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Nepal President: 17 बार प्रधानमंत्री बनने से चूकने वाले रामचंद्र पौडेल बने नेपाल के राष्ट्रपति

नेपाली कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि सभा के पूर्व स्पीकर रामचंद्र पौडेल नेपाल के राष्ट्रपति चुने गये हैं। साल 2008 में नेपाल के गणतंत्र बनने के बाद से यह तीसरा राष्ट्रपति चुनाव था।

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राजशाही खत्म होने और लोकतंत्र देश बनने के बाद से रामचंद्र पौडेल नेपाल के तीसरे राष्ट्रपति चुने गये हैं। राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी का कार्यकाल 12 मार्च को खत्म होगा। उसके बाद पौडेल राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। बता दें कि राष्‍ट्रपति के चुनाव में वह प्रधानमंत्री पुष्‍पकमल दहल 'प्रचंड' के नेतृत्व वाले आठ-दलीय गठबंधन के समर्थित उम्मीदवार थे। उन्‍होंने चुनाव में प्रतिद्वंद्वी सुभाष चंद्र नेम्बवांग को बड़े अंतर से हराया।

गौर करने वाली बात है कि नेपाल में राष्ट्रपति चुनाव के कारण महज दो महीनों में ही सत्तारूढ़ गठबंधन टूट गया है। दरअसल प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने के.पी. ओली के साथ दो महीनें पहले हुए राजनीतिक समझौता को भंग करते हुए, प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर उनके उम्मीदवार रामचंद्र पौडेल को समर्थन कर दिया।

क्या है नेपाल राष्ट्रपति चुनाव में वोटों का गणित?

नेपाल चुनाव आयुक्त ने 9 मार्च 2023 को चुनावी नतीजों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि राम चंद्र पौडेल ने 33,802 चुनावी वोट हासिल किये। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सुभाष चंद्र नेम्बवांग को 15,518 वोट मिले हैं। वहीं चुनाव आयोग के मुताबिक 518 प्रांतीय विधानसभा सदस्यों और संसद के 313 सदस्यों ने राष्ट्रपति चुनाव में मतदान किया था।

बड़े अंतर से चुनाव जीते पौडेल

नेपाल में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदाताओं की कुल संख्या 882 हैं। जिसमें संसद के 332 सदस्य और सात प्रांतों की विधानसभा के 550 सदस्य शामिल हैं। वहीं संघीय सांसद का मतभार 79 और विधायकों का मतभार 48 होता है। राष्ट्रपति पद के लिए हुए मतदान में सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवार रामचन्द्र पौडेल को 33,802 वोट प्राप्त हुए थे। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सुवास नेम्बांग को 15,518 वोट प्राप्त हुए।

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नेपाल में 15 साल में तीसरे राष्ट्रपति

अब चुनाव आयोग के मुताबिक देखें तो राष्ट्रपति पद के लिए हुए मतदान में कुल 882 मतदाता में 831 सांसदों और विधायकों ने मतदान किया था। जिसमें पौडेल को नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (माओवादी सेंटर) सहित 8 दलों के गठबंधन के 214 सांसदों और 352 प्रांतीय विधानसभा सदस्यों के वोट मिले। और इस तरह पौडेल नेपाल में 2008 में गणतंत्र बनने के बाद से तीसरे राष्ट्रपति चुने गये।

कौन हैं रामचंद्र पौडेल?

अगर रामचंद्र पौडेल के बारे में कहा जाये कि वे फिलहाल नेपाल में सबसे ज्यादा अनुभवी राजनेता है, तो गलत नहीं होगा। दरअसल, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक वे 16 साल की उम्र से ही राजनीति में है। पौडेल का जन्म 14 अक्टूबर 1944 को बहुनपोखरी में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने प्रमुख विषय के रूप में नेपाली भाषा के साथ कला में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। वह 1970 में नेपाली कांग्रेस की छात्र शाखा, नेपाल छात्र संघ के संस्थापक केंद्रीय सदस्य बने। पौडेल को नेपाली कांग्रेस तन्हु जिला का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। 1980 में जिला समिति, और 2005 में महासचिव, 2007 में उपाध्यक्ष और 2015 में पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष बने।

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    12 साल जेल में बिताए

    रामचंद्र पौडेल ने साल 1985 के सत्याग्रह, साल 1990 के जन आंदोलन पार्ट-1 और 2006 के जन आंदोलन पार्ट-2 में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने निरंकुश पंचायत शासन के खिलाफ लड़ते हुए तकरीबन 12 साल जेल में बिताए। यह दौर 1961 से 1990 के बीच का था। तब सारी शक्तियां राजा के हाथों में हुआ करती थी।

    इसके बाद पौडेल 1991 में पहली बार तन्हु जिले से प्रतिनिधि सभा (सांसद) के लिए चुने गये। इसके बाद, उन्होंने लगातार छह बार तन्हू का नेपाली सांसद में प्रतिनिधित्व किया। मई 1991 में स्थानीय विकास मंत्री बनाया गया और 1992 में कृषि मंत्री बने। वे 1999 से 2002 तक वे नेपाल के उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री और सूचना और संचार मंत्री बने। साल 2007 से 2008 तक उप प्रधानमंत्री और शांति और पुनर्निर्माण मंत्री भी रहे। वहीं 2008 से 2013 तक नेपाली कांग्रेस के संसदीय दल के नेता और संसद में मुख्य विपक्ष के नेता चुने गये।

    17 बार पीएम का चुनाव हारे पौडेल?

    रामचंद्र पौडेल साल 2010 में नेपाल में संविधान सभा के दौरान अपनी पार्टी के संसदीय दल के नेता चुने गये। तभी 2010 में नेपाली कांग्रेस से रामचंद्र पौडेल, माओवादी से पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और सीपीएन-यूएमएल से झालनाथ खनाल प्रधानमंत्री चुनाव के उम्मीदवार थे। हालांकि, संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक तीनों उम्मीदवारों को पर्याप्त वोट नहीं मिले थे, इसलिए सात बार मुकाबला हुआ। वहीं आठवीं बार में प्रचंड खुद से प्रधानमंत्री की दौड़ से बाहर हो गये और फिर पौडेल ने 17 बार खनाल का मुकाबला किया। चूंकि चुनावों की इस श्रृंखला से कोई परिणाम प्राप्त नहीं हो सका, इसलिए चुनाव नियमों को बदल दिया गया। इसके बाद अगले चुनाव में झलनाथ खनाल प्रधानमंत्री चुने गये और इस तरह से संसद में 17 बार प्रधानमंत्री के निर्वाचन में हुए मतदान में उनको सफलता नहीं मिल पाई।

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