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HDFC Merger: एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी लिमिटेड का विलय, क्या ग्राहकों पर पड़ेगा कोई प्रभाव?

एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी लिमिटेड (आवास विकास वित्त निगम लिमिटेड) कंपनी का विलय होने जा रहा है। इसकी अनुमति राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने अक्टूबर 2022 में दोनो कंपनियों के शेयरधारकों से मंजूरी मिलने के बाद दी है। इस मर्जर (विलय) के बाद एचडीएफसी (HDFC) बैंक का वित्तीय आकार आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक से लगभग दोगुना हो जायेगा और यह दुनिया का पांचवां सबसे मूल्यवान बैंक बन जायेगा।

hdfc bank

एचडीएफसी बैंक व एचडीएफसी लि. कंपनी
आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि एचडीएफसी बैंक निजी सेक्टर का एक बैंक है। फिलहाल इस क्षेत्र में यह देश के सबसे बड़े बैंकों में शामिल है। वहीं एचडीएफसी लि. एक हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कंपनी है। यह होम लोन देने की देश में सबसे बड़ी कंपनी है। यह सामान्य बैंकिंग जैसे काम न कर गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी एनबीएफसी के रूप में रजिस्टर्ड है। मतलब की यह उधार, ऋण, क्रेडिट, बचत आदि सुविधाएं तो देती हैं, लेकिन चेक व डिमांड ड्राफ्ट जारी नहीं कर सकती।

क्यों हो रहा है विलय?
एचडीएफसी बैंक के चैयरमेन दीपक पारेख के अनुसार एचडीएफसी बैंक व एचडीएफसी लि. कंपनी के मर्जर की प्रक्रिया 4 अप्रैल 2022 से शुरू हुई थी। यह प्रक्रिया लगभग 20 जुलाई 2023 तक पूरा हो जायेगी। इस विलय के उपरांत एचडीएफसी ₹168 बिलियन की वैल्यू का बैंक बन जायेगा।

उन्होंने आगे बताया कि बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) खासकर हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए नियम एक समान हो चुके हैं। अप्रैल 2022 में आरबीआई (RBI) ने एनबीएफसी के लिए नियमों में बदलाव किया था। इन नियमों के चलते ही अलग से हाउसिंग फाईनेंस कंपनी चलाने की जरूरत नहीं है। इसलिए यह विलय हो रहा है। इस विलय के प्रारंभ में दोनों संस्थाओं की केंद्रीय टीम के 3-3 सदस्य व करीब 3 दर्जन समितियों ने इस प्रक्रिया पर काम किया। जिसमें एनसीएलटी से मार्च 2023 में कानूनी अनुमति मिली और अब जुलाई 2023 में यह विलय प्रक्रिया पूरी हो जायेगी।

वहीं एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मिस्त्री का कहना है कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के लगभग 70 प्रतिशत ग्राहक एचडीएफसी बैंक में खाता नहीं रखते है। एचडीएफसी बैंक के फिलहाल 8.3 करोड़ ग्राहक हैं और एचडीएफसी लि. कपंनी के करीब 50 लाख ग्राहक हैं।

आरबीआई द्वारा जारी एनबीएफसी के लिए नये नियम
अप्रैल 2022 में आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए अपने नियमों में बदलाव किये हैं। जो एचडीएफसी बैंक व एचडीएफसी लि. कंपनी के विलय का कारण बने।

1. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) रियल एस्टेट क्षेत्र को तभी कर्ज देगी जब उन्हें उनकी परियोजनाओं से संबंधित सरकारी मंजूरियां मिल गयी हो। कर्ज की मंजूरी सामान्य स्थिति में दी जा सकती है लेकिन वितरण तभी होगा, जब कर्जदार ने सरकार/अन्य निकायों से अपनी परियोजना को लेकर जरूरी मंजूरी हासिल कर ली हो।
2. पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक का ऋण देने के लिए निदेशक मंडल (बोर्ड) की अनुमति आवश्यक है।
3. एनबीएफसी को अपने चेयरमैन, प्रबंध निदेशक अथवा उनके रिश्तेदारों या संबंधित इकाइयों समेत अपने निदेशकों को ₹5 करोड़ या उससे अधिक का कर्ज नहीं देना चाहिए।

ग्राहकों पर क्या प्रभाव पडे़गा?
इस विलय से एचडीएफसी बैंक व एचडीएफसी लिमिटेड के ग्राहकों और कर्मचारियों पर कोई असर नहीं होगा। क्योंकि विलय के उपरांत एचडीएफसी लिमिटेड की सभी शाखाएं एचडीएफसी बैंक में बदल जायेगी। ग्राहक पहले की तरह ही सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। मूल सावधि जमा के पूरा होने पर धन निकाल सकते हैं, अगर उसको नवीनीकृत करना होगा तो एचडीएफसी बैंक के नियमों के अनुसार करना पड़ेगा। वहीं दोनों संस्थाओं के शेयरधारकों पर इसका कुछ प्रभाव पड़ सकता है।

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