• search

ऑपरेशन ब्लूस्टार: पूरी कहानी, कब, कैसे और क्यों फिर उसके बाद

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्ली। 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' भारतीय सेना द्वारा अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था। ये भारत के इतिहास में एक ऐसी घटना जिसने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की मौत की पटकथा लिखी थी क्योंकि ये ही उनकी हत्या का मुख्य कारण था, जिसने देश की राजनीति की दिशा को ही मोड़ दिया था।

    क्यों चला था 'ऑपरेशन ब्लू स्टार'

    क्यों चला था 'ऑपरेशन ब्लू स्टार'

    'ऑपरेशन ब्लू स्टार' उनके खात्मे के लिए चलाया गया था, जो अलगाववादी विचारधारा को जन्म दे रहे थे। पंजाब में अलग राज्य की मांग की समस्या ने सिर उठाना शुरू कर दिया था। पंजाब समस्या की शुरुआत 1970 के दशक से अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित मांगों को लेकर शुरु हुई थी। पहले साल 1973 में और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया। मूल प्रस्ताव में सुझाया गया था कि भारत की केंद्र सरकार का केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर अधिकार हो जबकि अन्य विषयों पर राज्यों को पूर्ण अधिकार हों। अकाली ये भी चाहते थे कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले।

    जरनैल सिंह भिंडरावाले.....ने बदल दी पंजाब की राजनीति

    जरनैल सिंह भिंडरावाले.....ने बदल दी पंजाब की राजनीति

    यही वह वक्त भी था जब पंजाब में अकाली दल कांग्रेस का विकल्प बनकर उभर चुका था, इंदिरा गांधी ने इसके जवाब के तौर पर सरदार ज्ञानी जैल सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर खड़ा किया। जैल सिंह का बस एक ही मकसद था-शिरोमणि अकाली दल का सिखों की राजनीति में वर्चस्व कम करना। इन सब हालात के बीच एक शख्स का उदय हुआ जिसका नाम था जरनैल सिंह भिंडरावाले, जिसे पहले अकाली दल के काट के लिए लाया गया था लेकिन बाद में वो सरकार के लिए चुनौती बन गया।

    13 अकाली कार्यकर्ता मारे गए

    13 अकाली कार्यकर्ता मारे गए

    जैल सिंह और दरबारा सिंह ने उसे आगे बढ़ाया और उस पर जब संजय गांधी का हाथ हो गया तो वो पंजाब का अघोषित मुखिया बन बैठा था लेकिन तब तक सरकार ने ये नहीं सोचा था कि जिसको वो समर्थन दे रहे हैं वो ही एक दिन फिजा में जहर घोलेगा और आतंकवाद का रास्ता अपना लेगा। धीरे-धीरे उसने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली थी । 1977 में उसे दमदमी टकसाल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस बीच अमृतसर में 13 अप्रैल 1978 को अकाली कार्यकर्ताओं और निरंकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें 13 अकाली कार्यकर्ता मारे गए। इस झड़प के बाद 24 अप्रैल 1980 को निरंकारियों के प्रमुख बाबा गुरबचन सिंह की हत्या कर दी गई, नामजद ज्यादातर लोगों का ताल्लुक भिंडरावाले से था।

     इंदिरा गांधी के फैसले का विरोध शुरू हो गया

    इंदिरा गांधी के फैसले का विरोध शुरू हो गया

    इसी बीच इंदिरा गांधी को 1980 के चुनाव में जबरदस्त जीत मिली, लोकसभा की 529 सीटों में से कांग्रेस को 351 सीटें मिलीं। ज्ञानी जैल सिंह को प्राधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गृह मंत्री बनाया, पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकाली दल को पछाड़ा। पंजाब में दरबारा सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद अकालियों और दरबारा सिंह सरकार में तनातनी चलने लगी थी। जनगणना का दौर था और लोगों से उनके धर्म और भाषा पूछी जाती थी, इस दौर में अखबार पंजाब केसरी ने हिंदी को लेकर मुहिम चला दी, जिससे माहौल और खराब हो गया, हिंदी की मुहिम से कट्टर सिख नाराज हो गए, जिनमें भिंडरावाले भी थे और यहीं से इंदिरा गांधी के फैसले का विरोध शुरू हुआ।

