India Japan: नेहरू ने जापान को दी थी ‘इंदिरा’ तोहफे में, जाने दोनों देशों के संबंधों का संक्षिप्त इतिहास
भारत और जापान का रिश्ता छठी शताब्दी में शुरू हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जवाहरलाल नेहरू ने जापान को एक हथिनी गिफ्ट देकर दोस्ती मजबूत करने की ओर कदम बढ़ाया।

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा 20 मार्च को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। बता दें कि अक्टूबर 2021 में फुमियो किशिदा जापान के प्रधानमंत्री बने थे। तब फुमियो किशिदा ने प्रधानमंत्री बनते ही पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना था। वह 19 मार्च से 20 मार्च 2022 तक भारत दौरे पर आए थे। तब पीएम मोदी के साथ उन्होंने 14वीं भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक में भी हिस्सा लिया था।
भारत और जापान के बीच दोस्ती का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ जापान की वेबसाइट के मुताबिक दोनों देशों के बीच छठी शताब्दी में आपसी संबंध स्थापित हुए थे। दरअसल, तब जापान में बौद्ध धर्म का अनुसरण शुरू हुआ था। भारतीय संस्कृति का बौद्ध धर्म के माध्यम से जापानी संस्कृति पर बहुत प्रभाव पड़ा है। यह जापानी लोगों की भारत के साथ करीबी भावना का स्रोत है।
पंडित नेहरू ने जापान को उपहार में दी 'इंदिरा'
द्वितीय विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रों द्वारा जापान पर की गयी बमबारी में अनेक जानवरों समेत दो अंतिम बचे हाथी भी मारे गये थे। कुछ अरसा बीत जाने के बाद जापान के बच्चे हाथी देखने के लिए तरस रहे थे। फिर 2 अक्टूबर 1949 को प्रधानमंत्री नेहरू को जापान के स्कूली बच्चों की चिट्ठी मिली। जिसमें उन्होंने भारतीय हाथी जापान भेजने की मांग की।
तब प्रधानमंत्री नेहरू ने तुरंत एक 15 साल की हथिनी को जापान को भेंट कर दिया। इसका नाम उन्होंने अपनी बेटी 'इंदिरा' के नाम पर रखा। जब इंदिरा को उन्होंने जापान भेजा तो एक खत भी लिखा। जिसमें प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि 'इंदिरा' को मेरे तोहफे के तौर पर नहीं बल्कि भारतीय बच्चों की जापान के बच्चों को गिफ्ट के तौर पर लें। इंदिरा बहुत होशियार, ताकतवर और धैर्यवान है। मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ जापान के मुताबिक उस हाथी ने जापानी बच्चों के जीवन में प्रकाश का काम किया।
राजनयिक संबंधों की स्थापना
जापान और भारत ने एक शांति संधि पर हस्ताक्षर किये और 28 अप्रैल 1952 को राजनयिक संबंध भी स्थापित किये। यह संधि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान द्वारा हस्ताक्षरित पहली शांति संधियों में से एक थी। राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच मधुर संबंध रहे हैं।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, भारत के लौह अयस्क ने प्राकृतिक आपदाओं जैसे सुनामी, तूफान और बाढ़ से जापान को उबारने में काफी मदद की। साल 1957 में जापानी प्रधान मंत्री नोबुसुके किशी की भारत यात्रा के बाद जापान ने 1958 में भारत को ऋण प्रदान करना भी शुरू किया। यह जापानी सरकार द्वारा पहली बार ऋण सहायता प्रदान की गई थी।
जब मजबूत हुए दोनों देशों के रिश्ते
मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ जापान के मुताबिक अगस्त 2000 में प्रधानमंत्री योशीरो मोरी की भारत यात्रा ने जापान-भारत संबंधों को अधिक मजबूत किया। प्रधानमंत्री मोरी और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 'जापान और भारत के बीच वैश्विक साझेदारी' की स्थापना का निर्णय लिया।
अप्रैल 2005 में प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी की भारत यात्रा के बाद से जापान-भारत वार्षिक शिखर बैठकें दोनों देशों की राजधानियों में आयोजित की गई। इसके बाद दिसंबर 2006 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जापान का दौरा किया, तो जापान-भारत संबंध 'वैश्विक और रणनीतिक साझेदारी' तक बढ़ गया।
शिंजो आबे और पीएम मोदी का 'संकल्प'
सितंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की आधिकारिक यात्रा की और प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ एक शिखर बैठक की। उसमें द्विपक्षीय संबंधों को 'विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी' में उन्नत करने पर सहमति बनी। दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री आबे ने भारत की अधिकारिक यात्रा की। इसी दौरान दोनों देशों ने वैश्विक शांति एवं समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की घोषणा की।
ऐसे भारत-जापान बने स्ट्रैटिजिक पार्टनर?
नवंबर 2016 में पीएम मोदी ने जापान की अधिकारिक यात्रा की और प्रधानमंत्री आबे से मुलाकात की। इसके बाद साल नवंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आसियान समिट में हिस्सा लेने के लिए फिलीपींस पहुंचे। यहीं पर उनकी मुलाकात शिंजो आबे से हुई। गौर करने वाली बात है कि इस समिट के मौके ही मनीला में चार देशों (भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया) ने 10 सालों से ठंडे बस्ते में पड़े क्वाड के प्रस्ताव पर मुहर लगाई।
इस तरह से जापान और भारत एक स्ट्रैटिजिक पार्टनर भी बन गये। वहीं फिर अक्टूबर 2018 में भी पीएम मोदी ने अपनी जापान यात्रा के दौरान प्रशांत महासागर जैसे रणनीतिक इलाके में मिलकर काम करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री शिंजो पहले जापानी प्रधानमंत्री थे जोकि भारत की गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किये गये।
पीएम मोदी ने जापान के साथ ऐसा बढ़ाया रिश्ता
वहीं सितंबर 2021 में वाशिंगटन में पीएम मोदी और जापानी पीएम योशीहिदे सुगा के बीच इंडो-पैसिफिक, क्षेत्रीय विकास, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। वहीं क्वॉड देशों की भी एक बैठक हुई।
इसके बाद अक्टूबर 2021 में फुमियो किशिदा जापान के अगले प्रधानमंत्री बने। गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालते ही किशिदा ने पीएम मोदी के साथ एक शिखर सम्मेलन के लिए टेलीफोन वार्ता की। इसी के तहत मार्च 2022 में जापानी पीएम किशिदा ने पहली बार भारत का दौरा किया।
शिंजो आबे की शोक सभा में पहुंचे पीएम मोदी
मई 2022 में जापान में क्वाड की एक बैठक हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने क्वाड देशों के साथ-साथ जापान के साथ अलग से वार्ता की। इस दौरे के चार महीनों बाद सितंबर 2022 में पीएम मोदी फिर से पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए पहुंचे। जहां उन्होंने फुमियो किशिदा से भी मुलाकात कर भारत-जापान संबंधों को विकसित करने और इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
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