कवि सम्मेलन के माइक पर रामदेव ‘धाँसू'

Baba Ramdev
पिछला भाग पढ़ने के लिये click करें Previous। माइक पर रामदेव ‘धाँसू' आते हैं और बोलते हैं -‘अब मैं आमंत्रित करना चाहूंगा अब तक कुशलतापूर्वक मंच का सञ्चालन कर रहे हास्य कवि विकट जी को। हालंकि वह सरकार का कुशल संचालन नहीं कर पाए। पर हमारा और विकटजी का लक्ष्य एक है -मैंने कपालभाती का आन्दोलन छेड़ रखा है और इन्होने लोकपालभाती का.मैं आसन सिखाता हूँ और ये अनशन सिखाते हैं। मुझसे देश के कई सारे बाबा रश्क करते हैं और इन से अनिल कपूर।

केजरीवाल कविता पढ़ने आते हैं -

केजरीवाल विकट -‘धन्यवाद धाँसू जी, जो आपने मुझे आमंत्रित किया वरना ये कांग्रेसी तो मुझे आमंत्रित करने के मूड में नहीं लग रहे थे। मैं दो पंक्तियाँ इनको समर्पित करता हूँ।

‘कांग्रेसी बड़े दगाबाज रे
कल मिले हमका भूल गए आज रे'

सारे बीजेपीवादी कवियों के खूब तालियाँ बजायीं। पर अगली पंक्ति में मोदी चंचल के समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

‘बीजेपी बड़ी दगाबाज रे,
‘आप' के कोढ़ में खाज रे,
हाय हाय......दगाबाज रे, हाय दगाबाज रे। अगला भाग पढ़ने के लिये click करें Next।

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