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Hydropower: बिजली उत्पादन में कोयले से क्यों बेहतर है पानी, जानिए हाइड्रोपावर के बारे में

भारत में बिजली उत्पादन के लिये कई विकल्प मौजूद हैं जैसे कोयला, गैस, सोलर, विंड, हाइड्रो और न्यूक्लीयर एनर्जी। बिजली के कुल उत्पादन में हाइड्रोपावर एनर्जी का भाग फिर से बढ़ाने के लिए सरकार ने नई योजनाओं की शुरुआत की है।

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Hydropower: केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स ने हिमाचल प्रदेश में 382 मेगावाट के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को ₹2614.51 करोड़ की लागत से बनाने की अनुमति दी है। यह पहल केंद्र सरकार की हाइड्रोपावर को बढ़ावा देने के तहत की गई है जिसके बारे में कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिक्र भी कर चुके हैं। यह प्लांट हिमाचल प्रदेश में सतलज नदी के सुन्नी डैम पर बनाया जाएगा।

क्या है हाइड्रोपावर और हाइड्रोपावर प्लांट?

हाइड्रोपावर को पनबिजली के नाम से भी जाना जाता है। यह रिन्यूएबल एनर्जी का एक रूप है जो गिरते या बहते पानी से उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करता है। इसे एक स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी का स्रोत माना जाता है क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैसों या अन्य वायु प्रदूषकों का उत्पादन नहीं करता है। हाइड्रो पावर प्लांट्स गिरते या बहते पानी की काइनेटिक एनर्जी का उपयोग करते हैं, उससे टरबाइन चालू होती है जिसकी वजह से बिजली उत्पन्न होती है। दुनिया में कई प्रकार के हाइड्रो पावर प्लांट्स हैं, जिनमें इंपाउंडमेंट, डायवर्जन और पंप स्टोरेज शामिल हैं।

हाइड्रोपावर प्लांट कैसे बिजली बनाता है

इंपाउंडमेंट हाइड्रो पावर प्लांट पानी को एक बांध के पीछे एक जलाशय में जमा करते हैं, और बिजली उत्पन्न करने के लिए एक टरबाइन के माध्यम से पानी छोड़ते हैं। डायवर्जन हाइड्रो पावर प्लांट बिजली उत्पन्न करने के लिए टरबाइन के माध्यम से बहते पानी को चैनल करते हैं। पंप स्टोरेज हाइड्रो पावर प्लांट बिजली के माध्यम से निचले इलाकों में पानी को ऊपर बांध तक खींचते है और जब बिजली की मांग अधिक होती है, तो बिजली उत्पन्न करने के लिए टरबाइन के माध्यम से पानी को नीचे की ओर छोड़ा जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है।

भारत में हाइड्रोपावर के आकंड़े क्या कहते हैं

● हाइड्रो पावर उत्पादन में भारत दुनिया में पांचवे नंबर पर आता है।
● भारत में 25 मेगावाट या उससे कम क्षमता वाले हाइड्रो पावर प्लांट को छोटे हाइड्रो पावर प्लांट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
● देश में 92.5 प्रतिशत हाइड्रोपावर सरकारी कंपनियां उत्पन्न करती हैं।
● पहाड़ी राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड में देश की आधी हाइड्रो पावर उत्पन्न होती है।
● कोयना हाइड्रो पावर प्लांट भारत में सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्लांट है और इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 1960 मेगावाट है।
● 1898 और 1902 में दार्जिलिंग और शिवानासमुद्र में हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी स्टेशनों का निर्माण किया गया था। वे एशिया के सबसे पहले हाइड्रो पावर प्लांट्स में से एक थे, और भारत ने लंबे समय से हाइड्रोपावर जनरेशन में अहम भूमिका निभाई है।
● भारत भूटान को हाइड्रो पावर एक्सपोर्ट करता है।
● नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), छोटे हाइड्रो पावर प्लांट के लिए जिम्मेदार है, जो 25 मेगावाट या उससे कम की ऊर्जा उत्पादन करते हैं।
● हाइड्रो पावर प्लांट जो 25 मेगावाट से ज्यादा की बिजली उत्पन्न करते हैं, वे भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अंदर आते हैं।
● 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 145,320 मेगावॉट पनबिजली क्षमता की संभावना है, किंतु अब तक केवल लगभग 46,512 मेगावॉट का ही उत्पादन हो रहा है, जोकि भारत में कुल बिजली उत्पादन का 11.7 प्रतिशत के लगभग है।
● सरकार के आंकड़े यह बताते हैं कि देश में लगभग 200 से भी ज्यादा छोटे और बड़े हाइड्रोपावर प्लांट्स मौजूद हैं।

हाइड्रोपावर बनाम कोयले से उत्पन्न बिजली

अभी तक के आकंड़ों के मुताबिक देश में बिजली उत्पादन हेतु कोयले पर निर्भरता अधिक है। आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, 1947 में भारत में हाइड्रोपावर कुल बिजली उत्पादन का 53 प्रतिशत से ज्यादा थी। मगर 1960 के आखिर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी के चलते हाइड्रोपावर क्षमता और उत्पादन दोनों में गिरावट की शुरुआत हुई। साल 2022 में 46,850 मेगावॉट की पनबिजली क्षमता कुल बिजली क्षमता 409,161 मेगावॉट का लगभग 11.4 प्रतिशत थी।

हाइड्रोपावर, कोयले के मुकाबले एक स्वच्छ बिजली विकल्प है। दरअसल, कोयला एक जीवाश्म ईंधन है जो जलकर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ कर बिजली उत्पन्न करता है। इसलिए सरकार ने हाइड्रोपावर की क्षमता और उत्पादन दोनों को बढ़ाने की दिशा में काम करना शुरू किया है। पिछले कुछ सालों में हाइड्रोपावर क्षमता और उत्पादन बढ़ाने के लिये 162 नई पनबिजली परियोजनाओं के लिए शुरुआती व्यावहारिक रिपोर्ट (पीएफआर) तैयार की जा चुकी हैं। केंद्र सरकार ने भी 2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा आधारित स्रोतों से 500 गीगावॉट उत्पादन क्षमता हासिल करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है।

हाइड्रोपावर प्लांट से कुछ नुकसान

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    हाइड्रो पावर रिन्यूएबल एनर्जी का एक सोर्स है। यह वातावरण की रक्षा तो करता है लेकिन इसका एक नुकसान भी है। दरअसल, किसी भी बांध का निर्माण किसी नदी के प्राकृतिक रूप में परिवर्तन ला सकता है। जो एक तरीके से प्रकृति के साथ खिलवाड़ माना जाता है। इससे उस इलाके की जैव विविधता को भारी नुकसान होता है। हाइड्रोपावर का दूसरा बड़ा नुकसान यह है कि इसके प्लांट को बनाने की लागत बहुत ज्यादा है क्योंकि यह एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़े किये बिना तैयार नहीं किया जा सकता। हाइड्रोपावर प्लांट का एक बड़ा नुकसान यह भी है कि जब भी किसी बड़े बांध को बनाकर उस पर हाइड्रोपावर प्लांट बनता है, तब उसके आसपास के गांव डूब क्षेत्र में आने से आबादी का पलायन जरुरी हो जाता है।

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