Indian Avation: विमानन क्षेत्र में भारत की प्रगति, एक साल में होगा दुनिया में तीसरे स्थान पर

भारत 2024 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन जायेगा। तब सालाना 14 करोड़ भारतीय हवाई यात्रा करने लगेंगे।

Indian Avation

भारतीय विमानन उद्योग सबसे तेजी से बढ़ने वाले उद्योगों में से एक है। स्टेटिस्टा के आंकड़ों के अनुसार भारत में हवाई यात्रा करने वाले कुल यात्रियों की संख्या में 2010 से 2019 के बीच 163.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यानी हर वर्ष लगभग 16 प्रतिशत से भी ज्यादा। हालांकि, जब साल 2020 में कोरोना महामारी आई तब इस संख्या में गिरावट दर्ज की गई थी। जो वार्षिक बढ़ोतरी पहले लगभग 16 प्रतिशत थी वह उस दौरान मात्र 2.7 प्रतिशत के आसपास रह गयी थी।

फिर भी, फिलहाल भारत 9वां सबसे बड़ा विमानन बाजार है, जो सालाना 121 मिलियन घरेलू और 41 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को संभालता है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (आईबीईएफ) के अनुसार भारत के 2024 तक यात्रियों के मामले में तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने की उम्मीद है।

कितना बड़ा है भारत का विमानन उद्योग

भारतीय विमानन उद्योग देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले उद्योगों में से एक बन गया है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भारत सरकार के अनुसार, वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र ने 2021 में भारत की जीडीपी में $30 बिलियन का योगदान दिया। वित्तीय वर्ष 2020 में भारतीय एयरलाइन बाजार का मूल्य लगभग $20 बिलियन था। आईबीईएफ के अनुसार, अगले चार वर्षों में भारतीय विमानन उद्योग में ₹35,000 करोड़ का निवेश होने की उम्मीद है। वहीं वर्ष 2026 तक भारतीय ड्रोन उद्योग का भी कुल कारोबार $1.8 बिलियन तक होने की उम्मीद है।

भारतीय विमानन उद्योग देता है कितना रोजगार?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, भारत में विमानन और वैमानिकी विनिर्माण क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 250,000 कर्मचारी काम कर रहे है। मंत्रालय के मुताबिक 2024 तक इस संख्या के 350,000 तक बढ़ने की उम्मीद है। आईबीईएफ के मुताबिक भारतीय विमानन उद्योग ने कुल चार मिलियन नौकरियां पैदा की हैं। भारत में लगभग सभी एयरलाइन अपने विमानों की फ्लीट को बढ़ा रही हैं, जिसके कारण अगले 18 से 30 महीनों में इस उद्योग में लाखों नयी नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही अगले पांच वर्षों में 10,000 और पायलटों की आवश्यकता होगी।

किस कंपनी का कितना शेयर

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में घरेलू विमानन क्षेत्र में इंडिगो का कुल मार्केट शेयर 56.1 प्रतिशत था। इस नाते यह भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी है। वहीं विस्तारा का 9.2 प्रतिशत, गो फर्स्ट का 8.8 प्रतिशत, एयर इंडिया और स्पाइस जेट का 8.7 प्रतिशत, एयर एशिया का 6.2 प्रतिशत और अन्य कंपनियों का मार्केट शेयर 2.3 प्रतिशत था।

भारतीय विमान कंपनिया भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अपना मार्केट शेयर बढ़ा रही हैं। गौरतलब है कि 2022 के आखिरी तीन महीनों में विस्तारा का मार्केट शेयर अंतरराष्ट्रीय बाजार में 0.6 प्रतिशत से बढ़कर 2.6 प्रतिशत हो गया। जबकि गो फर्स्ट का मार्केट शेयर 2 प्रतिशत से बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गया।

भारतीय विमानन उद्योग में नयी कंपनियां

अकासा एयर भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नयी एयरलाइन है जिसकी स्थापना दिसंबर 2021 में राकेश झुनझुनवाला, विनय दुबे और आदित्य घोष द्वारा की गई थी। एयरलाइन ने अगस्त 2022 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए अपनी पहली उड़ान भरी थी। अकासा एयर के पास अभी लगभग 20 विमान है और उनका लक्ष्य 12-14 सालाना विमान जोड़ना है।

दूसरी ओर, जेट एयरवेज भी कमबैक करने के लिए तैयार हो चुका है। कुछ सालों पहले इसे अपने ऑपरेशंस कर्ज चुकाने में कठिनाई के कारण रोकने पड़े थे। फिलहाल जेट एयरवेज को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की योजना के अनुसार इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत पुनर्जीवित किया जा रहा है।

भारतीय विमानन उद्योग में विमानों की भारी खरीद

भारतीय विमानन कंपनियां देश में विमान यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नए विमानों का ऑर्डर दे रही हैं। एयर इंडिया ने कुछ महीनों पूर्व ही $34 बिलियन के 220 बोइंग विमानों और $45.9 बिलियन के 250 एयरबस विमानों का ऑर्डर दिया था। वहीं देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो भी इस मामले में पीछे नहीं है, इंडिगो के एक अधिकारी ने फरवरी 2023 में बताया कि इंडिगो भी विस्तार के लिए एयरबस से 500 विमान खरीदेगी। इंडिगो के अधिकारी ने यह भी बताया कि इंडिगो वर्तमान में एक दिन में 1,800 उड़ानें भर रही है और उनमें से 10 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर हैं। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने फिलहाल 1,100 से अधिक विमानों का ऑर्डर दे रखा हैं।

सरकार इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही?

भारत सरकार ने भारतीय विमानन उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। सरकार ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को बजट 2023-24 में ₹3,224 करोड़ आवंटित किए हैं। सरकार का लक्ष्य हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट, वाटर एयरोड्रोम और लैंडिंग ग्राउंड सहित 50 विमान लैंडिंग साइटों को पुनर्जीवित करना है ताकि क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी में सुधार हो सके। पिछले आठ वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 140 हो गई है, और सरकार का मकसद अगले पांच वर्षों में इस संख्या को 220 हवाई अड्डों का करने की है। सरकार की 33 नए घरेलू कार्गो टर्मिनल और 15 नए उड़ान स्कूल बनाने की भी योजना है।

क्या है नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी 2016?

जून, 2016 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी (एनसीएपी) को मंजूरी दी गई थी। इस पॉलिसी का मकसद एयरलाइनों, हवाई अड्डों, आदि के विकास के लिए एक इकोसिस्टम बनाना था। इस नीति में क्षेत्रीय संपर्क, सुरक्षा, हर 20 हवाई अड्डों पर 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संचालन, वित्तीय सहायता, एयर-कार्गो, आदि क्षेत्रों का विकास शामिल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2017 में शुरू की गई 'उड़ान' योजना भी एनसीएपी का एक हिस्सा है। इस योजना का मकसद एक फिक्स्ड-विंग विमान में ₹2500/- प्रति घंटे के हवाई किराए पर हवाई सेवा उपलब्ध कराना है। इस योजना से एयरलाइनों और हवाई अड्डों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान होगा और सस्ती क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मिलेगी।

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