     जरनैल सिंह भिंडरावाले पर लगा हत्या का आरोप

    जरनैल सिंह भिंडरावाले पर लगा हत्या का आरोप

    इस बीच 9 सितंबर 1981 को हथियार बन्द लोगों ने पंजाब केसरी के संपादक लाला जगत नारायण को गोली मार दी, इल्जाम जरनैल सिंह भिंडरावाले पर भी आया। लाला जगत नारायण की हत्या के बाद 15 सितंबर को अमृतसर के गुरूद्वारा गुरुदर्शन प्रकाश से भिंडरावाले को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन सबूतों के अभाव में जमानत मिल गई। इस दौरान पंजाब को अलग देश बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया। हिंसा के उस दौर में पंजाब के डीआईजी एएस अटवाल की हत्या स्वर्ण मंदिर के सीढ़ियों पर कर दी गई, एएस अटवाल की लाश घंटों स्वर्ण मंदिर के सीढियों पर पड़ी रही, उनके शव को हटाने के लिए मुख्यमंत्री दरबारा सिंह को जरनैल सिंह भिंडरावाले से मिन्नत करनी पड़ी थी।

    भिंडरावाले के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रही थीं इंदिरा गांधी

    भिंडरावाले के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रही थीं इंदिरा गांधी

    पंजाब में हालात विस्फोटक होते जा रहे थे, अकाली भी विरोध कर बैठे उनकी मांग थी अनंतपुर साहब के रिजॉलूशन को पास करो, इसी बीच 5 अक्टूबर, 1983 को सिख चरमपंथियों ने कपूरथला से जालंधर जा रही बस को रोक लिया, बस में सवार हिन्दू यात्रियों को चुन-चुन कर मार डाला गया, पता चला कि इन चरमपथियों को पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा है। इस घटना के अगले दिन इंदिरा गांधी ने दरबारा सिंह की सरकार को हटा दिया और पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगा दिया लेकिन इसके बाद भी पंजाब में हिंसा, मार-काट जारी रहा, इंदिरा गांधी भिंडरावाले के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रही थीं।

    15 दिसंबर, 1983 को भिंडरावाले ने किया अकाल तख्त पर कब्जा

    15 दिसंबर, 1983 को भिंडरावाले ने किया अकाल तख्त पर कब्जा

    15 दिसंबर, 1983 को भिंडरावाले ने अपने हथियार बंद साथियों के साथ स्वर्ण मंदिर के अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया। आपको बता दें कि अकालतख्त का मतलब एक ऐसा सिंहासन जो अनंतकाल के लिए बना हो। भिंडरावाले चाहते थे कि हिन्दू पंजाब छोड़ कर चले जाएं, ये सीधे-सीधे दिल्ली सरकार को चुनौती थी, इंदिरा गांधी ने इसी दौरान एक बड़ा फैसला लिया और उन्होंने 1 जून, 1984 को पंजाब को सेना के हवाले कर दिया, जिसका कोड वर्ड रखा गया 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' ।

    'ऑपरेशन ब्लू स्टार' की अगुवाई मेजर जनरल कुलदीप सिंह बरार ने की

    'ऑपरेशन ब्लू स्टार' की अगुवाई मेजर जनरल कुलदीप सिंह बरार ने की

    'ऑपरेशन ब्लू स्टार' की अगुवाई मेजर जनरल कुलदीप सिंह बरार को सौंपी गई, 3 जून को अमृतसर से पत्रकारों को बहार कर दिया गया. पाकिस्तान से लगती सीमा को सील कर दिया गया, मंदिर परिसर में रह रहे लोगों को बाहर आने को कहा गया, 5 जून को 7 बजे तक सिर्फ 129 लोग ही बाहर आए, लोगों ने बताया कि भिंडरावाले के लोग बाहर आने से रोक रहे हैं। 5 जून, 1984 को शाम 7 बजे सेना की कार्यवाई शुरू हुई, रात भर दोनों तरफ से गोली बारी होती रही। फायरिंग में चली कई गोलीयां हरिमंदिर साहिब की तरफ भी गई, अकालतख्त को भी भारी नुकसान हुआ। 6 जून की देर रात जरनैल सिंह भिंडरावाले की लाश सेना को मिली, 7 जून की सुबह ऑप्रेशन ब्लू स्टार' खत्म हो गया, मालूम हो इस ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुल 83 सौनिक मारे गए जिसमें तीन सेना के अधिकारी थे जबकि मरने वाले आतंकवादियों और अन्य की संख्या 492 रही।

    इंदिरा गांधी की हत्या

    इंदिरा गांधी की हत्या

    'ऑपरेशन ब्लू स्टार' से नाराज इंदिरा गांधी के सिख गार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी और फिर सिखों के खिलाफ दंगों में कत्लेआम हुआ, जो देश के इतिहास का वो काला पन्ना है, जिसे यादकरके आज भी लोग सिहर उठते हैं।

    यह भी पढें: By Elections 2018 Results Live: यूपी की नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा 6211 वोटों से जीती

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Operation Blue Star was an Indian military operation which occurred between 1 June and 6 June 1984, ordered by Indira Gandhi in order to establish control over the Harmandir Sahib Complex in Amritsar, Punjab, and remove militant religious leader Jarnail Singh Bhindranwale and his militant armed followers from the complex buildings

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more