UPA to INDIA: कैसी रही यूपीए से इंडिया बनने की यात्रा, जानें यूपीए के घटक दलों के बारे में

UPA to INDIA: आज से ठीक 10 माह बाद लोकसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। इसको लेकर दो बड़े घटक एनडीए और इंडिया ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इंडिया का पूरा नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलायंस रखा गया है। इसकी पहली बैठक बेंगलुरु में हुई और दूसरी बैठक मुंबई में प्रस्तावित है‌। एक तरह से यह यूपीए का विस्तार है। साल 2014 में यूपीए में 15 राजनीतिक दल शामिल थे, वही इंडिया में इनकी संख्या 26 तक पहुंच गई है।

2004 लोकसभा चुनावों में बना यूपीए

2004 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 145, जबकि बीजेपी को 138 सीटें मिली। चुनाव परिणाम आने के बाद एनडीए को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर यूपीए का गठन किया। इसमें कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और सीपीएम के दिवंगत महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत की अहम भूमिका रही। उस दौरान यूपीए गठन के समय कांग्रेस को अन्य पार्टियां ने समर्थन दिया था। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत यह गठबंधन बना। जिसपर 17 मई 2004 को हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा चार लेफ्ट पार्टियों सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक ने बाहर से समर्थन दिया‌। इन लेफ्ट पार्टियों द्वारा समर्थन वापस लेने के बावजूद यूपीए ने 2009 के चुनावों में जीत हासिल की और सत्ता में वापसी की।

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2014 में यूपीए का कुनबा बढ़ा

2014 के लोकसभा चुनावों में यूपीए को फिर से सक्रिय किया गया। मगर अबतक यूपीए में शामिल रही ज्यादातर पार्टियों से कांग्रेस के संबंध खराब हो चुके थे। यूपीए में मुख्य रूप से कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), लोक जनशक्ति पार्टी (एलजीपी), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), पट्टाली मक्कल काटची (पीएमके), झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), एआईएमआईएम, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए), आरपीआई (जी) और केरल कांग्रेस (जे) शामिल थी‌। बाद में डीएमके, रालोसपा, जेडीएस, आरएसपी, पीस पार्टी, केपीजेपी, वीसीके व आईजेके आदि दल शामिल हुए।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपीए को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। जहां कांग्रेस 206 से 44 सीटों पर सिमट गई तो यूपीए गठबंधन को कुल 59 सीटें ही मिलीं।

वर्ष 2019 में बिना चेहरे चुनाव में उतरा यूपीए

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने कमर कसी। महागठबंधन ने प्रधानमंत्री के चेहरे के बिना चुनाव में उतरने की रणनीति बनाई। कांग्रेस ने नया नारा 'अब होगा न्याय' जारी करते हुए कहा कि देश में 'अन्याय' का माहौल है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का प्रचार अभियान 'न्याय' के आसपास केन्द्रित होगा। यह शब्द न केवल पार्टी की प्रस्तावित न्यूनतम आय गारंटी योजना को रेखांकित करता है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को न्याय प्रदान करने की बात भी करता है।

चुनाव परिणामों में कांग्रेस सहित यूपीए को 90 सीटों पर ही संतोष करना। जिसमें कांग्रेस की सर्वाधिक 52 सीटें थी। इस गठबंधन में मुख्य पार्टी कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा, लोकतांत्रिक जनता दल, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी, जनता दल (सेक्यूलर), लेफ्ट पार्टियां, तेलुगु देशम पार्टी, डीएमके, केरल कांग्रेस (जेकब) शामिल थी।

लोकसभा चुनाव के बाद सभी अलग-अलग

2004 में गठित यूपीए लोकसभा चुनाव को लेकर एक नजर आता है लेकिन जैसे ही राज्य के विधानसभा चुनावों की घोषणा होती है, सभी दल अपनी अपनी डफली अपना राग बजाते नजर आते हैं। उसका दुष्परिणाम यह रहा कि 2014 के बाद 2019 में भी यूपीए को जनता ने समर्थन नहीं दिया।

सर्वप्रथम ममता बनर्जी ने खारिज किया यूपीए

2019 लोकसभा चुनावों के परिणाम के बाद यूपीए हाशिए पर आ गया था। दिसंबर 2021 में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट होने की आवश्यकता पर जोर देते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि यूपीए क्या है? कोई यूपीए नहीं है। इससे संकेत मिला कि अब यूपीए का कोई अस्तित्व नहीं है और अब एक नये गठबंधन का समय आ गया है।

16 के पास 142 और अन्य 10 दलों के पास एक भी सांसद नहीं

नए बने गठबंधन इंडिया में 26 राजनीतिक दलों का समावेश है। इनमें से 16 के पास 142 लोकसभा सांसद हैं तो दूसरी और अन्य 10 दलों के पास एक भी सांसद नहीं है। इसमें कांग्रेस के पास 49, तृणमूल कांग्रेस 23, डीएमके 24, आप 1, जेडीयू 16, झामुमो 1, एनसीपी 5, उद्धव शिवसेना 6, सीपीआई 2, सीपीआईएम 3, नेशनल कॉन्फ्रेंस 3, सपा 3, आरएसपी 1, वीसीके 1, आईईयूएमएल 3 तथा केरल कांग्रेस एम का एक सांसद शामिल है। इसके अलावा राजद, रालोद, अपना दल के, पीडीपी, सीपीआई एमएल एल, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, एमडीएमके, केडी एमआईके, एमएमके व केरल कांग्रेस जोसेफ का एक भी सांसद नहीं है।

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