Moons of Planets: पृथ्वी के पास एक चंद्रमा जबकि इस ग्रह के पास है कुल 92 चंद्रमा
हम सभी जानते हैं कि हमारी धरती के पास एक चंद्रमा है जोकि उसकी परिक्रमा करता है लेकिन इसी सोलर सिस्टम में जुपिटर के 12 नये चंद्रमाओं की खोज की गयी है।

Moons of Planets: अब हमारे सोलर सिस्टम में जुपिटर (बृहस्पति) सबसे बड़ा प्लेनेट होने के साथ-साथ सबसे ज्यादा चंद्रमा वाला प्लेनेट भी बन गया है। इससे पहले, सबसे ज्यादा 83 चंद्रमा सैटर्न (शनि) के चारों ओर परिक्रमा करते थे। अब नयी शोध के मुताबिक जुपिटर के 92 चंद्रमा होने की बात कही गयी है। यह दावा वाशिंगटन में कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के खगोलविद स्कॉट एस. शेपर्ड ने 2021 और 2022 के बीच जुपिटर को ऑब्जर्व करने के बाद किया है।
पृथ्वी के लिए चंद्रमा का महत्व
चंद्रमा एक अंतरिक्ष का पिंड है जो किसी ग्रह का चक्कर काटता है। हमारे सोलर सिस्टम में, पृथ्वी का एक चंद्रमा है और ये एक प्राकृतिक सैटेलाइट है। चंद्रमा हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें ग्रहों की गति और उनकी चाल को समझने में मदद करता है। चंद्रमा का उस ग्रह पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव होता है जिसकी वे परिक्रमा करते हैं। चंद्रमाओं और उनकी विशेषताओं को पढ़ना प्लेनेटरी साइंस और एस्ट्रो फिजिक्स का एक प्रमुख हिस्सा है।
चंद्रमा पृथ्वी के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है जैसे, चंद्रमा का ग्रेविटेशनल फोर्स पृथ्वी के महासागरों में टाईड्स पैदा करता है, जो पृथ्वी के मौसम के पैटर्न को रेग्यूलेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूसरा, चंद्रमा के होने से पृथ्वी का एक्सिस टिल्ट स्थिर है। तीसरा, चंद्रमा की गति के पैटर्न का उपयोग हजारों वर्षों से टाइमकीपिंग के लिए किया जाता रहा है, और इसके फेज का उपयोग समय बीतने को चिह्नित करने के लिए किया जाता रहा है। चौथा, चंद्रमा वैज्ञानिक अध्ययन में बहुत प्रमुख भूमिका निभाता है और इसने सोलर सिस्टम के निर्माण और विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी बटोरने में मदद की है। पांचवां, चंद्रमा हजारों वर्षों से सांस्कृतिक मान्यताओं का विषय रहा है और दुनिया भर के लोगों के लिए इसका सांस्कृतिक महत्व बना हुआ है।
हमारे सोलर सिस्टम में कितने चंद्रमा
हमारे सोलर सिस्टम में लगभग 228 चंद्रमा है जिसमें से वीनस (शुक्र) और मर्करी (बुध) के पास एक भी चंद्रमा नहीं है। हमारे सोलर सिस्टम में पृथ्वी के पास 1 चंद्रमा, मार्स (मंगल) के पास 2 चंद्रमा, जुपिटर (बृहस्पति) के पास 92 चंद्रमा (हाल ही में पता लगे 12 चंद्रमा शामिल), सैटर्न (शनि) के पास 83 चंद्रमा, यूरेनस (अरुण) के पास 27 चंद्रमा और नेपच्यून (वरुण) के पास 14 चंद्रमा हैं। ड्वार्फ प्लेनेट्स के पास भी चंद्रमा है, जैसे प्लूटो (यम) के पास भी 5 चंद्रमा, एरिस के पास 1 चंद्रमा, ह्यूमिया के पास 2 चंद्रमा, मेक्मेक के पास 1 चंद्रमा हैं। एक ड्वार्फ प्लेनेट जिसका नाम 'सेरेस' है उसके पास एक भी चंद्रमा नहीं है।
क्या चंद्रमा पर जीवन संभव?
2021 की रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रमा पर वर्तमान और पहले के जीवन का कोई प्रमाण नहीं है। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने वर्ष 2019 की अपनी एक रिपोर्ट में साफ कहा कि वैज्ञानिक चंद्रमा पर जीवन के संकेतों की खोज कर रहे थे, लेकिन चंद्रमा पर जीवन नहीं पाया गया और हम जानते हैं कि चंद्रमा पर जीवन संभव नहीं है। नासा के वैज्ञानिक उन नमूनों पर रिसर्च कर रहे थे जो अपोलो 11 मिशन अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा वर्ष 1969 में चंद्रमा से लाए गए थे। हालांकि, चंद्रमा पर जीवन की खोज के लिए नासा, इसरो और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार शोध कर रही हैं लेकिन वर्तमान में चंद्रमा पर जीवन नहीं मिला है।
भारत की क्या भूमिका
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), सक्रिय रूप से लूनर एक्सप्लोजन मिशन चला रहा है। भारत का सबसे हालिया मिशन, चंद्रयान-2, जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह, मैटेरियल कंपोजिशन पर रिसर्च करना और पानी और अन्य महत्वपूर्ण मैटेरियल की खोज करना था। इसरो, चंद्रयान-3 सहित चंद्रमा के लिए भविष्य के मिशनों की भी योजना बना रहा है, जोकि चंद्रमा की सतह पर एक रोवर को उतारने और चंद्रयान-2 जैसे ही मिशन को अधिक गहराई में शोध और विश्लेषण करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। भारत ने 2008 में चंद्रयान-1 लॉन्च किया था, मिशन को चंद्रमा की सतह और मैटेरियल कंपोजिशन को एनालाइज करने के साथ-साथ पानी और अन्य महत्वपूर्ण मैटेरियल की खोज के लिए डिजाइन किया गया था।
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