बाद ही पाकिस्तान में एकबार फिर तख्तापलट हो गया और आर्मी चीफ जनरल जिया उल हक ने शासन की कमान अपने हाथों में ले ली। इस तख्तापलट को 'ऑपरेशन फेयर प्ले' के नाम से भी जाना जाता है। यह पाकिस्तान का दूसरा मिलिट्री कू था।

    यही नहीं, जुल्फिकार अली भुट्टो की राजनैतिक हत्या में भी जनरल जिया का नाम सामने आता है। दरअसल, 4 अप्रैल 1979 को रावलपिंडी में भुट्टो को किसी हत्या के मामले में फांसी दी गयी थी। पाकिस्तान के इतिहास में यह एक असाधारण मामला था क्योंकि पहली बार वहां किसी इतने बड़े नेता को फांसी दी गयी थी। जबकि जनरल जिया के पास उनकी सजा को उम्रकैद में बदलने का भी पूरा अधिकार था।

    जनरल जिया ने खुद को इस्लाम का सिपाही घोषित किया और वहां के संविधान को ही बदल दिया। उनके शासनकाल में जारी किये गए संवैधानिक संशोधनों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

    उसके बाद, बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ की निर्वाचित सरकारें बनी लेकिन 1999 में पाकिस्तान को तीसरा मिलिट्री कू और कुल चौथी बार तख्तापलट देखना पड़ गया। तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार को आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ ने सत्ता से बेदखल करके लंबे समय तक शासन किया था।

    यह भी पढ़ें: पाकिस्तान के नये आर्मी चीफ आसिम मुनीर का कैसा है चाल, चरित्र और चेहरा... रॉ अधिकारियों से समझिए

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