Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Israel and Hamas: इजरायल और हमास पर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में संग्राम

Israel and Hamas: इजरायल और हमास के बीच चल रहा युद्ध घातक होता जा रहा है। अभी तक यह लग रहा था कि दुनिया दो हिस्सों में बंट गई है। कुछ देश इजरायल के समर्थन में हैं, जिसमें भारत और अमेरिका भी शामिल है तो दूसरी तरह कुछ अन्य देश हमास के समर्थन में है, जिसमें इरान, लेबनान आदि शामिल हैं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि किसी भी देश का अपना स्टैंड चाहे जो हो, लेकिन देश के अंदर ही आम नागरिक, यहां तक कि बुद्धिजीवी वर्ग भी कई हिस्सों में बंटा हुआ है। अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय समेत कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में काफी संख्या में छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स की हमास के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं आपस में बंटे छात्रों और फैकल्टी से जुड़े लोग ही विरोध का हिंसक रास्ता न अपना लें।

अमेरिकन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में टकराव

अमेरिका के कई बड़े विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एक नई बहस छिड़ गई है। सात अक्टूबर की सुबह इजरायल पर हमास के हमले के तुरंत बाद कोलंबिया विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने एकाउंट से एक के बाद एक कई पोस्ट करके इजरायल के खिलाफ कमेंट किये। उन्होंने हमास का समर्थन करते हुए कहा कि हमला प्रतिरोध का नतीजा है। उन्होंने फिलिस्तीन और हमास के प्रति हमदर्दी जताते हुए छात्रों और सहयोगी प्रोफेसरों से समर्थन में आगे आने को कहा। यह जानते हुए भी कि अमेरिका इस संघर्ष में इजरायल के साथ है, उन्होंने अपने विरोधी बयानों को 'बोलने की आजादी' का नाम दिया।

Israel Hamas war Battle in American universities over Israel and Hamas

इन पोस्ट के वायरल होने पर कई छात्र संगठनों से जुड़े विद्यार्थियों ने भी इस पर अलग-अलग कमेंट किये। कुछ विद्यार्थी समर्थन में थे तो कुछ इसके विरोध में थे। विरोधी विद्यार्थियों ने प्रोफेसर को कालेज से निकाले जाने के लिए मुहिम छेड़ दी। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में छात्रों से कहा जा रहा है कि वे अपना एक पक्ष चुन लें। या तो इजरायल के समर्थन में बोलें या फिर हमास के समर्थन में अपनी बात रखें। यानी विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच ही खुलेआम टकराव की नौबत पैदा की जा रही है।

ज़रीना ग्रेवाल के पोस्ट पर मचा बवाल

येल विश्वविद्यालय में 'अमेरिकी अध्ययन, जातीयता, नस्ल, प्रवासन और धार्मिक अध्ययन' की प्रोफेसर ज़रीना ग्रेवाल के पोस्ट पर छात्रों में जबर्दस्त गुस्सा दिखा। ग्रेवाल ने एक्स पर अपने एक के बाद एक सीरीज पोस्ट में फिलिस्तीनी 'प्रतिरोध' की प्रशंसा की। उन्होंने साथी प्रोफेसरों और छात्रों से फ़िलिस्तीनियों के लिए प्रार्थना करने की अपील की। पोस्ट में उन्होंने इज़रायल को 'हत्यारा', 'नरसंहारकारी' और 'अवैध रूप से फिलिस्तीन पर कब्जा करने वाला' देश कहा। जरीना ग्रेवाल ने अपने प्रोफाइल में खुद को 'कट्टरपंथी मुस्लिम' बताया। उन्होंने लिखा, 'फ़िलिस्तीनियों को सशस्त्र संघर्ष, एकजुटता के माध्यम से विरोध करने का पूरा अधिकार है।' यह भी कहा कि 'पृथ्वी पर कोई भी सरकार इस औपनिवेशिक राज्य के समान नरसंहारक नहीं है।'

इंटरनेट पर विरोध में 50,000 से अधिक का मिला साथ

उनका यह पोस्ट इतना वायरल हुआ कि उन्हें भी ऐसा अंदेशा नहीं था। लिहाजा विरोध बढ़ने पर एक्स पर उन्होंने अपने एकाउंट को ही लॉक कर दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उनके पोस्ट ने अपना काम कर दिया था। छात्रों के एक वर्ग का गुस्सा इस कदर तेज हो गया था कि विश्वविद्यालय के अंदर ही युद्ध की स्थिति बन गई। येल विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन थर्ड ईयर के एक छात्र ने सुश्री ग्रेवाल को तुरंत बर्खास्त करने की मांग करने वाली एक ऑनलाइन याचिका डाल दी। इसके डालने के 13 घंटों के भीतर ही 10,000 से अधिक विद्यार्थियों का समर्थन मिल गया। 17 अक्टूबर तक 50,000 से अधिक छात्रों और प्रोफेसरों ने इस पर ऑनलाइन हस्ताक्षर किए हैं।

छात्र ने लिखा- बोलने की आजादी का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं

ऑनलाइन याचिका करने वाले छात्र ने कहा, "बोलने की आजादी का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। जिसके पास अधिकार और शक्ति होती है, उसे अपनी बात के लिए जिम्मेदारी लेनी होगी।" छात्र ने कहा, "ऐसा बयान जिससे हिंसा, हत्या या आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है, या जो इसकी वकालत करता है या समर्थन करता है, उसे कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।"

सुश्री ग्रेवाल ने बिना कोई जवाब दिये अपना एक्स अकाउंट लॉक कर दिया। येल विश्वविद्यालय ने उनके बोलने की आजादी के अधिकार का बचाव तो किया, लेकिन छात्रों के विरोध को भी गलत नहीं बताया। आइवी लीग स्कूल (Ivy League School) की प्रवक्ता करेन पीयर्ट (Karen Peart) ने बताया, "सुश्री येल बोलने की आजादी के अधिकार के लिए प्रतिबद्ध है। उनके निजी एकाउंट पर कही गईं बातें उनके अपने विचार हैं।"

बोलने की आजादी पर ही उठे सवाल

दूसरी तरफ येल विश्वविद्यालय में ही अंग्रेजी के प्रोफेसर लेस्ली ब्रिसमैन (Leslie Brisman) ने कहा कि छात्रों की सुश्री ग्रेवाल को बर्खास्त करने को लेकर ऑनलाइन याचिका उतना ही दुखदायी है जितना हमास के समर्थन में सुश्री ग्रेवाल का पोस्ट है। उन्होंने कहा कि वह कैसा समाज होगा, जहां पर सिर्फ एक पक्ष को ही बोलने की आजादी हो। उनका मानना था कि ज़रीना ग्रेवाल ने अपनी बात रखी है और छात्रों को भी अपनी बात रखने की आजादी थी, लेकिन यहां बोलने की आजादी पर ही सवाल उठने लगे हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+