Civil Services Day- यूपी-बिहार के हर घर में पलता है आईएएस बनने का सपना
लखनऊ। देश में आज भी सिविल सेवा को सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित नौकरी के तौर पर जाना जाता है जिसे पास करना हर युवा का सपना होता है। लेकिन बदलते परिवेश में जिस तरह से सिविल सेवा की परीक्षा के प्रारूप में बदलाव आय़ा है उसने अभ्यर्थियों की राह को थोड़ा कठिन जरूर कर दिया है।

महज 21 वर्ष की आयु में आईआईटी कानपुर से बीटेक की डिग्री हासिल करना और 22 वर्ष की आयु में बतौर आईआरएस के रूप में चयन के बाद अगले ही प्रयास में 23 वर्ष की आयु में आईपीएस के रुप में चुने जाने वाले उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित और बहुचर्चित आईपीएएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर सिविल सेवा में खुद के आने के पीछे की बहुत ही सरल वजह बताते हैं। वह कहते हैं कि यूपी-बिहार के तकरीबन हर घर में सिविल सेवा का अधिकारी बनने का सपना पलता है और उसी सपने का एक हिस्सा मैं भी था।
यूपी-बिहार के हर घर में पलता है आईएएस बनने का सपना
अमिताभ ठाकुर ने सिविल सेवा में महज 23 वर्ष की आयु प्रवेश किया और 24 वर्ष की नौकरी में कई उतार चढ़ाव देखें। बहुत ही कम लोगों को इस बात का पता होगा कि अमिताभ ठाकुर का अभी 13 वर्ष का कार्यकाल बाकी है। आइये जानते हैं कि किस तरह से उन्होंने महज 23 वर्ष की आय़ु में इस मुकाम को हासिल किया।
सिविल सेवा में आपका चयन किस वर्ष हुआ था?
मेरा चयन वर्ष 1992 में हुआ था।
इन 24 वर्षों में सिविल सेवा की परीक्षा के प्रारूप में क्या बदलाव आया है?
सिविल सेवा के अभ्यर्थियों की बात करें तो अब ज्यादा दिक्कत है, अब सामान्य ज्ञान पर ज्याद फोकस हो गया है। सीसैट के पेपर ने नये आयाम ला दिये हैं। छह पेपर सामान्य ज्ञान होने की वजह से आस पास की चीजों से अवेयर रहने की जरूरत है। हर क्षेत्र की की जानकारी जरूरी है, अब दो विषयों से अधिक की जानकारी बढ़ गयी है। मैं पहले की तुलना में इस प्रारुप को बेहतर मानता हूं।
सीसैट को आप किस तरह से देखते हैं, क्या इसने अन्य परीक्षाओं के लिए परीक्षार्थियों की राह खोली है?
निश्तित रूप से सीसैट के आने से जो परीक्षार्थी सिविल सेवा में नहीं आ पा रहे हैं वो अन्य परिक्षाओं के लिए अनुपयुक्त नहीं होते हैं, उनके लिए और रास्ते भी खुले रहते हैं, जब मैं प्रतियोगी था तब 4 प्रयास थे लेकिन अब 6 होने की वजह से परीक्षार्थी जूझते रहते हैं, जोकि मेरे विचार से गलत।
आप सिविल सेवा में क्यूं आये?
मेरे समय में लोगों के दिमाग में भर दिया जाता था कि सिविल सेवा में ही जाना है, बचपन में ही मेरे दिमाग में यह था कि यह प्रतिष्ठित सेवा। यूपी-बिहार में यह बहुत ही सामान्य सी बात है कि हर घर में लोग अपने बच्चे को सिविल सेवा में लाना चाहते हैं।
उस वक्त श्रीपीएन राय के दो लड़के आईएएस में आये थे जिन्हें हमारे घर में उदाहरण के तौर पर अक्सर पेश किया जाता था। मेरे घरवालों का मानना था यह श्रेष्ठतम सेवा है इससे उनका सम्मान बढ़ेगा। मेरा भी यह मानना था कि इस सेवा में मै देश और समाज की ज्यादा सेवा कर सकता है।
आपके विषय क्या थें?
मेरे विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग और गणित थे।
आपने किस तरह से सिविल सेवा की तैयारी की?
