Karnataka Leaders: कर्नाटक के इन नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती है राजनीति, सभी पर सरकार बनाने का जिम्मा
कर्नाटक चुनावों की सरगर्मी तेजी से बढ़ने लगी है। अब सभी दलों के स्थानीय नेताओं पर अपने दल को इन चुनावों में जीत दिलाने का पूरा दारोमदार है।

Karnataka Leaders: कर्नाटक में विधानसभा की 224 सीटों पर एक चरण में चुनाव होगा। 10 मई को मतदान और 13 मई को मतगणना होगी। राज्य में 5.21 करोड़ मतदाता अपनी सरकार चुनेंगे। कर्नाटक में भाजपा, कांग्रेस और जद (एस) प्रमुख दल हैं। सीपीआई, सीपीआई (एम) और एमईएस भी है, लेकिन अधिक सक्रिय नहीं है। प्रदेश की राजनीति में कुछ प्रतिष्ठित राजनेता हैं, जिन्होंने अब अपनी विरासत अपनी अगली पीढ़ी को सौंप दी है तो कुछ आज भी मैदान में हैं। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में 10 राजनेता हैं जिनके इर्द-गिर्द राजनीतिक चौसर जमती है। यहीं से सरकार के गठन का रास्ता भी खुलता है।
बी. एस. येदियुरप्पा
बी. एस. येदियुरप्पा कर्नाटक में सबसे प्रभावशाली नेता हैं। इन्होंने राज्य के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में 30 मई 2008 में शपथ ग्रहण की थी। येदियुरप्पा कर्नाटक की शिकारीपुरा विधानसभा से भाजपा के विधायक रहे हैं। उन्होंने 2014 में शिमोगा से बड़ी अंतर से जीत हासिल की थी। कर्नाटक के सबसे प्रभावशाली लिंगायत समुदाय पर वह विशेष प्रभाव व पकड़ रखते हैं।
भाजपा में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद दिया गया लेकिन राज्य की राजनीति में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हे राज्य का अध्यक्ष बना दिया गया। 2008 में जीत के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। 2007 में जद (एस) के साथ गठबंधन टूटने से पहले भी थोड़े समय के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। वह किसी भी दक्षिण भारतीय राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगे लेकिन हाल ही में उनको क्लीनचीट मिल गई। बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा अपने बेटे विजयेंद्र को राजनीति में आगे ला रहे हैं।
बसवराज बोम्मई
भारतीय जनता पार्टी ने येदुरप्पा के प्रभाव को कम करने के लिए बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया। उन्होंने दो साल तक कुशलता से सरकार का संचालन किया लेकिन जमीनी स्तर पर पकड़ नहीं बना पाए। बोम्मई अपनी पारंपरिक शिगगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।
जगदीश शेट्टार
कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है क्योंकि पार्टी के इस दिग्गज नेता ने कांग्रेस पार्टी से हाथ मिला लिया है। दरअसल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने कहा, ''वरिष्ठ नेता होने के नाते मुझे लगा था कि टिकट नहीं मिलेगा, लेकिन जब पता चला कि टिकट नहीं मिल रहा है तो मैं चौंक गया। उन्होंने कहा, "11 अप्रैल को पार्टी प्रभारी ने कहा कि मुझे टिकट नहीं दिया गया है। उन्होंने मुझसे ऐसे बात की जैसे किसी बच्चे से बात की हो। मुझे क्या करना चाहिए? मुझे सुबह फोन आया और मुझसे ऐसे बात की गई जैसे मैं पहली बार विधायक हूं या आकांक्षी। मैं आहत हूं। शेट्टार ने कहा, मेरे साथ बुरा व्यवहार किया गया।
डी. के. शिवकुमार
वर्तमान में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति (KPCC) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। वह एच.डी. कुमार स्वामी सरकार की कैबिनेट में सिंचाई राज्य मंत्री थे। पहले उन्होंने सिद्धारमैया सरकार में ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्य किया। पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में इन पर कई बार कार्यवाही हुई। जिसमें 2 अगस्त 2017 को आयकर विभाग का छापा पड़ा। शिवकुमार के दिल्ली निवास से 8 करोड़ रुपए और अन्य स्थानों से 2 करोड़ रुपए जब्त किए गये। इसी प्रकार 2015 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अवैध खनन के मामले में शिवकुमार और उनके परिवार के सदस्यों को नोटिस जारी किया।
