जानिये क्यों दीवाली से एक दिन पहले मनायी जाती है नरक चतुर्दशी

लखनऊ। दीवाली का पर्व असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। लेकिन दीवाली के एक दिन पहले पड़ने वाले नरक चतुर्दशी की महत्ता के बारे में बहुत ही कम लोगों को मालूम है। पटाखों-आतिशबाजी से जुड़ी 16 बातें जो आप नहीं जानते

narak chaturdashi

नरक चतुर्दशी मुख्य रूप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इस दिन को भगवान कृष्ण की नरकासुर पर जीत के तौर पर मनाया जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार नरकासुर धरती मां का पुत्र था।

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नरकासुर अपनी प्रवृत्तियों के चलते असुर बन गया और उसने अपने बल पर कई राज्यों पर राज्य किया। उसने जबरदस्ती कई राज्यो को अपने अधीन किया था।

नरकासुर धरती और स्वर्ग दोनों पर राज करने के लिए आया था। लेकिन भगवान इंद्र ने भगवान विष्णु से याचना की कि अपने कृष्ण के अवतार के समय वह नरकासुर से लोगों को मुक्ति दिलायें।

अपने कृष्ण अवतार में भगवान ने गरुड़ पर सवारी करते हुए अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ सुदर्शन चक्र से नरकासुर का वध किया था

जब दूसरी मान्यता के अनुसार नरकासुर को ब्रम्हा से यह वरदान प्राप्त था कि वह सिर्फ महिला के हाथों ही मारा जा सकता है। इसलिए कृष्ण की पत्नी सत्यभामान ने नरकासुर का वध कृष्ण के सारथी के साथ मिल कर की थी।

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