Jayalalithaa’s death anniversary: फिल्मों की शार्ट स्कर्ट से राजनीति की द्रोपदी बनने तक.. हर जगह सुपरहिट.. जयललिता
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चेन्नई। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की आज पहली पुण्यतिथि है। भले ही वो आज लोगों के बीच ना मौजूद हों लेकिन बहुत से लोगों के दिलों में आज भी वो जिंदा हैं। जयललिता को उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर याद करने बहुत हजारों की संख्या में लोग चिन्नई में बने जया मेमोरियल पर इक्कठा हुए। तमिलनाडु में 'अम्मा' के नाम से प्रचलित जयललिता का नाम देश के उन लोगों में शामिल था जिन्होंने अपने संघर्ष के बल पर हर चीज हासिल की थी। चाहे वो उनकी तालिम हो, फिल्मी सफर हो या फिर तमिलनाडु की सत्ता। परंपराओं और उसूलों को तोड़कर अपने दम पर रास्ता बनाने वाली जयललिता राजनीति कैनवस में चमकने से पहले फिल्मी कैनवस की मल्लिका थीं। बेहद ही ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में पहचान बनाने वाली जयललिता दक्षिण भारत की पहली हिरोइन थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर फिल्मों में काम किया था।

पहली हिरोइन थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर फिल्मों में काम किया
बेहद ही ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में पहचान बनाने वाली जयललिता दक्षिण भारत की पहली हिरोइन थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर फिल्मों में काम किया था। उनके खूबसूरत अदायगी और मदमस्त काया की खबर दूसरे राज्यों में पहुंची और जयललिता देखते-देखते ही तमिल के अलावा तेलुगू, कन्नड और हिंदी फिल्मों की पॉपलुर हस्ती बन गईं। 1965 से 1972 के दौरान उन्होंने ज्यादातर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ की थीं जिसमें वो साड़ी में कम स्कर्ट में ज्यादा नजर आती थीं।

1984 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा
जयललिता ने जहां अपने फिल्मी करियर में सबसे ज्यादा फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ कीं वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपना राजनैतिक करियर भी एमजी रामचंद्रन के साथ शुरू किया। और साल 1984 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा था और उसके बाद कभी भी उन्होंने जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन जब वो राजनीति में आईं तो उनका दूसरा रूप दुनिया के सामने आया, वो एक खूबसूरत अभिनेत्री के सांचे से बाहर निकल चुकी थीं और उनकी छवि एक जुझारू महिला की बन चुकी थी, जिसने अपने हक के लिए कोई समझौता नहीं किया बल्कि विरोधियों को धूल चटाया।

1984 से 1989
जयललिता 1984 से 1989 के दौरान तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया।वर्ष 1987 में रामचंद्रन का निधन के बाद उन्होने खुद को रामचंद्रन की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। हालांकि इस बात का काफी विरोध हुआ था लेकिन राज्य और राजनीति के चलते पार्टी के लोगों को उनकी बात माननी पड़ी।

डीएमके के सदस्य ने की बदसलूकी
बात 1989 की है, जब विपक्ष की नेता जयललिता ने स्पीकर से कहा कि मुख्यमंत्री करूणानिधि के उकसाने पर पुलिस ने उनके फोन को टैप किया है इसलिए इस पर बहस होनी चाहिए लेकिन उस दिन बजट पेश होना था इसलिए स्पीकर ने कहा कि वे इस मुद्दे पर बहस की अनुमति नहीं दे सकते क्योंकि बजट पेश किया जा रहा है लेकिन एआईडीएमके के नेता इस बात पर गुस्सा हो गए और स्पीकर के सामने हल्ला मचाने लग गए। बजट भाषण फाड़ दिया गया और हंगामा मच गया, जिसे देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया लेकिन इसके बाद जैसे ही जयललिता सदन से निकलने के लिए तैयार हुईं, डीएमके के एक सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की, उसने उनकी साड़ी इस तरह से खींची कि उनका पल्लू गिर गया।

एआईडीएमके के नेताओं ने काफी पीटा
जयललिता सबके सामने ज़मीन पर गिर पड़ीं और उसके बाद उन्होंने कसम खाई कि वो यहां तभी कदम रखेंगी जब वो महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगा। जयललिता के साथ ये शर्मनाक हरकत करने वालों को एआईडीएमके के नेताओं ने काफी पीटा था और इसके बाद जयललिता सीएम बनकर ही विधानसभा भवन पहुंची थीं।

राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री
जयललिता 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री बनीं और वो जयललिता से लोगों के लिए अम्मा बन गईं।अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं, जयललिता की यह जीत उनके धुर विरोधी एम करूणानिधि के मुंह पर तमाचा था। वर्ष 1972 में तमिलनाडु सरकार द्वारा जयललिता को कलईममानी अवॉर्ड दिया गया। वर्ष 1991 में मद्रास यूनिवर्सिटी द्वारा जयललिता को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। राजनीति और फिल्मों में अभिनय करने के अलावा जयललिता को कूकिंग, लिखने, तैराकी, घुड़सवारी का भी शौक था। जयललिता द्वारा अंग्रेजी और तमिल भाषा में लिखे गए कई लेख और उपन्यास अब तक प्रकाशित हो चुके हैं।












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