वहीं शांति नगर हाउसिंग सोसायटी मामले में मिलीभगत का आरोप लगा तो प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग के मामले में शिवकुमार से 9 दिन तक पूछताछ की थी। ईडी के अधिकारियों ने शिवकुमार से पूछताछ में असहयोग करने का आरोप लगाते हुए अदालत से उन्हें अपनी हिरासत में देने का अनुरोध किया। जिस पर शिवकमार को 3 सितंबर 2019 गिरफ्तार कर लिया गया और ईडी कार्यालय से तिहाड़ जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
सिद्धारमैया
कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री रहे। इससे पहले वह जनता दल (धर्मनिरपेक्ष) के सदस्य के तौर पर दो बार कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। मई 2013 को वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने और 17 मई 2018 तक इस पोस्ट पर रहे। कांग्रेस में शामिल होने से पहले सिद्धारमैया ने सालों तक एचडी देवेगौड़ा के साथ निष्ठापूर्ण तरीके से काम किया। ऐसे में माना जा रहा था कि पार्टी का अगला मुखिया सिद्धारमैया को ही बनाया जाएगा। लेकिन जब पार्टी की कमान सौंपने की बात आई, तब देवेगौड़ा ने पार्टी के वफादार सिद्धारमैया की जगह अपने बेटे कुमारस्वामी को चुना। वर्तमान में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को वरुणा से टिकट दिया है। बीजेपी ने सिद्धारमैया के मुकाबले में वी. सोमन्ना को टिकट दिया है।
एच.डी. कुमार स्वामी
एच.डी. कुमारस्वामी पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के तीसरे बेटे है। वह दो बार कर्नाटक के सीएम रहे। अनिता कुमारस्वामी उनकी पत्नी हैं। अनिता अभी रामनगर सीट से विधायक हैं। इन दोनों का एक बेटा है जिसका नाम एच के निखिल गौड़ा है। निखिल फिल्म एक्टर हैं। पूर्व सीएम और जनता दल सेकुलर के नेता एच.डी. कुमारस्वामी के खिलाफ बीजेपी ने चन्नापटना से पूर्व मंत्री सीपी योगेश्वर को टिकट दिया है।
प्रियांक खड़गे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक इस बार चितापुर सीट से चुनाव मैदान में हैं। वहीं बीजेपी ने उनके खिलाफ इस सीट से मणिकांता राठौर को टिकट दिया है। उन्होंने 2008 के विधानसभा चुनाव में चितापुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया, लेकिन एक छोटे अंतर से पराजित हुए। उन्होंने 2013 विधानसभा चुनाव में वापसी की और सिद्धरमैया सरकार के तहत 2016 में सूचना विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी मंत्रालय को संभाला। तब वह कैबिनेट में शामिल हुए थे, तो वह कैबिनेट में शपथ लेने वाले सबसे कम उम्र के मंत्री थे। 2018 में उनको एचडी कुमारस्वामी गठबंधन सरकार में सामाजिक कल्याण और पिछड़ा वर्ग मंत्रालय दिया गया।
जी. परमेश्वर
कांग्रेस ने पूर्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर को कोरातागेरे (एससी) सीट से टिकट दिया है। वह कर्नाटक में कांग्रेस के दलित चेहरे के रुप में जाने जाते हैं और चार बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं। बीजेपी ने उनके खिलाफ अनिल कुमार (रिटायर IAS) को उतारा है।
यू.टी. खादर
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यू.टी. खादर चार बार के कांग्रेस विधायक हैं। उनकी दक्षिण कन्नड़ में अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी ने मंगलुरु से उनके खिलाफ सतीश कुमापला को मैदान में उतारा है। खादर कर्नाटक विधानसभा के उप विपक्षी नेता के रूप में कार्यरत हैं।












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