Online Frauds: भारत बना साइबर क्राइम का 'अड्डा', रोज बन रहे नए शिकार
भारत ऑनलाइन फ्रॉड का अड्डा बनता जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद साइबर अपराध के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है। इसकी वजह से फिनटेक कंपनियों को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।
भारत में जितनी तेजी से इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है, उतनी ही तेजी से ऑनलाइन अपराधों की संख्यां भी बढ़ रही है। कोरोना महामारी के बाद से ऑनलाइन धोखाधड़ी के सबसे ज्यादा मामले भारत में सामने आए हैं।

साइबर अपराधी बड़ी ही आसानी से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे है और उनकी गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। ऑनलाइन फ्रॉड का ऐसा ही ताजा मामला पुणे से है, जहां एक 35 साल के युवक से अपराधियों ने एक करोड़ रुपए ठग लिए। युवक को पिज्जा रेस्टोरेंट की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर यह ठगी की गयी है। कुछ दिन पहले ऐसा ही मामला केरल से आया था, जहां वर्क फ्रॉम होम जॉब के नाम पर एक महिला से ₹7 लाख की ठगी की गयी थी।
इस तरह की गयी ठगी
इस साल अक्टूबर में भारत में वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का आयोजन होना है। ऐसे में दुनियाभर की टीमें और उनके समर्थक भारत में क्रिकेट मैच खेलने और देखने के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में रेस्टोरेंट और होटल इंडस्ट्री को इससे बड़ा फायदा होने वाला है। पुणे का मामला भी क्रिकेट वर्ल्ड कप से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित युवक से पिज्जा रेस्टोरेंट की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर यह ठगी की गई है। पीड़ित युवक ने जून के पहले सप्ताह में पिज्जा रेस्टोरेंट की फ्रेंचाइजी लेने के लिए एक ऑनलाइन फार्म भरा था।
9 जून को फॉर्म भरने के बाद पीड़ित युवक को साइबर अपराधी की तरफ से एक कॉल आता है, जिसमें अपराधी खुद को फ्रेंचाइजी कंपनी का एग्जीक्यूटिव बताता है। युवक को यह कॉल ठीक लगा और जरूरी दस्तावेज देने के बाद 21 जून को उसे फ्रेंचाइजी ओपन करने का लेटर ऑफ इंटेंट मिलता है, जिसमें कॉन्ट्रेक्ट के नियम और शर्त लिखे थे।
फ्रेंचाइजी लेने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए युवक से शुरुआती बैंक प्रोसेसिंग फीस के तौर पर ₹2.65 लाख का भुगतान करने के लिए कहा गया। इसके बाद नो-ऑब्जेक्शन चार्ज (NOC) के लिए उसे ₹6 लाख और मशीन खरीदने के लिए ₹7.5 लाख का भुगतान करने के लिए कहा गया। पीड़ित युवक ने ये सभी भुगतान चार इंस्टॉलमेंट्स में कर दिए। युवक को पुणे एयरपोर्ट पर पिज्जा रेस्टोरेंट्स की फ्रेंचाइजी देने का वादा किया गया था।
इसके बाद पीड़ित युवक से साइबर अपराधियों के दूसरे एग्जीक्यूटिव ने ₹2.6 लाख के दो पेमेंट्स और ₹12 लाख के अतिरिक्त पेमेंट्स कॉन्ट्रेक्ट की फॉर्मेलिटी पूरा करने के लिए कहा। बाद में उससे ₹20 लाख इंटीरियर डेकोरेशन के लिए मांगे गये। पीड़ित युवक को क्रिकेट वर्ल्ड कप के फ्रेंचाइजी से संबंधी एक प्रजेंटेशन दिखाया गया और कुल ₹82 लाख मांगे गये। बाद में उससे ₹15 लाख और ₹33 लाख और मांगे गये। युवक ने बातों पर विश्वास करते हुए ₹1 करोड़ से ज्यादा का भुगतान कर दिया।
कैसे लगा पता?
युवक का माथा तब ठनका जब उसने अपने द्वारा किए गए पेमेंट्स को किसी बिजनेस अकाउंट के बजाय पर्सनल यानी निजी अकाउंट पर पाया। जांच करने के बाद पाया गया कि उसके द्वारा भेजे गए फंड्स किसी कंपनी या पिज्जा चेन को नहीं पहुंचे थे। युवक ने इसकी शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन पर की और फिलहाल मामले की जांच चल रही है। केरल वाले मामले में भी युवती को अतिरिक्त इनकम के झांसे में और कंपनी का शेयर होल्डर बनाने के नाम पर ₹7 लाख रुपये की ठगी की गई। केरल पुलिस ने जांच में पाया कि इस तरह के ठग राज्य के 15 जिलों में एक्टिव हैं और ऐसी कई शिकायतें पहले भी आ चुकी हैं।
कोरोना महामारी के बाद तेजी से बढ़े मामले
कोरोना महामारी के बाद से ऑनलाइन फ्रॉड के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। इसका मुख्य कारण लोग महामारी के बाद सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर ज्यादा एक्टिव हो गये हैं। लोगों की इंटरनेट पर बढ़ती सक्रियता की वजह से साइबर अपराधी भी यहां तेजी से एक्टिव हो गये, जिसकी वजह से लोगों के साथ-साथ फिनटेक कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ज्यादातर लोग कोरोना महामारी के बाद रिमोट वर्क यानी वर्क फ्रॉम होम करने लगे और ऑनलाइन पेमेंट यानी कॉन्टैक्टलेस पेमेंट करने लगे हैं। मई में PwC द्वारा किये गये एक सर्वे के मुताबिक 26 प्रतिशत भारतीय कंपनियों को ऑनलाइन फ्रॉड की वजह से एक मिलियन डॉलर यानी करीब ₹8.23 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है।
तीन गुना बढ़े साइबर अपराध के मामले
गृह मंत्रालय द्वारा शेयर किए साइबर फ्रॉड के डेटा को देखा जाये तो साल 2017 से 2020 के बीच साइबर फ्रॉड के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है। 2017 में साइबर फ्रॉड के कुल 3,466 मामले सामने आए थे। 2020 में ये मामले बढ़कर 10,395 तक पहुंच गये। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साइबर ठगी के मामले तीन गुना तक बढ़ गए हैं। इस दौरान साइबर अपराध के मामलों में तेलंगाना पहले नंबर पर रहा है। 2017 में तेलंगाना में साइबर ठगी के महज 277 मामले आए थे, जबकि 2020 में साइबर ठगी के 3,316 मामले सामने आए थे। 2020 में इसके बाद महाराष्ट्र में 2,032, बिहार में 1,294, ओड़िसा में 1,079, आंध्र प्रदेश में 764 मामले सामने आए थे। जबकि इन राज्यों में 2017 में क्रमशः 1,426, 427, 333 और 166 मामले सामने आए थे।












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