Water Conservation: महाराष्ट्र का एक गांव जो जल संरक्षण में बना मिसाल, अब है एकदम आत्मनिर्भर

कभी इस गांव के लोग पानी की कमी और सूखती जमीन को छोड़कर चले गए थे लेकिन अब इसी बंजर जमीन को उन्होंने अपने प्रयासों से हरा-भरा कर दिया है।

Maharashtra Surdi village is an example in water conservation

Water Conservation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों जल संरक्षण में लोगों की भागीदारी को महत्व दिया था। उन्होंने कहा कि अकेले सरकार के प्रयासों से कुछ नहीं हो सकता। इसलिये सभी राज्यों के जल मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जल राज्यों के बीच सहयोग व समन्वय का विषय होना चाहिए। इसके अलावा, शहरीकरण की तेज गति को देखते हुए उन्हें पहले से ही इसके लिए योजना तैयार करनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि मनरेगा के तहत, ज्यादा से ज्यादा काम पानी पर होना चाहिए। इसके लिए जल संरक्षण के अभियानों में जनता को, सामाजिक संगठनों को और सिविल सोसायटी को ज्यादा से ज्यादा शामिल करना होगा।

क्या स्थिति है भारत में जल संकट को लेकर

सबसे पहले बात करते है कि भारत में जल की उपलब्धता कितनी है? ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक पूरा विश्व अब धीरे-धीरे जल संकट के प्रबंधन में प्राकृतिक और स्थानीय समाधान पर जोर देने लगा है। जल संकट से जूझ रहे दुनिया के 400 शहरों में से शीर्ष 20 में 4 शहर - चेन्नई पहला, कोलकाता दूसरा, मुंबई 11वां और दिल्ली 15वें नंबर पर हैं।

WHO (विश्व स्वाथ्य संगठन) का कहना है कि एक शख्स को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर दिन तकरीबन 25 लीटर पानी चाहिए। देश की राजधानी दिल्ली में प्रति व्यक्ति पानी की खपत दुनिया में पहले स्थान पर है। यहां पानी की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन खपत 272 लीटर हैं। WHO के अनुसार इस बेहिसाब पानी की बर्बादी से भविष्य में लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में भारत सबसे ज्यादा भू-जल का उपयोग करता है। जबकि चीन और अमेरिका में भू-जल का उपयोग उतना नहीं होता। भारत में अनुमानतः कृषि में भू-जल का 85 प्रतिशत, घरेलू कामों में 5 प्रतिशत और उद्योग-धंधों में 10 प्रतिशत उपयोग होता हैं। जबकि शहरी क्षेत्र की 50 प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र की 85 प्रतिशत जरूरतें भू-जल से पूरी की जाती हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस भू-जल दोहन के कारण 2007-2017 के बीच भारत में 61 प्रतिशत कमी ग्राउंडवाटर लेवल में आ चुकी है।

सुर्डी गांव ने लिखी अपनी 'किस्मत'

अक्सर ही हमें खबरों में ये सुनने को मिलता है कि महाराष्ट्र के किसानों ने सूखे के कारण आत्महत्या कर ली। खेतों में खड़ी फसल पानी के बिना बर्बाद हो गयी। उसी महाराष्ट्र के एक ऐसे ही गांव की कहानी है, जो कभी सूखे की मार झेल रहा था लेकिन पानी संरक्षण के तरीकों अपनाकर आज यह गांव चारों तरफ हरियाली से घिरा हुआ हैं।

पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से लगभग 51 किमी दूर बसे सुर्डी गांव की आबादी सिर्फ 3,350 है। यह गांव भी कुछ सालों पहले तक भयंकर जल संकट का सामना कर रहा था। गर्मी आते ही यहां पानी के सभी स्रोत सूख जाते थे लेकिन अब अलग ही नजारा देखने को मिलता है। गांववालों की जल संरक्षण की पहल से इस गांव को 'टैंकर-मुक्त गांव' का खिताब मिल चुका है। साथ ही साल 2022 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय जल पुरस्कार में सुर्डी ग्राम पंचायत ने 'सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत' श्रेणी में तीसरा पुरस्कार जीता था।

घर छोड़कर चले गए थे लोग

इंडियास्पेंड की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2010 तक इस गांव में जल संकट के कारण अकाल की स्थिति बन गयी थी। हर साल फरवरी महीने से ही जल स्रोत सूखने लग जाते थे। जिला डेटा रिपोर्ट के अनुसार, गांव में पूरे साल औसतन सिर्फ 601 मिमी वर्षा होती है। इस वजह से गांव वाले अपने घर छोड़कर कहीं और रहने को मजबूर होने लगे। तब इन विषम हालातों से निपटने के लिये स्थानीय ग्रामीणों ने तय किया कि गांव में पानी की कमी को पूरा करने के लिये सभी लोग मिलकर वाटरशेड प्रबंधन परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे।

600 मीटर का तालाब बना डाला

सुर्डी गांव वालों ने जल की समस्या को दूर करने के लिये गांव की सीमा पर 600 मीटर लंबा एक तालाब खोद दिया ताकि बारिश के पानी को उसमें संरक्षित किया जा सके। इस काम के लिए शुरूआत में पैसों का इंतजाम भी गांववालों ने ही किया। फिर ग्राम पंचायत की मदद से राज्य के कृषि विभाग से संपर्क किया गया और वहां से उन्हें तकनीकी सहायता मिली। एकजुट होकर गांव वालों के इस एक छोटे प्रयास के चलते आज यह गांव पानी की समस्या से छुटकारा पा चुका है।

गांव में अब जरुरत से ज्यादा पानी उपलब्ध

इस एक सफलता ने गांव वालों के हौंसले भी बुलंद कर दिये है और बगल के पहाड़ों के पानी का भी संचय करने के लिये छोटे-छोटे तालाब बना डाले। गांव वालों ने कई जल संचयन परियोजनाओं जैसे नदी नालों की गहराई बढ़ाना, गैबियन संरचना निर्माण (लोहे के जाल में पत्थर जमा कर दीवार बनाना), कॉन्टूर ट्रेंच (खाईयां), डीप ट्रेंच (गहरे खड्डे), इनलेट और आउटलेट वॉटर टैंक, फार्म पौंड, चेक डैम और स्टोन चेक डैम पर भी अब काम करना शुरू किया हैं।

अब इस गांव में करीब 30 करोड़ लीटर पानी जमा किया जा रहा है। यह पानी इस गांव की जरूरत से कहीं ज्यादा है। इसलिये गांव वाले अब नकदी फसलें जैसे गन्ना, अंगूर, पत्तेदार सब्जियां भी उगाने लगे हैं। यह लोग नियमित रूप से उत्तम गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों को भी मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में बेचकर पैसे कमा रहे हैं।

यह भी पढ़ें: सूर्य के प्रकाश से 10 सेकंड में 99.9% स्वच्छ होगा पानी, शोध में मिला पेयजल समस्या का बड़ा समाधान

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+