National Bravery Awards: कोई भाई की खातिर लड़ा तेंदुए से, किसी बच्चे ने जलती कार और बाढ़ से बचाई लोगों की जान
National Bravery Awards: राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार भारतीय बहादुर बच्चों को दिया जाता है। जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए और अपनी उम्र से बढ़कर वीरता की कोई मिसाल पेश की हो।

पिछले 2 सालों से आयोजित नहीं हो रहा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार समारोह इस वर्ष फिर से आयोजित होने जा रहा है। गौरतलब है इस बार पिछले दो सालों सहित कुल 56 राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार बालकों को दिए जाएंगे। इसमें 2020 के 22, 2021 के 16 और 2022 के 18 राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शामिल हैं। आइये जानते हैं इनमें से ऐसे तीन बाल वीरों की कहानी।
क्या है राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार?
भारत में, राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW) द्वारा प्रतिवर्ष 25 वीर बच्चों को दिए जाने वाले पुरस्कारों का एक समूह है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में बहादुरी दिखाई है। पुरस्कार के तौर पर विजेताओं को एक पदक, एक प्रमाण पत्र और एक नकद पुरस्कार मिलता है। पुरस्कार भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के दिन प्रदान किए जाते हैं। विजेताओं का चयन पूरे देश से किया जाता है और बच्चे की आयु 6-18 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
भाई के लिए तेंदुआ से लड़े नितिन
12 जुलाई 2021 को रुद्रप्रयाग के निवासी नितिन और उसका भाई, नारी देवी चंडिका मंदिर में महायज्ञ के लिए जा रहे थे। रास्ते में नितिन को प्यास लगी और वह पानी पीने के लिए रुक गया। मगर उसका भाई आगे निकल गया। जहां नितिन पानी पीने के लिए रुका, उससे कुछ दूरी पर ही एक तेंदुआ घात लगाए बैठा था। नितिन को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसके आसपास कोई जंगली जानवर भी है। नितिन को अकेला देखते हुए तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया।
नितिन ने बचने के लिए बहुत संघर्ष किया। खून से लथपथ होने के बावजूद नितिन ने तेंदुए के दोनों पैर पकड़ लिए और अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ता रहा। जैसे ही नितिन के भाई ने उसकी चीखें सुनी तो वह भागते हुए नितिन के पास पहुंचा और उसने तेंदुए पर एक पत्थर से वार किया। जिसके बाद तेंदुए ने नितिन को छोड़ उसके भाई को अपना निशाना बना लिया।
दरअसल, तेंदुए ने नितिन के भाई पर बहुत तेजी से हमला किया था। अपने भाई की जान खतरे में देख नितिन ने पास में पड़ी एक लकड़ी उठाई और तेंदुए पर बहुत तेजी से फेंकी। चीखना-चिल्लाना सुनकर आसपास के गांव वाले भाग कर उनके पास आ गए और भीड़ को देखकर तेंदुआ जंगल की तरफ भाग गया। नितिन ने जब यह साहस दिखाया तब उसकी उम्र महज 16 वर्ष थी।
जलती कार से 4 बच्चों को निकाला बाहर
यह बहादुरी की दास्तां पंजाब के संगरूर जिले में अमनदीप कौर की है। दरअसल, 15 फरवरी 2020 को एक वैन में आग लग गई थी और उसमें 12 स्कूली बच्चे सवार थे। अमनदीप की कम उम्र होने के बावजूद उनका हौसला सबसे ज्यादा था। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए उस जलती वैन से 4 बच्चों की जान बचा कर अपनी वीरता दिखाई। उस वैन से अमनदीप द्वारा बचाए चार बच्चों सहित आठ बच्चों को रेस्क्यू कर लिया गया। मगर दुर्भाग्य से 4 बच्चों ने अपनी जान गंवा दी।
जब अमनदीप से इस हादसे के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा कि "जैसे ही वैन चली, मैंने सर (शिक्षक-सह-चालक दलबीर सिंह) से कहा कि वैन से कुछ गंध आ रही है... लेकिन ड्राइवर ने वैन चलाना शुरू कर दिया। मैंने फिर दोहराया कि बदबू बढ़ रही है, लेकिन वह इधर-उधर देखने लगे और फिर अपने पास बैठे नाबालिग बच्चों को देखने लगे। बाद में आग दिखाई दी और हमें वैन के शीशे तोड़कर बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा।" उन्होंने यह भी कहा कि "मैंने एक खिड़की तोड़ी और बाहर निकल गई। फिर मैंने चार बच्चों को बाहर आने में मदद की। कुछ और लोग भी थे जो मदद के लिए आए थे। मैं उन चारों बच्चों को लेकर स्कूल की बिल्डिंग की तरफ भागी जो फूट-फूट कर रो रहे थे।"
बाढ़ में एक महिला और उसके बच्चे की बचाई जान
जुलाई 2019 में असम के सोनितपुर में भयंकर बाढ़ आई हुई थी। तब वहां के रहने वाले 10 वर्षीय उत्तम टंटी ने बाढ़ में फंसी एक महिला और उसकी 3 वर्षीय बच्ची की जान बचाई थी। दरअसल, दिघलीजन नदी का बाढ़ के कारण बहाव बहुत तेज और जलस्तर ऊंचा हो गया था। बावजूद इसके, अंजलि नाम की एक महिला अपनी दो बेटियों- रिया (3 वर्षीय) और दिप्ता (18 माह) के साथ नदी पार करने की कोशिश कर रही थी। इस दौरान उनका बैलेंस बिगड़ गया और अपनी दोनों बेटियों के साथ नदी के बहाव में बह गई।
उत्तम ने जब महिला और उसकी दो बेटियों को नदी के बहाव में बहते देखा तब उसने बिना समय गवाएं पानी में छलांग मार दी और अंजलि और उसकी 3 साल की बेटी को नदी किनारे खींच लाया। दुर्भाग्य से अंजलि ने अपनी 18 माह की बेटी दिप्ता को खो दिया क्योंकि वह नदी के बहुत तेज बहाव के साथ बह गई। उत्तम से जब उनके इस साहसी कार्य के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा कि "मैं छुट्टियों के दौरान अपने धान के खेत में अपने परिवार की मदद करता हूं। मैं किसी की भी जान बचाने के लिए नदी में गोता लगा सकता हूं, मुझे डूबने का डर नहीं है।"












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