Quit India Movement: जानें किसने दिया था महात्मा गांधी को भारत छोड़ो नारे का सुझाव
Quit India Movement: 8 अगस्त 1942 को मोहनदास करमचंद गांधी ने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान से एक घोषणा की। उस समय आजादी के विचार से प्रेरित लोगों से यह मैदान खचाखच भरा था। उस समय महात्मा गांधी की उम्र 73 वर्ष थी। तब उन्होंने एक नारा दिया था, अंग्रेजों भारत छोड़ो। बस इसी के साथ शुरुआत हो गई थी भारत छोड़ो आंदोलन की। अंग्रेजों को यह बात रास नहीं आई और उन्होंने कांग्रेस की पूरी कार्यसमिति को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही प्रेस पर भी प्रतिबंध लगा दिए। कई जगहों पर कर्फ्यू लगा दिया तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और हड़तालों पर भी रोक लगा दी गई। 'भारत छोड़ो' आंदोलन को आजादी से पहले भारत का सबसे बड़ा आंदोलन माना जाता है। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।
कैसे हुई इसकी शुरुआत
यह जानना जरूरी है कि ऐसे क्या कारण बने कि महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की। तो आपको बता दें कि 14 जुलाई 1942 को वर्धा में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होती है। इस बैठक में यह निर्णय लिया जाता है कि ब्रिटिश हुकूमत को भारत के शासन को तुरंत भारतवासियों के हाथ में सौंप देना चाहिए। भारत छोड़ो आंदोलन को अगस्त क्रांति का नाम भी दिया जाता है। तो उस जुलाई की बैठक के बाद 7 अगस्त को मुंबई में एक बार फिर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होती है। इसके ठीक अगले दिन 8 अगस्त को भारत छोड़ो का प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है। इस तरह इस आंदोलन की शुरुआत होती है।

कई लोगों की हुई गिरफ्तारियां
आंदोलन के पहले दो दिन पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन हुए, पर ब्रिटिश हुकूमत ने जब उन पर भी लाठियां और गोलियां चलाईं तो जनता ने भी पत्थर उठा लिए। इस आंदोलन के दौरान लगभग 14 हजार से अधिक लोगों को जेल में डाल दिया गया था। देश में हिंसा का माहौल बन रहा था। ऐसे में अंहिसा के पथ पर चलने वाले गांधीजी से जब जनता की इस हिंसा पर सवाल किए गए थे तो उन्होंने स्पष्ट कहा था कि इस हिंसा के लिए जिम्मेदार खुद ब्रिटिश प्रशासन है। इस दौरान तीन जगहों पर इस दौर में आजाद सरकारें बना ली गई थी।
अंग्रेजी में था महात्मा गांधी का भाषण
महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को लेकर जो भाषण दिया था वो अंग्रेजी में था। जिसमें उन्होंने 'क्विट इंडिया' का ऐतिहासिक नारा दिया था। 'क्विट इंडिया' नारे का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया। इसे हिंदी में 'भारत छोड़ो' तो वहीं मराठी में 'चले जाओ' कहा गया। बता दें कि महात्मा गांधी जी ने भाषण से पहले कई लोगों से चर्चा की थी। ताकि एक ऐसा नारा सामने आए जो आंदोलन को सही राह दे सके। इसके बाद कई लोगों ने अपने विचार रखे। इनमें से एक नारा गेट आउट था। लेकिन गांधी जी ने इसे खारिज कर दिया।
फिर सरदार पटेल ने दो नारे सुझाए। उन्हें भी बहुत पसंद नहीं किया गया। इसके बाद यूसुफ महर अली ने 'क्विट इंडिया' का सुझाव दिया और महात्मा गांधी ने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया। आपको बता दें कि यूसुफ महर अली कांग्रेस के सक्रिय सदस्य थे। वो उस दौर में मुंबई शहर के मेयर भी थे, जहां इस ऐतिहासिक आंदोलन की घोषणा हुई थी।
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