Gujarat Day 2023: गुजरात दिवस पर जानिये राज्य के पहनावे, भोजन, त्योहारों और परम्पराओं के बारे में
प्राचीन काल में भगवान श्रीकृष्ण से लेकर आधुनिक दौर के महात्मा गांधी और सरदार पटेल सहित नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा गुजरात अपना 63वां स्थापना दिवस मना रहा है।

गुजरात के इतिहास और संस्कृति की समृद्ध परंपरा रही है। गौरतलब है कि वर्तमान गुजरात, महाराष्ट्र से अलग होकर 1 मई 1960 को अस्तित्व में आया। गुजरात नाम "गुर्जरत्रा" से आया है। 6वीं से 12वीं सदी में गुर्जर सम्राटों के दौर में इसे गुर्जरत्रा के नाम से जाना जाता था।
गुर्जरों द्वारा रक्षित भूमि को गुर्जरत्रा कहा गया है। प्राचीन महाकवि राजसेखर ने गुर्जर-प्रतिहार वंश का संबंध सूर्यवंश व रघुवंश से बताया है। गुजरात का इतिहास पाषाण युग और बाद की चोलकोथिक (ताम्र पाषाण युग) और कांस्ययुग जैसे सिन्धु घाटी सभ्यता में भी मिलता है।
वहीं, महाभारत के कालखंड में भगवान श्रीकृष्ण मथुरा से सौराष्ट्र के पश्चिमी तट पर जाकर बसे थे, जो द्वारिका यानि प्रवेशद्वार कहलाया।
संस्कृति और मेले
राज्य में पतंगबाजी और नवरात्रि के दौरान डांडिया उत्सव काफी लोकप्रिय हैं। यहां कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं जिनमें भाद्रपद्र (अगस्त-सितंबर) मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी, पंचमी और षष्ठी के दिन तरणेतरी गांव में भगवान शिव की स्तुति में तरणेतर मेला लगता है। भगवान कृष्ण और रुक्मणी विवाह के उपलक्ष्य में चैत्र (मार्च-अप्रैल) के शुक्ल पक्ष की नवमी को पोरबंदर के पास माधवपुर में माधवराय मेला लगता है। उत्तरी गुजरात के बानसकांठा जिले में मां अंबा को समर्पित अंबाजी मेला आयोजित किया जाता है। राज्य का सबसे बड़ा वार्षिक मेला द्वारका और डाकोर में भगवान कृष्ण के जन्मदिवस जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होता है। इसके अलावा गुजरात में मकर सक्रंति, नवरत्रि, डांगी दरबार, शामलाजी मेले तथा भावनाथ मेले का भी आयोजन किया जाता है।
गुजरात का पहनावा
गुजरात में गरबा उत्सव में पुरुष और महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनते हैं। गुजराती पुरुषों की पारंपरिक वेशभूषा है, चोरनो और केड़िया या केडियू। चोरनो यानी सूती पैंट जो धोती की तरह होती है, लेकिन कमर पर इलास्टिक बंधी होती है। केड़िया कहते हैं घेरदार कुर्ती को, जिस पर किया गया मिरर वर्क और एम्ब्रॉयडरी उसे आकर्षक बनाते हैं। गुजरात के पहनावे में हाथ से बुने हुए पटोला का एक अलग महत्व है। गुजरात के पाटन में पटोला कपड़ों पर काम होता है। यह एक रंगे हुए ताने-बाने की बुनाई का अद्भुत मिश्रण है। इन कपड़ों को बुनाई के बाद रंगा जाता है। पटोला कपड़ों की बुनाई करघों पर की जाती है। गुजरात की पटोला साड़ी पूरे विश्व में मशहूर है।
गुजरात का प्रसिद्द त्यौहार
नवरात्रि की वजह से भी गुजरात पूरे विश्व में प्रसिद्द है क्योकि नवरात्रि को यहां के लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं। नवरात्रि पर्व 9 दिनों का होता है और इन दिनों में हर गुजराती बड़े उत्साह के साथ इस पर्व को मनाता है। यहां का सबसे प्रसिद्द नृत्य गरबा और डांडिया है जिसे नवरात्रि में किया जाता है।
कला और हस्तशिल्प
