Black Carrot: काली गाजर के सेवन से दूर रख सकते हैं अनेक बीमारियां
काली गाजर के सेवन से आप शरीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। काली गाजर के पौष्टिक तत्व आपको अनेक गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

Black Carrot: अधिकांशतः लोग सिर्फ लाल, नारंगी व पीली गाजर को ही जानते हैं। उनके जैसी काली गाजर भी होती है। इसका यह काला रंग एंथोसायनिन के कारण होता है। इसको देशी गाजर भी कहा जाता है। सर्वप्रथम स्विजरलैंड में इस किस्म के बीज का उदय हुआ। काली गाजर में आयरन, तांबा, पोटेशियम, फास्फोरस, जस्ता भरपूर मात्रा में होता हैं। इसके साथ-साथ यह विटामिन ए, बी, सी तथा ई का अच्छा स्रोत है।
काली गाजर का उपयोग
काली गाजर को भी सामान्य गाजर की तरह ही प्रयोग में ला सकते हैं। इससे सब्जी, अचार, मुरब्बा, सलाद, जूस, हलवा या अन्य मीठे व्यंजन बनाये जाते हैं तथा इसको कच्चा भी खाया जा सकता है।
काली गाजर की खेती
भारत में काली गाजर की खेती अधिकतर बड़े शहरों के नजदीकी इलाकों में होती है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब व हरियाणा में इसकी खेती सबसे ज्यादा होती है। अगर विदेशों की बात करें तो सीरिया, ईरान, अफगानिस्तान, स्विजरलैंड, यूएस, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये व चीन आदि में इसकी खेती होती है। चीन काली गाजर का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर देश है।
भारत में काली गाजर की खेती अधिकतर सितंबर से अक्टूबर माह में की जाती है। जो लगभग 3-4 महीनों में तैयार हो जाती है। 90 से 110 क्विंटल प्रति एकड़ इसका उत्पादन होता है। अगर इसकी कमाई की बात करें तो लगभग 80 हजार से 1 लाख रूपये प्रति एकड़ तक हो सकती है।
काली गाजर के फायदे
कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक - काली गाजर में एंथोसायनिन अधिक उच्च मात्रा में होता है। जो कैंसर के जोखिम को कम करता है। यह एंथोसायनिन कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को लगभग 80 प्रतिशत तक रोकने में सहायक माना गया है।
आंखों की रोशनी बढ़ती है - काली गाजर में बीटा-कैरोटीन (एक कार्बनिक यौगिक) भरपूर होता है, जो आंखों की दृष्टि को बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार आंखों को स्वस्थ रखने के लिए एंथोसायनिन फ्लेवोनोइड की विशेष भूमिका है। काली गाजर में उपस्थित एंथोसायनिन से आंखों को अंधेरे में होने वाली परेशानियों व रेटिना में होने वाली सूजन तथा अन्य आंखों से संबंधित बीमारियों को कम किया जा सकता है।
कब्ज व पेट संबंधित बीमारियों को करती है दूर - गाजर में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो कब्ज व एसिडिटी की समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। इसके साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है।
मोटापा कम करने में सहायक - काली गाजर में कैलोरी कम होने के बावजूद भी बहुत पौष्टिक होती है। इसमें घुलनशील फाइबर आपकी भूख व भोजन दोनों को कम करने में सहायक है। इसलिए इसके सेवन से मोटापा/वजन घटता है।
प्रतिरोधकता क्षमता (इम्यूनिटी पावर) बढ़ती है - विटामिन-सी काली गाजर में बहुत होता है। जो आपको बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। अर्थात आपकी इम्यूनिटी पावर बढ़ाता है।
जोड़े के दर्द (अर्थराइटिस) में फायदेमंद - काली गाजर में एंथोसाइनिन पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। जो अर्थराइटिस के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इससे जोड़ो का दर्द, सूजन आदि समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। इसलिए गठिया की समस्या होने पर काली गाजर का सेवन या इसका जूस पीना फायदेमंद होता है।
हृदय रहता है स्वस्थ - विशेषज्ञों के अनुसार काली गाजर के सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रोल व ग्लूकोज का स्तर कम होता है। जिससे रक्त वाहिकाओं (धमनी व शिरा) से संबंधित बीमारियां कम हो जाती है तथा हृदय स्वस्थ रहता है।
शुगर/मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक - काली गाजर के सेवन से इंसुलिन का उत्पादन उचित मात्रा में होता है, जिससे रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए मधुमेह के मरीजों को काली गाजर का सेवन बेहद लाभदायक हो सकता है।
मस्तिष्क होता है स्वस्थ - शोधकर्ताओं के अनुसार, गाजर में थियामिन पोषक तत्व (विटामिन बी-1) पाया जाता है। जो नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को मजबूत करने के साथ-साथ मस्तिष्क को स्वस्थ्य रखने में भी लाभदायक हो सकता है।
त्वचा को निखारने में सहायक - काली गाजर सेहत के साथ-साथ त्वचा के लिए भी लाभदायक होती है। इसमें उपस्थित विटामिन सी त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है तथा त्वचा को सुन्दर बनाने और शरीर में कोलेजन (एक प्रकार की प्रोटीन) उत्पादन में सहायक है। जिससे त्वचा लचीली बनती है तथा त्वचा की झुर्रियों को भी कम करने में सहायक है।
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