जानिये महात्मा गांधी स्वतंत्रता दिवस को कैसे मनाना चाहते थे
अंकुर सिंह। आजादी का जश्न हर साल हम धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन देश की आजादी के लिए अनशन को हथियार बनाने वाले राष्ट्रपति महात्मा गांधी स्वतंत्रता दिवस को कुछ अलग ही तरीके से मनाने का इच्छा रखते थे।
सभी जगह एक साथ होनी चाहिए घोषणा
महात्मा गांधी ने यंग इंडिया नाम की मैगजीन में लिखे अपने लेख में स्वतंत्रता दिवस को मनाने के अपने तरीके की चर्चा की थी। उन्होंने अपने लेख में लिखा था कि अगर आजादी की घोषणा होती है तो मैं चाहूंगा कि यह देश के सभी गांवों, शहरों में हो। बेहतर होगा कि सभी जगहों पर एक ही समय सांकेतिक समूह में इसे मनाया जाए।
परंपरागत तरीके से ड्रम बजाकर होना चाहिए आजादी का ऐलान
गांधी जी चाहते थे कि आजादी की घोषणा परंपरागत तरीके यानि ड्रम बजाकर जगह-जगह की जानी चाहिए। समारोह का शुरुआत तिरंगा फहराकर होनी चाहिए, इसके बाद पूरा दिन संरचनात्मक काम करते हुए बिताना चाहिए। इसमें चरखा चलाना, अछूतों की सेवा करना, हिंदू मुसलमानों का पुनर्मिलन कराना या फिर यह सारे काम एक साथ करना। ये सारे काम एक साथ करना असंभव नहीं है।
जानिये क्यों आधी रात को भारत ने 15 अगस्त 1947 को मनाया आजादी का जश्न
अगर कोई सरकार आजादी को छीने तो उसे खत्म कर देना चाहिए
इन कामों में हिस्सा लेने वालों लोगों को इस बात की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि अपने देश की मिट्टी और आजादी को वह आगे भी आने वाली पीढ़ियों को विरासत के रूप में सौंपेगे। लेकिन अगर कोई सरकार लोगों के इस अधिकार का हनन करती है तो लोगों को उस सरकार को भी खत्म करने का अधिकार होना चाहिए।
जानिये क्यों महात्मा गांधी ने 15 अगस्त 1947 को तिरंगा नहीं फहराया
15 अगस्त 1947 को बापू ने किया 24 घंटे की भूख हड़ताल
हालांकि यहां गौर करने वाली बात है कि महात्मा गांधी ने यह लेख 1930 में लिखा था। लेकिन जब देश को आजादी मिली तो देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच खून-खराबा मचा हुआ था और बापू 15 अगस्त 1947 को 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे थे।













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