Millets: आखिर मोटा अनाज कैसे पहुंचा सोने की थाली में
Millets:जी-20 शिखर सम्मेलन के भोजन में शामिल मोटे अनाज (मिलेट्स) की चारों तरफ खूब चर्चा है। 'सुपर फूड' के नाम से इस समय इसकी खूब मार्केटिंग हो रही है। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने मिलेट को अपनी पसंद का भोजन और विदेशी मेहमानों को भी इसके स्वाद और फायदे से परिचय कराया है, तब से तो मोटे अनाजों की बिक्री भी बढ़ गई है।
कभी मोटा अनाज हमारे देश में मजबूरी का भोजन माना जाता था, ज्यादातर किसान गुजारे के रूप में इन अनाजों का प्रयोग करते थे। उसी को खाकर अपना स्वास्थ्य भी ठीक रखते थे। पर धीरे धीरे बाजार में विदेशी चीजों की पहुंच बढ़ी, बाहर का खाने के नाम पर लोगों ने जंक फूड को पंसद करना शुरू कर दिया, तो किसान भी मोटे अनाज की उपज के प्रति उदासीन होते चले गए। पर परिस्थितियां फिर बदली हैं। अब वही मोटा अनाज सोने की थाली में परोसा जा रहा है और चांदी के चम्मच से खाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस मिलेट के बारे में!

मोटे अनाज (मिलेट्स) में मुख्यतः 8 फसलें शामिल हैं - ज्वार, बाजरा, रागी (मडुआ), कंगनी, चीना, सावां, कोदो, कुट्टू व कुटकी। मोटे अनाज के उत्पादन में किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा होता है तथा कृषि संबंधित अन्य परेशानियों का भी कम सामना करना पड़ता है। यहां तक कि मोटा अनाज कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी उपज देता है।
मोटे अनाज में एंटी ऑक्सीडेंट, मिनरल, प्रोटीन व फूड फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। वहीं इसमें उपस्थित आयरन, कैल्सियम, विटामिन-बी इत्यादि पोषक तत्व अनेक बीमारियों (जैसे- हृदय संबंधी, ब्लड प्रेषर, शुगर इत्यादि) को दूर रखने में सहायक है। इसके साथ-साथ यह हड्डियों व पाचन तंत्र को मजबूती देता है तथा कैल्शियम की पूर्ति भी करता है। इसके गुणों को देखते हुए ही इसे 'सुपर फूड' कहा जाता है।
सरकार क्यों दे रही है इस पर जोर
भारत सरकार लगातार मोटे अनाज के उत्पादन व उपभोग पर जोर दे रही है। यहां तक कि वर्ष 2023 को 'अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष (आईवाईएम)' भी घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनेकों बार मोटे अनाजों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। जी-20 के दिल्ली सम्मेलन में भी मोटे अनाज के व्यंजन शामिल किये गये।
मोटे अनाज दुनिया में खाद्य संकट के निवारण में सबसे कारगर साधन बन सकते हैं, क्योंकि अनाज की कमी दुनिया भर में महंगाई व भुखमरी बढ़ाने का कारण बन रही है। वहीं इसको बढ़ावा देने का दूसरा बड़ा कारण इसका पर्यावरण हितैषी होना भी है। क्योंकि मिलेट्स की खेती खराब पड़ी जमीन पर भी की जा सकती है और यह कम मेहनत व बिना रसायनों के अच्छा उत्पादन देती है, जिससे पर्यावरण व स्वास्थ्य को भी नुकसान नहीं होता।
किसानों की थाली से सोने की थाली का सफर
लगभग 50 साल पहले भारत में अनाजों में सबसे ज्यादा बाजरे की खेती होती थी। यह भारत का मुख्य अनाज होता था। आधुनिकीकरण की होड़ में भारत में भी धीरे-धीरे गेहूं व चावल का उत्पादन बढ़ने लगा और मोटा अनाज सिर्फ गरीबों की थाली तक ही सीमित रह गया। करीब 4-5 दशक पहले तक किसान, गरीब व कुछ मध्यम वर्ग अपने भोजन में मोटे अनाज का खूब प्रयोग करते थे। यहां तक कि गांवों में तो सर्दियों के मौसम में 'बाजरे/मक्की की रोटी व सरसों का साग' बहुतायत में खाया जाता था। जबकि अमीर/धनाढ़य वर्ग इसे खाना पंसद नहीं करते थे। हरित क्रांति से पहले भारत के कुल अनाज उत्पादन में बाजरे की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत होती थी, जबकि आज स्थिति इसके विपरीत है। आज गेहूं व चावल का उत्पादन अधिक हो रहा है।
वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मोटे अनाज को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया और वर्ष 2018 को 'मिलेट्स वर्ष' भी घोषित किया गया। उसके उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर अपने कार्यक्रमों जैसे- 'मन की बात' इत्यादि में भी मोटे अनाज को बढ़ावा देने पर जोर देते रहे। जी-20 की बैठक से पूर्व भारतीय जनता पार्टी की संसदीय दल की बैठक के दौरान भी प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों को मोटा अनाज खाने की सलाह भी दी और जी-20 की बैठकों में मोटे अनाज के व्यंजन परोसने का सुझाव भी दिया। अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में मोटे अनाज की खेती में काफी वृद्धि होगी, जिससे पर्यावरण व स्वास्थ्य को तो लाभ होगा ही, साथ ही साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
मोटे अनाज का उत्पादन व खपत
भारत दुनिया भर में मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत दुनिया भर के कुल मोटे अनाज उत्पादन का लगभग 19 प्रतिशत उत्पादित करता है । एशिया के कुल मोटे अनाज उत्पादन का 80 प्रतिशत उत्पादन केवल भारत द्वारा किया जाता है। वर्ष 2022 में भारत ने कुल 205 लाख टन मोटे अनाज का उत्पादन किया, जिसमें 60 लाख टन ज्वार तथा 145 लाख टन अन्य मोटे अनाजों का उत्पादन हुआ।
भारत दुनिया में मोटे अनाज का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक देश भी है। वर्ष 2021-22 में भारत ने 642.8 लाख डालर मूल्य के मोटे अनाजों का निर्यात किया। भारत ज्यादातर संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल, सऊदी अरब, लीबिया, ओमान, मिस्र, ट्यूनीशिया, यमन, ब्रिटेन तथा अमेरिका को मोटे अनाज का निर्यात करता है। जिसमें बाजरा, रागी, कनेरी, जवार और कुट्टू आदि शामिल हैं।
आज लोगों में जागरूकता के कारण लगभग सभी बड़े स्टोरों पर मोटा अनाज (मिलेट्स) उपलब्ध रहते हैं और लोग ज्यादा कीमत देकर भी अपने स्वास्थ्य के लिए इन्हें खरीद रहे हैं।
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