गुजरात हस्तशिल्प की गूंजती परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। राज्य का हर हिस्सा असंख्य कला रूपों को समेटे हुए है जो जीवंत रंगों, दिलचस्प पैटर्न और जटिल कढ़ाई के अद्वितीय मिश्रण हैं। यह रंगीन टाई और डाई या उत्तम लकड़ी की प्राचीन वस्तुएं हों, गुजरात के हस्तशिल्प बहुमुखी और सौंदर्य की दृष्टि से आकर्षक हैं। पटोला, रबारी, मुतवा और सूफ कशीदाकारी के पैटर्न हैं जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। गुजरात की जनजातियाँ वारली, पिथौरा और रोगन जैसे चित्रों में योगदान करती हैं जिनमें एक निश्चित देहाती आकर्षण है।
सूरत में जरी का काम और काठी की कढ़ाई, कच्छ बांधनी या बंधेज के पैटर्न बेहद खूबसूरत होते हैं। रेशम की रानी, पटोला का उपयोग हाथ से बुनी साड़ियों के रूप में किया जाता है। जिसके पैटर्न सटीकता के साथ बनाए जाते हैं। पैचवर्क, मिरर वर्क और गुजरात के बीडवर्क बेजोड़ हैं।
गुजरात का खाना
भारत में हर राज्य का अपना ट्रेडमार्क मेनू है और गुजरात में कई विशिष्ट व्यंजन हैं जो हल्के मीठे होते हैं। कढ़ी भारत में एक आम व्यंजन है लेकिन गुजराती कढ़ी विशिष्ट है क्योंकि यह पारंपरिक व्यंजन सफेद रंग का और स्वाद में मीठा होता है। वहीं, कचौड़ियां अरहर से भरी हुई होती हैं जो इसे अलग और स्वास्थ्यवर्धक बनाती है।
गुजराती घरों के पसंदीदा व्यंजनों में से एक है सेव टमेटा नू शाक जो टमाटर और सेव से बनाया जाता है। इसमें सेव के थोड़े से क्रंच के साथ मीठे, तीखे और मसालेदार स्वाद का मिश्रण होता है। मोहनथाल एक नरम फज जैसी मिठाई है जो गुजरात की सिग्नेचर डिश है। एक स्वादिष्ट फास्ट फूड डिश, डाबेली आपके मुंह में पानी भर देगी। दूध पाक एक पारंपरिक गुजराती मिठाई है जो खीर के समान है लेकिन एक अलग स्वाद के साथ है।
गुजरात का एक समृद्ध इतिहास रहा है और अतीत के कुछ व्यंजनों की अद्भुत कहानियां हैं। ऐसा ही एक व्यंजन है पोषण से भरपूर घरी, इस व्यंजन का आविष्कार तात्या टोपे के रसोइयों ने स्वतंत्रता सेनानियों को एक ऐसे व्यंजन के साथ खिलाने के विचार से किया था जो उन्हें अतिरिक्त शक्ति प्रदान कर सके। हांडवो एक पारंपरिक नमकीन है जिसे चारकोल पर तैयार किया जाता है। इनके अलावा, गुजरात खाकरा, फाफड़ा, थेपला, ढोकला, खांडवी, मुठिया, घुगरा, गठिया के लिए प्रसिद्ध हैं, जोकि हमेशा से पसंदीदा व्यंजन रहे हैं।
पर्यटन स्थल
राज्य में द्वारका, सोमनाथ, पालीताना, पावागढ़, अंबाजी, भद्रेश्वर, शामलाजी, तरंगा, गिरनार जैसे धार्मिक स्थलों के अलावा महात्मा गांधी की जन्मभूमि पोरबंदर तथा पुरातत्व और वास्तुकला की दृष्टि से उल्लेखनीय पाटन, सिद्धपुर, घुरनली, दभाई, वड़नगर, मोधेरा, लोथल और अहमदाबाद जैसे स्थान मौजूद हैं। अहमदपुर मांडवी, चोरवाड़, और तीथल के सुंदर तट, सतपुड़ा पर्वतीय स्थल, गिर वनों में शेरों का अभयारण्य और कच्छ में जंगली गधों का अभयारण्य भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
इसके अलावा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है। इसकी ऊँचाई 182 मीटर है। सरदार पटेल की यह मूर्ति एकता की प्रतीक है। यह मूर्ति केवड़िया, गुजरात में स्थित है। वहीं, सापुतारा हिल स्टेशन गुजरात का एकमात्र हिल स्टेशन है। यह डांग जिले में स्थित है। साबरमती आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी ने की थी। उन्होंने अपने जीवन का लंबा समय यहां व्यतीत किया था। आज यह एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में मौजूद है। इसी प्रकार रानी की वाव का निर्माण रानी उदयमती द्वारा कराया गया था। यह वाव पाटण में स्थित है। लक्ष्मी विलास पैलेस प्रमुख पर्यटक स्थल है।












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