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नेता बनने के लिये जंगली जानवर बन जाते हैं समलैंगिक, जानिये कैसे

(इन्द्र मणि राजा) सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को लागू कर दिया, जिसके अंतर्गत समलैंगिक सेक्स अपराध के दायरे में आ गया, अब वह चाहे वो सहमति से ही क्यों न हो। तमाम लेख छपे, देश-दुनिया में इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई। इसी बीच समाज के एक वर्ग ने यह भी कहा, "इंसानों से अच्छे तो जानवर होते हैं, कम से कम अप्राकृतिक सेक्स तो नहीं करते...." लेकिन इस लेख को पढ़ने के बाद शायद आप यह बात कभी नहीं कहेंगे, क्योंकि मनुष्यों की तरह ही जंगल के जानवरों में भी समलैंगिक यौन संबंध स्थापित होते हैं।

जंगल में नर नर में और मादा मादा जानवरों के बीच सेक्स की प्रवृतियां पायीं जाती है। हाथियों और बब्बर शेर जैसे जानवरों में यह प्रवृतियां कुछ ज्यादा ही हैं, जबकि बंदर, चिम्पैंजी और ओरंगटान में होमोसेक्सुएल्टी से ही दल का नेता चुना जाता है। अभी तक तो हम यही जानते थे कि बंदरों या ऐप्स में वही दल का नेता होता है जो सबसे ज्यादा ताकतवर हो।

देश भर में होमोसेक्सुएल्टी को लेकर काफी विवाद चल रहा है और हर तरफ यह बहस भी है वहीं जंगल भी इससे अछूता नही रहा है। यह बात हैरान करने वाली लग रही होगी लेकिन जंगल से जुडे शोध और विशेषज्ञों की राय यही कहती है। सामान्य तौर पर हम लोग तो यही मानते है कि जंगल के जानवरों में इस प्रकार की प्रवतियां नही होती होगी कि नर नर से और मादा-मादा से जोड़ा बनाता होगा। वैसे तो जानवरों में नर और मादा ही जोड़े बनते हैं। जानवरों में जोड़े बनाने का मुख्य कारण केवल वंश वृद्धि करना और अपने वर्तमान जीन्स को आगे के वंश में पहुंचाना होता है।

हमने इस संबंध में बात की उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक डा राम लखन सिंह से। डा. लखन सिंह ने भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में जानवरों पर रिसर्च की है, इनके रिसर्च खास तौर से बाघों पर ज्यादा हैं। डा. सिंह ने इस विषय पर बताया कि जानवरों में भी गे-लेस्ब‍ियन होते हैं। ये जानवर किसी खास कारण से समलैंगिक संबंध बनाते हैं, या फिर ये भी यौन सुख के लिये यह करते हैं, यह जानने के लिये एक-एक कर स्लाइड को आगे बढ़ायें। स्लाइडर में तस्वीरों के सामने दी गई जानकारी डा. सिंह से बातचीत पर आधारित है-

जंगली जानवर और इंसान

जंगली जानवर और इंसान

हमारे आदमियों के समाज में गे (नर से नर) और लेस्बियन (मादा से मादा) दोनों तरह के जोड़े मिलते हैं। कर्इ देशों में तो ऐसे जोडों को कानून की सुरक्षा भी मिली हुर्इ है लेकिन हम बात कर रहें है जंगल के जानवरों की।

बंदर, एप्स व चिम्पैंजी

बंदर, एप्स व चिम्पैंजी

सबसे ज्यादा होमोसेक्सुएल्टी बंदरों में पायी जाती है और वे इसका उपयोग दल के नेता बनने के लिए करते हैं। मनुष्यों के सबसे करीबी जानवर बंदर या एप्स हैं। बंदरों में नर बंदर दल का नेता बनने के लिए दूसरे सबसे ज्यादा ताकतवर नर से जबरन यौन संबंध स्थापित करता है और वह यह सब मादाओं के सामनें करता है, जिससे मादाओं की नजर में वह ऊपर चढ़ जाये और सभी उसे दल का नेता मानें।

