Moon Mission: चंद्रयान-3 की अभूतपूर्व सफलता से चिढ़े हुए चीन की हड़बड़ी है चांग’ई-6
Moon Mission: भारत के चंद्रयान-3 की अभूतपूर्व सफलता से जिन देशों ने ईर्ष्या दिखाई है, उनमें चीन प्रमुख है। पड़ोसी देश की खिसियाहट, ईर्ष्या और जल्दबाजी साफ तौर पर देखी जा सकती है, जब उसने हमारे चंद्रयान को अपने मून मिशन से कमजोर और कम प्रभावी होने का दंभ दिखाया था। अब चंद्रमा के सुदूर हिस्से से रहस्य उजागर करने के लिए चीन ने भी अपने अगले अंतरिक्ष मिशन का ऐलान कर दिया है।
चीन की अंतरिक्ष एजेंसी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो अकाउंट पर यह जानकारी सार्वजनिक करते हुए लिखा कि क्यूकियाओ 2 संचार रिले उपग्रह 2024 की पहली छमाही में लॉन्च होने वाला है। चीन ने इस अगले मिशन को चांग'ई 6 नाम दिया है।

चीन की मान्यता में चांग'ई चंद्रमा की देवी और लूनारिया की रानी है। चीन की कई फिल्मों में इन मिथकीय घटनाओं मिड एटम फेस्टिवल में चांग'ई अपने सच्चे प्यार होउ'ई की तलाश करती दिखाई गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद्रयान-3 की सफलता के बाद चंद्रमा के साउथ पोल पर उस स्थान को, जहां सॉफ्ट लैंडिंग हुई थी, शिव शक्ति नाम दिया था। इसके लिए पीएम मोदी ने पौराणिक संदर्भ भी दिया था।
चीन का अंतरिक्ष यान का रोबोट चंद्रमा के उस तरफ उतरेगा जो स्थायी रूप से हमारे लिए अदृष्टिगत है, यानी हम उसे अभी तक देख नहीं पाए हैं । चीन ने प्रस्तावित मिशन के लिए अपना लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के एक कोण ऐटकेन बेसिन तक पहुंचना तय किया है।
विशेषज्ञों की मानें तो उपभोक्तावादी ड्रैगन का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कब्जा करने का है। क्योंकि यह बहुमूल्य खनिजों और दूसरे संसाधनों का भंडार है। अगर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की तलाश पूरी हो जाए तो उसके खनन से उसे ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में तोड़ा जा सकता है। ये चंद्रमा पर संभावित मानव उपनिवेश के लिए दो प्रमुख संसाधन साबित हो सकते हैं। इसलिए भी दुनिया भर में विकसित देशों ने अंतरिक्ष में खासकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने का अभियान छेड़ दिया है। हालांकि, इसमें सबसे पहली और सबसे बड़ी कामयाबी भारत को मिली। इससे चीन समेत तमाम देश हक्के-बक्के और चौकन्ने हो गए हैं।
यूरोपीय यूनियन और पाकिस्तान से चांग'ई 6 का क्या है रिश्ता
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन का अगला चंद्र मिशन - चांग'ई 6 चार अन्य देशों के विज्ञान पेलोड और उपग्रहों को ले जाएगा और चंद्रमा के सुदूर हिस्से की चट्टानों को पृथ्वी पर लेकर वापस आएगा। चीन का चंद्रमा मिशन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और पाकिस्तान से पेलोड खींचते हुए चंद्रमा के दूर के हिस्से से नमूने पृथ्वी पर लौटाएगा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के दावे वाले इस चंद्र मिशन में चीन रेडियोधर्मी गैस रेडॉन का पता लगाने के लिए एक फ्रांस-निर्मित उपकरण, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का एक नकारात्मक आयन डिटेक्टर, रडार सिस्टम को कैलिब्रेट करने के लिए एक इतालवी लेजर कॉर्नर रिफ्लेक्टर, पाकिस्तान का क्यूबसैट यानी एक चौकोर आकार का छोटा सैटेलाइट ले जाएगा।
भारत के चंद्रयान-3 की सफलता से परेशान चीन की हड़बड़ी
साइंस रिपोर्ट के मुताबिक बीते सात दशकों में दुनिया के कई प्रमुख देशों की ओर से लॉन्च किए गए चंद्रमा मिशन में 66 सफल रहे, 41 नाकाम हो गए और आठ आंशिक तौर पर कामयाब हो पाए। चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए 38 बार कोशिश में 52 प्रतिशत ही सफलता मिली है। चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने में अमेरिका, रूस और चीन ही अभी तक कामयाब हुए थे। अमेरिका 13 बार और पूर्व सोवियत संघ 6 बार चांद पर पहुंचने में सफल रहा है। भारत से पहले कोई भी चंद्रमा के साउथ पोल पर नहीं उतर पाया था। यह सफलता भी भारत ने अपनी तीसरी कोशिश में ही हासिल की।
चाइना साइंस डेली को दिए इंटरव्यू में चीन के एक शीर्ष वैज्ञानिक ओयांग लियुआन ने दावा किया कि 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा पर उतरा भारत का चंद्रयान -3 वास्तव में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास नहीं है। उसने कहा कि भारत के चंद्रमा लैंडर के बारे में दो चीजें स्पष्ट करने की जरूरत है। पहला इसके लैंडिंग स्थान के बारे में दिया गया ब्यौरा गलत है और दूसरा लोग दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के अस्तित्व को लेकर अति आशावादी हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र से कम से कम 619 किलोमीटर दूर था ।
चीन ने साल 2025 में प्रस्तावित अपने चांग'ई6 प्रोजेक्ट को एक साल पहले 2024 में लॉन्च करने की घोषणा कर दी। यहां याद करना जरूरी है कि भारत के अतंरिक्ष मिशन चंद्रयान-2 की सफलता में चूक हो जाने पर चीन ने सबसे ज्यादा मजाक उड़ाया था जिसका जवाब इसरो के काबिल और जुझारू अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने काफी कम समय और सबसे बड़ी सफलता के साथ चीन को दे दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने इसके साथ ही 2026 में चांग'ई-7 और 2028 में चांग'ई-8 को लॉन्च करने की योजना पर भी काम तेज किया हुआ है। चांग'ई 7 के उप मुख्य डिजाइनर तांग युहुआ ने बताया कि चांग'ई 7 का रोवर विभिन्न उपकरणों को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है और यह अपना रास्ता खुद बनाएगा। चांग'ई 7 मिशन में चीन यूएई का एक छोटा रोवर अपने साथ चंद्रमा पर ले जाएगा। वहीं, चांग'ई 8 मिशन का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों के जरिए 3डी प्रिटिंग टेक्नोलॉजी का परीक्षण करने के साथ वहां एक बेस बनाना होगा।












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