मैंने 21 वर्ष की आयु में आईआईटी कानपुर से बीटेक किया, हालांकि बीटेक को मैं अपनी एक गलती मानता हूं कि मैं इस डिग्री का इस्तेमाल नहीं कर सका। ऐसे में अगर आने वाले समय में सरकार यह प्रतिबंध लगाती है कि इंजीनियरिंग के छात्र सिविल सेवा में नहीं आ सकते हैं तो यह कतई गलत नहीं होगा।
मेरे विचार से इजीनियरिंग और मेडिकल विषयों के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं होती है, मैंने खुद से ही पूरी तैयारी की थी, मेरे दोनों विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग और गणित थे। मैंने अपनी तैयारी 1990 में ही शुरु कर दी थी। पहले प्रयास में मेरा सेलेक्शन आईआरएस में हुआ जबकि दूसरे प्रयास में मेरा चयन आईपीएस में हो गया था। मैंने अपनी तैयारी के लिए सिविल सर्विस क्रॉनिकल, स्पेक्ट्रम जैसी मैग्जीन का इस्तेमाल किया था। जबकि इंटरव्यू के लिए मैंने राउ पत्रिका का सहारा लिया था।
आपका साक्षात्कार कैसा रहा था और आपसे क्या सवाल पूछे गये?
मेरी अंग्रेजी भाषा शुरु से कमजोर थी जिसके चलते इंटरव्यू में मेरे नंबर कम आये थे। मुझे 250 में से सिर्फ 93 नंबर मिले थे। इंटरव्यू पैनल में स्वर्गीय सुरेंद्र नाथ जी जो कि पंजाब के पूर्व गवर्नर थे ने एक सवाल पूछा था कि एफ्रोडीजिया क्या होता है और इसका जवाब मुझे नहीं पता था।
सुरेंद्र नाथ जी ने खुद इस सवाल का जवाब देते हुए बताया कि यह वह होता है जो व्यक्ति में सेक्स पॉवर बढ़ाने में प्रयोग होता है। मैंने पहली बार यह शब्द सुना था। उन्होंने बताया कि यह गेंडे की सींग में यह पाया जाता है, इसीलिए उसके सींग के लिए गेंडे का शिकार किया जाता है।
24 साल की नौकरी का अनुभव कैसा रहा?
24 साल की नौकरी के दौरान मैं दावा कर सकता हूं कि इससे बेहतर कोई नौकरी नही है, आप चयन के बाद निर्णयकर्ता की स्थिति में आ जाते हैं। मेरी पहली पोस्टिंग बतौर सहायक पुलिस अधीक्षक गोरखपुर में हुई थी, और मुझे अपनी जिम्मेदारी का पूरा एहसास था, जिसे मैं हर हाल में गंभीरता से निभाने का प्रयास करता था। अपने कार्यकाल के दौरान मैं दस जिलों में एएसपी रहा। जिसमें मुरादाबाद, पिथौरागढ़, ललितपुर, देवरियां, बलिया, महाराजगंज, गोंडा, फिरोजाबाद मुख्य हैं। इससे अलावा मैं सीबीसीआईडी के पद पर भी रहा और आईजी के तौर पर मैं हाल ही में तैनात था।
अभ्यर्थियों को किस वक्त सिविल सेवा की तैयारी शुरु कर देनी चाहिए?
मेरा व्यक्तिगत मत यह है कि उसे ग्रैजुएशन से ही शुरु कर देनी चाहिए। तीन से चार अटैंप्ट के बाद खुद का आंकलन करके इसका प्रयास करना छोड़ देना देना चाहिए। अगर आप तीन प्रयास के बाद भी मुख्य परीक्षा में नहीं पहुंच रहे हैं तो आपको खुद का आंकलन करना चाहिए।
सिविल सेवा अधिकारियों में किस बदलाव की जरूरत है?
सबसे पहले सिविल सेवा के अधिकारियो को खुद को भगवान और सबसे ताकतवर मानने के खयाल से बाहर आना चाहिए। लोगों को नौकर बनाने की भावना से बाहर आना चाहिए, हर बात को मौखिक या लिखित रूप से रिकॉर्ड पर लाना चाहिए। नेताओं के निर्देश को मौखिक या लिपिबद्ध तरीके से लोगों के सामने लाना चाहिए बेहद आवश्यक है।
आपके कार्यकाल का का सबसे अच्छा अनुभव?
सहाबुद्दीन के लोगों ने एक बच्चे का अपहरण कर लिया था, उसे बिहार से हम लोग लेकर आये थे। उस दौरान जब मैं उस बच्चे को लेकर वापस आ रहा था तो पूरे दस किलोमीटर तक लोग फूल माला से मेरा स्वागत कर रहे थे। यह अनुभव अपने आप में बेहतरीन अनुभूति थी।












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