Me Too in China: चीन में "मी टू" का कैंपेन चलने वाली पत्रकार का दमन
चीन में यौन शोषण के मामले सामने नहीं आने दिए जाते। अगर कोई उसे उठाना चाहता है तो वहां की सरकार उसको दमन के जरिये दबा देती है। ऐसा ही एक मामला 22 सितम्बर को सामने आया, जब अचानक लोगों को पता चला कि कभी "मी टू" का कैंपेन चलने वाली पत्रकार सोफिया हुआंग ज़ुएकिन को चीन के एक प्रांत गुआंगजौ की अदालत में पेश किया गया है। उन पर तोड़फोड़ का मुकदमा चलाया जा रहा है।
"मी टू" कैंपेन कामकाजी महिलाओं के यौन शौषण के खिलाफ आवाज उठाने की एक अंतरराष्ट्रीय पहल है, जो दुनिया के 85 देशों में महिलाएं चला रही हैं। हुआंग ज़ुएकिन ने भी चीन में 2021 में यह अभियान शुरू किया था फिर अचानक उन्हें गायब कर दिया गया था। अब पता चला कि चीन की सरकार उन्हें गिरफ्तार कर उनके खिलाफ राज्य सत्ता के खिलाफ "तोड़फोड़ के लिए उकसाने" के आरोप में मुकदमा चला रही है। हुआंग के साथ लेबर एक्टिविस्ट वांग जियानबिंग पर भी मुकदमा चलाया जा रहा है।

हुआंग जुएकिन के मौलिक अधिकार के समर्थन में तमाम बड़े देशों से आवाज उठ रही है। अमेरिका ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड सहित सात पश्चिमी देशों के राजनयिकों ने पर्यवेक्षक के रूप में कोर्ट की करवाई के परीक्षण में भाग लेने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोर्ट में जाने की अनुमति नहीं दी गई। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि "किसी को भी उसके मौलिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए और ना ही उस पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।" एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी हुआंग और वांग के खिलाफ मुकदमा चलाये जाने की निंदा की है और उनकी रिहाई की मांग की है।
सोफिया हुआंग जुएकिन एक पत्रकार हैं और वह यौन उत्पीड़न से गुजरी महिलाओं के समर्थन में आवाज उठाती रही हैं और कई मी टू अभियानों में शामिल रही हैं, जबकि वांग जियानबिंग विकलांग लोगों और व्यावसायिक रोगों से पीड़ित श्रमिकों को कानूनी सहायता प्रदान करते हैं। वह भी चीन में मी टू आंदोलन के समर्थक हैं। इन दोनों को 19 सितंबर 2021 को चीनी शहर गुआंगज़ौ में गिरफ्तार किया गया था। उस दिन हुआंग मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए चीन छोड़ कर ब्रिटेन जाने वाली थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद से उन्हें परिवार के सदस्यों से मिलने नहीं दिया गया है। इस बीच, उनके दर्जनों दोस्तों को पुलिस ने बुलाया और उनके घरों की तलाशी ली।
हुआंग जुएकिन को हिरासत में टॉर्चर भी किया गया। उनका स्वास्थ्य काफी गिर गया है। चीन में मी टू आंदोलन में शामिल होने के साथ-साथ हुआंग ने एक पत्रकार के रूप में हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को भी कवर किया। 2019 के विरोध प्रदर्शनों पर रिपोर्टिंग के दौरान खतरे को भांपते हुए, हुआंग ने लिखा था: "बेशक मैं स्वतंत्रता के समर्थन की जोखिमों को समझती हूं और घर से दूर रहने की कीमत चुका रही हूं।"
चीन में पिछले पांच वर्षों में नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में काफी वृद्धि देखी गई है, जिसमें यौन उत्पीड़न भी शामिल है। हालांकि चीन में खुलेआम सरकार के खिलाफ आंदोलन की इजाजत नहीं है फिर भी वहां "मी टू" आंदोलन लोगों ने चलाया। चीन ने सरकारी सेंसरशिप लागू कर ऑनलाइन "मी टू" पोस्ट पर अंकुश लगाने की कोशिश की। सोशल साइट वीबो पर जब हैशटैग "मी टू इन चाइना" को कुछ समय के लिए ब्लॉक कर दिया गया तो सेंसरशिप से बचने के लिए चीनी महिलाओं ने बन्नी और बाउल-ऑफ-राइस इमोजी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। चीनी भाषा में "राइस बन्नी" का उच्चारण मी टू होता है।
नारीवादी कार्यकर्ता जिओ क्यूकी ने आंदोलन के लिए चावल-खरगोश में इमोजी के उपयोग की शुरुआत की। फिर स्कूलों में यौन व्यभिचार की शिकार लड़कियों ने भी अपने यौन उत्पीड़न के अनुभवों, उनकी आवृत्ति और जीवन पर उनके नकारात्मक प्रभावों की जानकारी साझा करने लगी। जब हैशटैग मी टू का आंदोलन सामने आया, तो अन्य महिलाओं ने भी अपने यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा करना शुरू किया।
हुआंग ज्यूकिन ने एक महिला द्वारा अपने प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने पर उसका सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था। वांग जियानबिंग भी उनके साथ थे। दोनों एक फ्लैट में उत्पीड़ित लोगों को बुलाकर बात करते थे। उन दोनों को पुलिस ने एक साथ हिरासत में ले लिया था। उसके बाद से चीन में मी टू आंदोलन शिथिल पड़ गया। इस बीच, कई अन्य महिला कार्यकर्ताओं ने बदनामी से बचने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिए। टेनिस स्टार पेंग शुआई एक वरिष्ठ चीनी राजनेता पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद सार्वजनिक दृश्य से गायब हो गईं। फिर भी चीन का सच दुनिया से छुप नहीं पाया।












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