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अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि: सचमुच 'अनुपम' थे ( 1942-2016)...

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    नई दिल्ली। एक दुखद खबर है, प्रख्यात पर्यावरणविद् वयोवृद्ध गांधीवादी अनुपम मिश्र अब हमारे बीच में नहीं रहे, उन्होंने आज सुबह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। वह 68 वर्ष के थे और पिछले एक साल से कैंसर के रोग से ग्रसित थे, उनका इलाज एम्स में चल रहा था।

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    Noted Environmentalist Anupam Mishra Passes Away At 68: Read Profile

    बीते 10 दिसंबर को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई थी जिसके चलते उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन आज उन्हें उनके रोग ने हरा दिया और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। अनुपम मिश्र का अंतिम संस्कार आज दोपहर दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया जायेगा।

    एक नजर पर्यावरणविद् वयोवृद्ध गांधीवादी अनुपम मिश्र के जीवन पर

    • अनुपम मिश्र का जन्म महाराष्ट्र के वर्धा में श्रीमती सरला मिश्र और प्रसिद्ध हिन्दी कवि भवानी प्रसाद मिश्र के यहां सन् 1948 में हुआ।
    • मिश्र के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, बड़े भाई और दो बहनें हैं।
    • मिश्र गांधी शांति प्रतिष्ठान के ट्रस्टी एवं राष्ट्रीय गांधी स्मारक निधि के उपाध्यक्ष थे।
    • उन्हें लोग लेखक, संपादक, छायाकार और गांधीवादी पर्यावरणविद् के रूप में जानते हैं।
    • उनकी प्रमुख रचनाएं राजस्थान की रजत बूंंदें, आज भी खरे हैं तालाब और साफ माथे का समाज रहींं।
    • पर्यावरण-संरक्षण के प्रति जनचेतना जगाने और सरकारों का ध्यानाकर्षित करने की दिशा में वह तब से काम कर रहे थे, जब देश में पर्यावरण रक्षा का कोई विभाग नहीं खुला था। 
    • उन्हीं के अथक प्रयास के कारण ही सूखाग्रस्त अलवर में जल संरक्षण का काम शुरू हुआ था।
    • उन्होंने उत्तराखण्ड और राजस्थान के लापोड़िया में परंपरागत जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में काफी काम किया था।
    • चंडी प्रसाद भट्ट के साथ काम करते हुए उन्होंने उत्तराखंड के चिपको आंदोलन में जंगलों को बचाने के लिये सहयोग किया था। 
    • वह जल-संरक्षक राजेन्द्र सिंह की संस्था तरुण भारत संघ के लंबे समय तक अध्यक्ष भी रहे थे।
    • 2001 में उन्होंने टेड (टेक्नोलॉजी एंटरटेनमेंट एंड डिजाइन) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित किया था।
    • आज भी खरे हैं तालाब के लिए 2011 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 
    • 1996 में उन्हें देश के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
    • 2007-2008 में उन्हें मध्य प्रदेश सरकार के चंद्रशेखर आज़ाद राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था।
    • इन्हें एक लाख रुपये के कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

    अनुपम जी के अथक प्रयासों का कर्ज भारत के लोग कभी भी चुका नहीं पाएंगे, ऐसे महान व्यक्तित्व को वनइंडिया परिवार भी अश्रुपूर्ण विदाई अर्पित करता है।...

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    English summary
    Noted Gandhian, journalist, environmentalist, and water conservationist Anupam Mishra passed away at the age of 68 at the All India Institute for Medical Sciences (AIIMS) here early Monday morning, a family member said

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