बंदरों के समूह में

बंदरों के समूह में

जंगल में समूह में रहने वाले नर बंदर जब दूसरे नर से सेक्स करता है और उसे लैंगिक तौर पर संबध बनाता है, तो उसका मकसद सामने वाले को मादाओं के सामनें नीचा दिखाना होता है। प्राय ऐसा भी देखा गया है कि वानरों में ऐसी प्रवृतियां आतमिक सुख के लिए भी होती हैं खास तौर पर वनमानुष और ओरंगटानों में।

कई बंदर होते हैं नेता के शिकार

कई बंदर होते हैं नेता के शिकार

जब एक बंदर नेता बन जाता है, तब दल में मौजूद अन्य कई नर बंदरों के साथ समलैंगिक संबंध स्थापित करता है। ताकि दल में उसका वर्चस्व कायम रहे और साथ ही मादा बंदरों के सामने बाकियों का कद छोटा रहे।

हाथी

हाथी

जंगल का सबसे विशालकाय जानवर हाथी भी इसमें पीछे नहीं है। मादा हाथी मादा हाथी से यौन संबंध स्थापित करती है। मादा हाथी अपने दल की नेता होती है। सबसे बड़ी मादा हथनीं दल को एक रखने और अपना वर्चस्व कायम रखनें के लिए लेसबियन बन जाती है और वह ऐसा इसलिए करती है कि कोर्इ और हथनी दूसरे नर के पास न जाये और उसका दल पर कब्जा बना रहें।

फिर कैसे बढ़ता है वंश

फिर कैसे बढ़ता है वंश

हाथि‍यों के दल में दल की नेता बनने के बाद मादा हाथी बाकी मादाओं को नर हाथियों के पास जाने से रोकती है, ऐसे में जब वंश बढ़ाना होता है, तो कुछ कुछ हथनियां दल की नेता का विरोध करके नर हाथियों के पास जाती हैं। ऐसे में भी दल की सबसे बड़ी हथनी दूसरी मादा को आकृषित करती रहती है।

बब्बर शेर गे नहीं पर शेरनी लेस्बियन

बब्बर शेर गे नहीं पर शेरनी लेस्बियन

डा सिंह ने बताया कि जंगल में रहने वाले बब्बर शेर गे नहीं होते, यानी नर शेर कभी भी किसी दूसरे नर के साथ यौन संबंध स्थापित नहीं करता, परंतु मादा यानी शेरनी जरूर लेस्बियन होती हैं।

क्या करती है लेस्बियन शेरनी

क्या करती है लेस्बियन शेरनी

नर बब्बर शेर बहुत ही आलसी होते हैं और वे दल से अलग-थलग रहते हैं, ऐसे में मादा बब्बर शेर दूसरी मादा से सेक्स करके यौन सुख के माध्यम से संतुष्टी पाती है। ऐसा भी देखा गया है कि मादा बब्बर शेरों की यही प्रवृति पर अपने दल को एक रखती है। नर केवल वंश वृद्धि के लिए ही यौन संबंध स्थापित करते हैं।

जानवरों में ट्रांसजेंडर

जानवरों में ट्रांसजेंडर

जानवरों में ट्रांसजेंडर की बात करें तो कुछ आधुनिक देशों में जेबरा और गधे की प्रजाति जोंगी विकसित की गयी। ऐसे ही घोड़े और गधे से खच्चर बना। गधे और जेबरा से भी एक प्रकार की प्रजात‍ि उत्पन्न हुई। ये असल में इंसान की ही करामात है। शेर में साथ ही टार्इगर और मादा बब्बर शेर से एक नयी किस्म टार्इगन आयी। इस प्रकार क्रास ब्रीड करा कर जानवरों की कर्इ प्रजातियों को विकसित करने का काम दुनियां के कर्इ देशों में चल रहा है, लेकिन ऐसे लगभग सभी जानवर ट्रांसजेंडर होते हैं, जो वंश को आगे नहीं बढ़ा सकते।

गे-लेस्बियन

गे-लेस्बियन

मानवों में भी ऐसा स्वभाव पाया जाता है कि अगर बिना फल और जिम्मदारी के उसे ऐसे मौके मिले तो उसे वह उसे कतराता नहीं है। यही कारण है के मनुष्यों में समलैंगिक यौन संबंध तेजी से बढ़ रहे हैं।

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