जानिए 'वाडी जनजाति' की 10 अनोखी बातें, जहां बच्चे भी हैं सांप के दोस्त
नई दिल्ली। भारत विभिन्न तरह की संस्कृति और सभ्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां अनेकों प्रकार की जाति- जनजातियां है, जिनकी अपनी अलग अलग पहचान है। इन्हीं में से एक है गुजरात में रहने वाली 'वाडी जनजाति' । 'वाडी' बंजारों की तरह जीवन बिताने वाली एक जनजाति है, जो गुजरात के दक्षिणी इलाकों में रहते हैं। इन्हें भारत का सबसे पुराना सपेरों की जाति माना जाता है।
अकसर सांप का नाम सुनते ही हमारे हाथ पांव कांपने लगते हैं। और हमें खतरे का आभास होने लगता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा की यहां महज दो साल के बच्चे भी सांपो को नियंत्रण में रखना जानते हैं। यहां सांपों के साथ खेलते बच्चे देखना एक आम नजारा है। लिहाजा, हम यहां आपको इसी खास जनजाति से जुड़ी कुछ रोमांचक बातें बताने जा रहे हैं।
तो फिर, बढ़ाइए स्लाइडर और देखिए हर स्लाइड में एक इस जनजाति से जुड़ी जानकारी।
धार्मिक परंपरा
सदियों पुराने इस परंपरा को ये बहुत पवित्र एवं धार्मिक मानते हैं। यहां लड़कों को सपेरा बनने और लड़कियों को सांपों की देखभाल करने की शिक्षा दी जाती है। जिनमें कोबरा जैसे सांप भी शामिल होते हैं।

दो साल के बच्चे भी हैं सांपों के दोस्त
यहां बच्चें खिलौनों और गुड़ियों के साथ खेलते नहीं दिखते। बल्कि यहां दो साल के छोटे बच्चों के हाथों में भी कोबरा जैसे सांप देखे जा सकते हैं।

दक्षिणी गुजरात है ठिकाना
'वादी' बंजारों की तरह जीवन बिताने वाली एक जनजाति है, जो गुजरात के दक्षिणी इलाकों में रहते हैं।

600 है जनसंख्या
इस जनजाति को भारत में सपेरों की सबसे पुरानी और असल जाति माना जाता है। फिलहाल, इनकी जनसंख्या सिर्फ 600 रह गई है।

अद्भुत है ये परंपरा
स्थानीय लोगों का मानना है कि ये जनजाति नागों के देवता से भी संवाद किया करते हैं। जिस वजह से ये इस अद्भुत परंपरा को जिंदा रखना चाहते हैं।

1000 साल पुराना रिश्ता है सांपो से
जहरीले से जहरीले सांपों से भी इनका काफी पुराना रिश्ता है। माना जाता हजारों वर्षों पहले से इनकी यह परंपरा चलती आ रही है। प्राचीन काल में ये राजा-महाराजाओं को यह करतब दि

10 सालों की होती है शिक्षा
वाडी जनजाति अपेन बच्चों को दो वर्ष की उम्र से ही सांपों से जुड़ी शिक्षा देने लगते हैं। इनका पूरा कार्यकाल दस सालों का होता है।

लड़कियां करती हैं सांपों की देखभाल
दस सालों की शिक्षा के बाद यहां लड़कों को सपेरा होने का दर्जा दिया जाता है। जबकि लड़कियों को सांपों की देखभाल करने की शिक्षा दी जाती है।

1991 से सांपो को रखना है गैर-कानूनी
1991 में भारत सरकार ने सांपो को रखना और उनका खेल दिखाने को गैर-कानूनी करार दिया था। लेकिन फिर भी वाडी जनजाति ने अपने इस परंपरा को जारी रखा है।

6 महीने से ज्यादा एक जगह पर नहीं ठिकते
कानूनन अपराध होने के कारण ये एक जगह पर 6 महीने से ज्यादा नहीं ठिकते हैं। लेकिन उनका मानना है कि वे सांपों की काफी देखभाल करते हैं और उन्हें अपने बच्चों की तरह मानते हैं।
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