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Sattu Benefits: सेहत के लिए सुपरफूड है सत्तू

यूपी बिहार ही नहीं उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सत्तू का सेवन किया जाता है। सत्तू एक सुपरफूड है जिसमें न सिर्फ पोषण है बल्कि यह बदलते मौसम की मार से भी बचाव करता है।

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Sattu Benefits: भारतीय संस्कृति उत्सवधर्मी है। यहां कालगणना में पर्व का विशेष महत्व है। पर्व एक खगोलीय अनुक्रमणिका की तरह हैं, जहां सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ऋतु और मौसम के परिवर्तन को समझा जाता है। 14/15 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ वैशाख का स्वागत भी इस संक्रान्ति पर्व को मनाकर होता है।

पंजाब और हरियाणा में इस दिन वैशाखी का त्योहार होता है। बंगाल में पोएला वैशाख, असम में बोहाग बिहू, ओडिशा में महाविषुव संक्रांति मनाया जाता है। वहीं उत्तराखंड में इस दिन विखोरी महोत्सव मनाया जाता है। हर जगह मेष संक्रांति के दिन विशेष खानपान के साथ पर्व को मनाने की परंपरा है।

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में इस दिन को सत्तुआन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन चना और जौ से बनाया जाने वाला एक खाद्य पदार्थ जिसे सत्तू कहते हैं, खाने की परंपरा है। वैशाख के साथ ही सत्तू का प्रयोग इसके महत्व को बताता है। यदि सत्तू को सुपर फूड कहा जाय तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगा।

सत्तू को संस्कृत में सक्तु कहा गया है। भारतीय आयुर्वेद के ग्रंथों चरक संहिता, अष्टांगहृदयसंहिता, सुश्रुत संहिता आदि में इसका उल्लेख है। सक्तू का अर्थ और महत्व बौद्ध सम्प्रदाय में पाली में भी उद्धृत किया गया है। संस्कृत, मराठी, हिंदी और आधुनिक जीव विज्ञान में भी इसका वर्णन उद्धृत है। एच एच विल्सन ने ऋग्वेद की टीका और भाष्य में सत्तू के विशेष महत्व की व्याख्या पर जोर दिया है। मार्कण्डेय पुराण में योगियों के भोजन के सन्दर्भ में सत्तू का उल्लेख है।

30 ग्राम सत्तू में 6 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। यानी कि एक गिलास सत्तू पेय में एक गिलास दूध से 70 प्रतिशत अधिक प्रोटीन पाया जाता है। वैशाख के आने के साथ ही गर्मी का प्रकोप बढ़ना शुरू हो जाता है। इसीलिए प्रतीकात्मक रूप में सत्तू खाने का दिन यह बताता है कि गर्मी के दिनों में सत्तू का प्रयोग महत्वपूर्ण है। सिर्फ एक गिलास सत्तू पेय पीने से शरीर को इंस्टैंट एनर्जी मिलती है।

सत्तू की एक विशेषता यह भी है कि यह पेट का शोधन करता है। इस कारण मोटापा कम करने में भी मददगार है। मोटापा बढ़ने के लिए कॉन्सटिपेशन, इनडाइजेशन और बॉडी में फैट स्टोरेज को मुख्य रूप से उत्तरदायी माना जाता है। सत्तू में घुलनशील फाइबर पर्याप्त मात्रा में होता है। जिससे यह पेट का शोधन करता है। और पेट की अधिकाधिक समस्याओं को दूर कर वजन प्रबंधन में मदद करता है।

आजकल की भागदौड़ भारी जीवन-शैली में अधिकांश लोग गैस्ट्रोइंट्रोटाइटिस से पीड़ित दिखते हैं। हर समय जल्दबाजी, तनाव और फास्ट फूड कल्चर के चलते पेप्टिक ग्लैण्ड से लगातार गैस्ट्रिक रस निकलता रहता है। ऐसे लोगों के लिए सत्तू एक ऐसा फास्ट फूड हो सकता है जिसके सेवन से पेट की समस्याओं से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

सत्तू इनसॉल्यूबल फाइबर का बढ़िया स्रोत है। यह फाइबर आंतों के लिए अच्छा है और इससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है। सत्तू में सोडियम की मात्रा कम होती है। पर आयरन, मैंग्नीज और मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में होता है। यह फॉस्फोरस का भी बढ़िया स्रोत है। इसमें सर्करा की मात्रा बिल्कुल ही कम होती है। सत्तू में मौजूद बीटा-ग्लूकेन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है। इसलिए वजन नियंत्रित रखने के साथ-साथ यह डायबिटीज प्रबंधन में भी लाभदायक है।

सत्तू का नियमित सेवन हमारे मेटाबॉलिज्म को गति देता है। इसके अमीनो एसिड्स मसल्स को मजबूती देते हैं। चना और जौ (barley) का मिश्रित सत्तू का पेय, गर्मी के दिनों में बेहतरीन हेल्थ ड्रिंक है। गर्मी में बड़ों को और बच्चों को घर से बाहर जाने से पहले एक गिलास सत्तू ड्रिंक दिया जाए, तो यह शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के साथ हीट स्ट्रोक से भी बचाव करने में मदद करेगा। सत्तू शरीर की गर्मी को दूर करता है। सत्तू हमारे लीवर का मित्र आहार है, जो पेट की जलन को भी कम करता है और लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

किन्तु सत्तू के सेवन में कुछ बातें ध्यान रखने योग्य हैं। जिन लोगों को यूरिक एसिड, या पुरानी गैस्ट्रिक समस्या है, उन्हें सत्तू के नियमित सेवन की सलाह नहीं दी जाती है। किडनी की समस्या से पीड़ित व्यक्ति के लिए सत्तू का सेवन करने हेतु चिकित्सक की सलाह आवश्यक है। गठिया (arthritis) पीड़ित लोगों को भी हाई प्रोटीन पदार्थ लेने की सलाह नहीं दी जाती है। अतः ऐसे लोगों को रोग की स्थिति के अनुसार चिकित्सक काले चने के सत्तू के स्थान पर जौ के सत्तू का प्रयोग करने की सलाह दे सकते हैं।

जो लोग मोटापा कम करने के लिए सत्तू का सेवन करना चाहते हैं, उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि सत्तू दाल या रोटी जैसे खाद्य पदार्थों से अधिक कैलोरी देता है। जिस कारण सत्तू से त्वरित एनर्जी मिलती है। और वजन घटाने के लिए उस कैलोरी को बर्न करने के लिए उन्हें शारीरिक श्रम या व्यायाम भी करना होगा।

सत्तू को जैसे चाहें पेय के रूप में या विभिन्न व्यंजन के रूप में या सख्त गूंथा हुआ, मीठा या नमकीन अपने आहार में सम्मिलित करें। यह नई फसल के आगमन पर देवताओं को समर्पित कर पूरी गर्मी हमारे देश के लोगों को अनगिनत स्वास्थ्य लाभ देने वाला सुपर फूड है। गंगा स्नान के साथ सत्तू और आम का भोग, सत्तुआन की परंपरा है।

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