PICS: भारत में इन दोषियों नहीं मिली गुनाहों की माफी, चढ़ाए गए फांसी
बेंगलौर। नोएडा के निठारी कांड के दोषी सुरिंदर कोली को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा दे दी। सुरेन्द्र कोली को गुरुवार की रात ग़ाज़ियाबाद की डासना जेल से मेरठ जेल में शिफ्ट कर दिया गया। जहां उसे फांसी पर चढ़ाया जाएगा।
भारत में फांसी की सजा काफी संगीन मामलों में या 'रेयर ऑफ दि रेयरेस्ट' मामलों में दी जाती है। 39 वर्षीय सुरिंदर कोली लड़कियों के साथ बलात्कार उसके बाद उनकी हत्या करने के जुर्म में दोषी पाया गया था। कोली की हैवानियत तब तो चरम पर होती थी, जब वो उन्हीं लड़कियों के शव के टुकड़े खाता था और बचे कुचे टुकड़ों को बंगले के कंपाउंड में दफना देता था। कोली का पर्दाफाश 2006 में हुआ था। 15 फरवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की फिर से सुनवाई करते हुए कोली को मौत की सजा सुना दी।
कोली को मेरठ जेल में फांसी देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यहां 40 साल बाद किसी को फांसी पर लटकाया जाएगा। यहां की जेल में फांसी पर लटकने वाला कोली 18वां अपराधी होगा। इससे पहले यहां 1975 में फांसी दी गई थी।
यहां हम आपको भारत के कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।
स्लाइडर बढ़ाइए, और देखिए भारत के कुछ ऐसे लोग, जिनके गुनाहों पर माफी नहीं, फांसी मिली ।

मुंबई हमले का दोषी
मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को पुणे स्थित यरवदा जेल में फांसी दी गई थी। आपको बता दें, मुंबई 26/11 हमले में एकमात्र पकड़े गए इस आतंकी के दय़ा याचिका को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद इसे फांसी दी गई।

संसद पर हमले का दोषी
दिसंबर 2001 में संसद पर हमला करने के जुर्म में दोषी पाए गए आतंकी अफजल गुरू को फरवरी 2013 में फांसी पर लटकाया गया। इसे तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। इसकी दया याचिका को भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया था।

14 साल की बच्ची का रेप एवं हत्या
कोलकाता के धनंजय चैटर्जी को 14 अगस्त 2004 को फांसी की सजा दी गई थी। 14 वर्षीय बच्ची की रेप और फिर हत्या करने के आरोप में इसे फांसी की सजा दी गई।इसके परिवारवालों ने भी दया याचिका दायर की थी। लेकिन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उसे खारिज कर दिया था।

सीरियल किलर
दो सालों में छह नृशंस हत्याएं करने के जुर्म में शंकर को फांसी की सजा सुनाई गयी थी। वर्ष 1991 में इसे अपने दो सहयोगियों के साथ तमिलनाडु के सलेम सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी। यह तमिलनाडु में दी गयी आखिरी फांसी है।

गोपालगंज के डीएम की हत्या
बिहार के परमहंस यादव को गोपालगंज के डीएम एमपीएन शर्मा की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 1988 में इसे फांसी दी गई।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दो सिख बॉडीगार्ड ने 31 आक्टोबर, 1984 को उनकी हत्या कर दी थी। जिनमें से एक था सतवंत सिंह। जबकि दूसरे बॉडीगार्ड बेंत सिंह की मृत्यु मौके पर ही हो गई थी। सतवंत सिंह को 6 जनवरी 1989 को फांसी पर चढ़ाया गया।

दो बच्चों का अपहरण और हत्या
दो बच्चे गीता और संजय चोपड़ा का अपहरण कर इनकी बर्बरतापूर्ण हत्या करने के मामले में कुलजीत सिंह(रंग्गा)और जसबीर सिंह(बिल्ला) को फांसी की सजा दी गई थी। इन्हें 1982 में फांसी पर लटकाया गया। इन्होंने इन बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण किया था, लेकिन जब इन्हें पता चला इनके पिता सेना में हैं तो इन्होंने सबूत मिटाने के लिए लड़के की हत्या और लड़की के साथ रेप और फिर हत्या का जघन्य अपराध किया।

महात्मा गांधी की हत्या
नाथुराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके लिए गोडसे को 15 नवंबर, 1949 को अंबाला के जेल में सजाए-मौत मिली।












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