Life beyond Earth: नासा ने खोजा एक और प्लेनेट, कितनी संभावना है वहां जीवन की?

ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा क्या कहीं और जीवन है? अगर है तो वह किस प्रकार का होगा? ये प्रश्न अभी तक पहेली बने हुए हैं। ऐसे में नासा ने एक और ग्रह की खोज की है जिसमें जीवन होने का दावा किया जा रहा है।

Earth

नासा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, टीओआई 700ई (TOI-700e) एक स्थलीय एक्सोप्लैनेट (Exoplanet) है जो एम-टाइप के तारे की परिक्रमा करता है। इसका द्रव्यमान 0.818 पृथ्वी के बराबर है। इसे अपने तारे की एक परिक्रमा पूरी करने में 27.8 दिन लगते है। अनुसंधान का नेतृत्व कर रही और नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में पोस्टडॉक्टोरल फेलो के तौर पर कार्यरत एमिली गिल्बर्ट का कहना है कि यह कुछ ऐसे एक्सोप्लैनेट्स में से एक हैं जिसमें जीवन संभव है।

एक्सोप्लैनेट्स क्या होते हैं?
एक्सोप्लैनेट्स को हिंदी में बहिर्ग्रह कहते हैं। अर्थात वे ग्रह जो हमारे सौर मंडल से बाहर मौजूद हैं। सबसे पहले बहिर्ग्रह की खोज साल 1990 में हुई थी। नासा ने इस तरह के कई और भी ग्रह खोजे हैं जैसे टीओआई 700 बी, टीओआई 700 सी और टीओआई 700 डी। गौरतलब है कि नासा की वेबसाइट के अनुसार अभी तक 5000 से अधिक एक्सोप्लैनेट्स खोजे जा चुके हैं।

टीओआई का अभिप्राय टेस ऑब्जेक्ट ऑफ इंटरेस्ट होता है। दरअसल, सभी एक्सोप्लैनेट्स को नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) मिशन ने खोजा है। इसलिए इन्हें यह नाम दिए गए हैं।

जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में नासा के एक्सोप्लैनेट एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. कार्ल स्टापेलफेल्ट (Karl Stapelfeldt) हैं। वहीं एक भारतीय मूल की वैज्ञानिक अंजली त्रिपाठी भी इस प्रोग्राम में साइंस एम्बेसडर के तौर पर काम कर रही हैं।

टीओआई 700ई में जीवन की संभावना
टीओआई 700ई लगभग पृथ्वी के आकार के बराबर है। यह एक चट्टानी ग्रह है। दरअसल, टीओआई 700ई की तरह ही टीओआई 700 डी भी अपने स्टार के हैबिटेबल जोन के भीतर परिक्रमा करता है। स्पेस की दुनिया में हैबिटेबल जोन जीवन होने का एक महत्वपूर्ण कारक होता है क्योंकि यह किसी भी ग्रह पर पानी की मौजूदगी को सुनिश्चित करता है। इसी कारण नासा का अनुमान है कि इसकी सतह पर पानी मौजूद हो सकता है। हैबिटेबल जोन को गोल्डीलॉक्स जोन के रूप में भी जाना जाता है। एक अध्ययन में कहा गया है कि पृथ्वी की तरह अपनी धुरी पर झुकाव वाले 'बहिर्ग्रह' ऑक्सीजन युक्त वातावरण की क्षमता के कारण जीवन होने की संभावना रखते हैं।

2020 में भी ऐसा ग्रह मिला था
नासा ने इससे पहले 2020 में एक ग्रह खोजा था। जिसे टीओआई 700 डी नाम दिया था। वह भी पृथ्वी के ही आकार का ग्रह है। टीओआई 700ई और टीओआई 700 डी दोनों ग्रह रहने योग्य क्षेत्र में मौजूद हैं। नासा का कहना है कि संभवत: यहां पानी मौजूद हो सकता है। अगर इन ग्रहों पर पानी है तो वहां जीवन की अधिक संभावना होगी। टीओआई 700 डी के सबसे करीब टीओआई 700बी ग्रह है, जो पृथ्वी के आकार का 90 प्रतिशत है। यह पृथ्वी के 10 दिनों में ही अपने तारे का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इसके बाद टीओआई 700सी है जो हमारे ग्रह से 2.5 गुना ज्यादा बड़ा है। यह 16 दिनों में अपने तारे की परिक्रमा पूरी करता है।

अन्य ग्रहों पर जीवन की कितनी संभावनाएं
किसी भी ग्रह में रहने के लिए ये बहुत जरूरी है कि वहां का तापमान न तो बेहद गर्म हो और न ही बिल्कुल ठंडा। ऐसे ग्रह का आकार भी पृथ्वी के द्रव्यमान के अनुसार ही होना चाहिए नहीं तो गुरूत्वाकर्षण बड़ी मुसीबत साबित हो जायेगा। नासा एक्सोप्लैनेट कार्यक्रम के माध्यम से पृथ्वी से परे किसी ग्रह पर वर्तमान जीवन के अचूक संकेतों का अध्ययन कर रहा है। नासा की अधिकारिक वेबसाइट में प्रकाशित खगोलशास्त्री सारा सीगर (Sara Seager) के एक लेख के अनुसार नासा का केपलर और इसका आधुनिक स्वरूप के2 (K2) और जेम्स वेब जैसे स्पेस टेलीस्कोप रहने योग्य अन्य ग्रहों के सबूत दे सकते हैं। नासा का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप या वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे टेलीस्कोप अन्य ग्रहों में ऑक्सीजन और जल वाष्प सहित संभावित जीवन को खोज सकता है।

नासा के अलावा, हाल ही में खगोल-वैज्ञानिकों ने घोषणा की थी कि उन्होंने तीन ऐसे ग्रह खोज निकाले हैं जिनका वातावरण धरती के सौरमंडल की तरह है। बेल्जियम के शोधकर्ता माइकल गिलेन के मुताबिक, "ये ग्रह शुक्र, पृथ्वी और मंगल के स्तर पर हैं। उनकी सतह पर पानी तरल अवस्था में हो सकता है और वहां जीवन की संभावना भी है।" शोधकर्ताओं ने पृथ्वी जैसे इन ग्रहों को एक खास तरह के टेलिस्कोप, ट्रांजिटिंग प्लैनेट्स एंड प्लेनेट्सिमल्स स्मॉल टेलिस्कोप यानि TRAPPIST के जरिए खोजा है। ट्रैपिस्ट को बेल्जियन यूनिवर्सिटी ऑफ लिएज संचालित करता है और यह ला सिला चिली में मौजूद यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेट्री का हिस्सा है।

शोध उम्मीदों पर टिका है
अन्य ग्रहों पर जीवन जैसी परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि एक दिन पृथ्वी के बाहर भी जीवन संभव होगा। इस बीच अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रेडियो संदेश पकड़ा है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि इस ब्रह्माण्ड में कहीं न कहीं जीवन मौजूद है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पहली बार उन तारों का पता लगाया है जो रेडियो सिग्नल भेज रहे हैं। उनके इस रेडियो संदेश से पता चलता है कि उनके आसपास छिपे हुए ग्रह मौजूद हैं और वहां जीवन संभव है। नेचर एस्ट्रोनॉमी पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि वैज्ञानिक इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि ये चुंबकीय तरंगें जिन तारों से आ रही हैं, वहां चक्कर लगाने वाले ग्रह मौजूद हैं और वहां पर जीवन संभव है।

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