Janardhana Reddy: कौन है बेल्लारी का किंग जनार्दन रेड्डी, बीजेपी के लिए क्यों हैं जरूरी

Janardhana Reddy: कर्नाटक के बड़े खनन व्यापारी और कल्याण राज्य प्रगति पक्ष (केआरपीपी) के प्रमुख जी जनार्दन रेड्डी फिर से भाजपा में लौट आए हैं। जनार्दन रेड्डी के भाई सोमशेखर रेड्डी पहले से भाजपा में हैं।

बेल्लारी के किंग कहे जाने वाले रेड्डी बंधु कर्नाटक में भारी रसूख वाले नेता हैं, लेकिन उनके साथ कई विवाद भी जुड़े हुए हैं। जनार्दन रेड्डी पर लगभग 16,500 करोड़ रुपये के खनन घोटाले का आरोप लगा था। अवैध खनन मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्होंने तीन साल से अधिक समय जेल में बिताया। जनार्दन रेड्डी ने केआरपीपी का भाजपा पार्टी में विलय भी कर दिया है। उनकी पत्नी और राजनेता अरुणा लक्ष्मी भी भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। जानते हैं जनार्दन रेड्डी और उनके साथ जुड़े विवादों के बारे में।

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अमित शाह का आदेश

बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र इस समय कर्नाटक के बीजेपी अध्यक्ष हैं और उन्होंने ही रेड्डी को पार्टी में शामिल कराया। जनार्दन रेड्डी ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने मुझसे कहा कि पार्टी में आ जाओ और मैं आ गया। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी शर्त के एक कार्यकर्ता के रूप में भाजपा में शामिल हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि रेड्डी ने 2022 में 'कल्याण राज्य प्रगति पक्ष' की स्थापना की थी। 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में रेड्डी ने गंगावती निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। पिछले साल के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में, जनार्दन रेड्डी के भाई जी. करुणाकर रेड्डी और जी. सोमशेखर रेड्डी, दोनों भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े थे और दोनों को हार का सामना करना पड़ा था।

रेड्डी बंधुओं- जनार्दन रेड्डी, सोमशेखर रेड्डी और करुणाकर रेड्डी को एक समय भाजपा ने कर्नाटक और तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य दोनों में राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए तैयार किया था। जनार्दन रेड्डी ने 2008 में कर्नाटक में पहली बार भाजपा को सत्ता में लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्हें 2008 में बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बनी सरकार में पर्यटन और बुनियादी ढांचे का मंत्री और बेल्लारी जिले का प्रभारी मंत्री भी बनाया गया था। 2011 में अवैध खनन में शामिल होने के आरोप के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और बीजेपी ने उनसे दूरी बना ली थी। 2015 में जमानत पर रिहा होने के बाद जनार्दन रेड्डी ने तब बीजेपी से नाता तोड़ लिया था।

सुषमा स्वराज का समर्थन और बीजेपी में पकड़

रेड्डी बंधु पहली बार 1999 के लोकसभा चुनावों के दौरान सुर्खियों में आए थे जब पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बेल्लारी सीट से अपना नामांकन दाखिल किया और उनके खिलाफ बीजेपी की नेता सुषमा स्वराज इसी सीट से मैदान में उतरी थी। तब रेड्डी बंधुओं ने सुषमा स्वराज का खुलकर साथ दिया था। रेड्डी बंधुओं ने 2008 में भी कर्नाटक में बीजेपी की जीत और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

जी. जनार्दन रेड्डी के नाम से पहचाने जाने वाले कर्नाटक के इस राजनेता का करियर उतार चढ़ाव भरा रहा है। वह बीजेपी के साथ भी कभी हाँ तो कभी ना का संबंध रखते आए हैं। वर्तमान में रेड्डी उत्तरी कर्नाटक में कोप्पल, गंगावती, बेल्लारी, यादगीर, सिंधनूर और रायचूर क्षेत्रों में अच्छा खासा असर रखते हैं। इन क्षेत्रों में रेड्डी समुदाय की संख्या अच्छी खासी है। 2024 में बीजेपी को चुनाव जीतने और फिर से सत्ता हासिल करने में रेड्डी बंधु भी अपना योगदान करना चाहते हैं। जनार्दन रेड्डी ने बीजेपी में फिर से शामिल होते समय 24 मार्च को बस इतना ही कहा कि उनका उद्देश्य राजनीतिक शक्ति हासिल करना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करना है।

