देश से प्यार है तो मातृभाषा की इज्जत करो
आज का दिन अपनी मदर भाषा को सेलिब्रेट करने का है। आज के दिन आप अपनी मातृ भाषा चाहे उर्दू ,भोजपुरी, अवधि, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम, मराठी जो भी हो उसे सेलिब्रेट कर सकते हैं। क्योंकि विविध भाषाओं के इन मोतियों को पिरोकर ही भारत देश के एकता की माला बनती है, जिसमें प्रेम का धागा होता है।
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लेकिन बदलते परिवेश में जहां आज लोगों के लिए वक्त नहीं है वहीं आज लोगों ने भाषाओं की भी खिचड़ी कर दी है। आप अपने आस-पास के लोगों की बातों पर गौर फरमाइये तो आप पायेंगे कि आज शायद ही कोई ऐसा पुरूष औऱ महिला हो जो कि शुद्ध भाषा का प्रयोग करता होगा..जैसे कि हिंदी बोलते समय अंग्रेजी का प्रयोग नहीं, महिलाओं से बोलते हुए महिला सूचक शब्दों का प्रयोग करता हो।
आज तो लोग महिलाओं से भी बात करते हुए कहते हैं . आप खा रहे हो..या फिर बड़े से बात करते समय भी तू-तड़ाके का प्रयोग करते है जैसे कि तू खा ले, आप निकलो वगैरह..वगैरह। यह सब कुछ इस कदर तक लोगों के जीवन में रच-बस गया है कि अब लोगों को इन सारी बातों से कोई फर्क ही नहीं पड़ता है।
दूसरी अहम बात जो आज कल हर जगह है वो है अंग्रेजी का बोलबाला। भौतिकतावादी युग में स्टेटस मेंटेन करने के चक्कर में हम विदेशी भाषा को तो तेजी से अपना रहे हैं क्योंकि वह बेहद जरूरी है लेकिन अपनी पहचान और अपनी मातृभाषा को ही भूलते जा रहे हैं।
आज अगर बिहारी दंपति दिल्ली, पुणे और बैंगलोर में रहता है तो उसके बच्चों को भोजपुरी ही नहीं आती है क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को कभी भोजपुरी बोलना सिखाया ही नहीं होता है क्योंकि उन्हें लगता है कि मेरे बच्चे को मातृभाषा सीखकर क्या करना है उसे अंग्रेजी आनी चाहिए क्योंकि इसी से वह स्मार्ट कहलायेगा जबकि अपनी क्षेत्रीय भाषा बोलकर वह पिछडा हुआ लगेगा।
यह कुछ लोगों की ग्रसित मानसिकता का सबूत है जिसके कारण ही आज हमारी क्षेत्रीय भाषाओं को वो बढ़ावा नहीं मिलता है जो कि अंग्रेजी को मिल रहा है। हम देश की आन-बान औऱ शान को बरकरार रखने के लिए कसमें तो खाते हैं लेकिन क्या मातृभाषा को अनदेखा करके हम वाकई में अपनी कसम निभा रहे हैं?
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