येदियुरप्पा और रेड्डी बंधुओं के संबंध

येदियुरप्पा और रेड्डी बंधुओं के बीच भी अच्छा संबंध रहा है। 2018 के विधान सभा चुनाव में भाजपा मंत्री रहे जनार्दन रेड्डी हालाँकि, अपने भाई सोमशेखर के लिए प्रचार नहीं कर सके क्योंकि उन्हें बेल्लारी में प्रवेश करने से सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया गया था। लेकिन जनार्दन रेड्डी ने कर्नाटक के अन्य हिस्सों में भाजपा के लिए खूब प्रचार किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी बेल्लारी क्षेत्र में प्रचार करने गए थे और उन्होंने सोमशेखर के साथ मंच भी साझा किया था। रेड्डी बंधुओं ने तब चुनावी तैयारियों के लिए फंड का सहयोग भी किया था। कहते हैं कि जनार्दन रेड्डी 1998 में एक बार आर्थिक तौर पर दिवालिया भी हो गए थे, लेकिन सत्ता के साथ उनकी नजदीकी ने फिर से उन्हें टॉप क्लास की श्रेणी में ला खड़ा किया। हालांकि कांग्रेस के शासन में ही उन्हें 2004 में आधिकारिक खनन लाइसेंस मिला था।

सीबीआई की जांच और जेल

केंद्र में यूपीए सरकार ने 2013 में केंद्रीय जांच ब्यूरो के जरिए बेल्लारी रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध खनन गतिविधियों की जांच शुरू करवाई और तब कर्नाटक में मंत्री रहे जी जनार्दन रेड्डी के स्वामित्व वाली ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी और बेल्लारी आयरन ओर कंपनी के कार्यालयों पर छापेमारी की गई।

सीबीआई ने रेड्डी की दो निजी फर्मों के खिलाफ अवैध खनन गतिविधियों से संबंधित मामले में मुकदमा दर्ज किया था। कहा गया कि दोनों कंपनियां अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन कर रही थीं। उन पर अनधिकृत खनन, चोरी, तस्करी और लौह अयस्क की बिक्री का मामला दर्ज किया गया।

इसके अलावा रेड्डी पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने और बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने का भी आरोप लगा। यह कदम बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि जिले में खनन में उनकी बड़ी हिस्सेदारी थी। जनार्दन रेड्डी ने सीबीआई की इस कारवाई पर यह बयान जारी किया कि सीबीआई जांच कर्नाटक में पहली भाजपा सरकार को अस्थिर करने की कांग्रेस की साजिश है।

नोटबंदी में 500 करोड़ की शादी

जी. जनार्दन रेड्डी अपनी बेटी की शादी की शादी के समय भी काफी चर्चा में आए, जब यह खबर आई कि उन्होंने नोटबंदी के समय अपनी बेटी की शादी पर 500 करोड़ से अधिक खर्च किए। वह 2016 की सबसे बड़ी, सबसे भव्य और सबसे महंगी शादी थी। उनकी इकलौती बेटी ब्राह्मणी का राजीव रेड्डी के साथ विवाह हुआ था। शादी 16 नवंबर 2026 को बेंगलुरु पैलेस ग्राउंड में हुई और पूरे समारोह स्थल को विजयनगर साम्राज्य की महान राजधानी हम्पी जैसा बनाया गया था। राजा कृष्णदेवराय के महल, लोटस महल, महानवमी डिब्बा और विजया विट्टला मंदिर सहित अन्य इमारतों की प्रतिकृतियां बनाई गई थीं।

बताते हैं कि केवल निमंत्रण कार्ड की कीमत ही 5 करोड़ रुपये से अधिक थी। इस शादी में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया गया था, और इसमें 50,000 मेहमानों को बुलाया गया था, जिनमें मशहूर हस्तियां और फिल्मी सितारे भी शामिल थे। शादी के लिए करीब 70 करोड़ रुपये की ज्वेलरी बनवाई गई थी।

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