India in Space: भारत खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की राह पर, जानिए इसकी रोचक जानकारी
India in Space: भारत खुद का स्पेस स्टेशन बनाने जा रहा है। इसरो प्रमुख सोमनाथ ने इसकी घोषणा कर दी है। गगनयान मिशन, जिसका मकसद मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान भरना है, के बाद इस पर काम शुरू हो जायेगा। इस अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण मानव मिशन के बजाय रोबोटिक संचालन के साथ शुरू होगा। जानते हैं क्या होता है स्पेस स्टेशन?
स्पेस स्टेशन एक अंतरिक्ष यान है जो लंबे समय तक अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों के घर और लेबोरेट्री के रूप में काम करता है। यह एक कृत्रिम उपग्रह होता है। लेकिन स्पेस स्टेशन में प्रोपल्शन या लैंडिंग सिस्टम की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष के लगभग-शून्य गुरुत्वाकर्षण वातावरण में बनाए जाते हैं।

स्पेस स्टेशन बहुत बड़ा होता है और उसे पूरा एक साथ लॉन्च नहीं किया जाता, आमतौर पर उसे अलग-अलग टुकड़ों में ऑर्बिट में भेजा जाता है। फिर इन टुकड़ों को रोबोट्स की मदद से या अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा स्पेसवॉक के दौरान आपस में जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में कई वर्ष लग जाते हैं। भारत स्पेस स्टेशन के निर्माण में भी 20 से 25 वर्ष लगने की संभावना है। स्पेस स्टेशन को अक्सर वैज्ञानिक कामों के लिए लॉन्च किया जाता है, लेकिन पूर्व में कई सैन्य स्पेस स्टेशन लॉन्च भी हुए हैं।
क्या है अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन?
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पृथ्वी के निचले ऑर्बिट में एक बड़ा मॉड्यूलर स्पेस स्टेशन है। यह पांच देशों की स्पेस एजेंसियों के बीच एक परियोजना है, जिसमें NASA (अमेरिका), Roscosmos (रूस), JAX A (जापान), ESA (यूरोप), और CSA (कनाडा) शामिल हैं। आईएसएस एक माइक्रोग्रैविटी और स्पेस रिसर्च लैब के रूप में काम कर रहा है जिसमें खगोल विज्ञान, मौसम विज्ञान, भौतिकी और अन्य क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान किए जाते हैं। आईएसएस पांच बेडरूम वाले घर या दो बोइंग 747 जेट लाइनर जितना बड़ा है और इसमें एक समय में 6 अंतरिक्ष यात्री रुक सकते हैं। आईएसएस 2011 में बनकर तैयार हुआ था।
स्पेस स्टेशन में इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी?
स्पेस स्टेशन में अपने मिशन के लिए और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक सुरक्षित और रहने योग्य वातावरण प्रदान करने के लिए लाइफ सपोर्ट सिस्टम, सोलर पेनल्स, रोबोट्स, नेविगेशन और डॉकिंग, वैज्ञानिक उपकरण, आपातकालीन प्रणाली, स्वास्थ्य निगरानी उपकरण, कंप्यूटर सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है। आईएसएस लगभग 400 किलोमीटर से 420 किलोमीटर की औसत ऊंचाई पर पृथ्वी के चक्कर काट रहा है। आईएसएस में इतनी जबरदस्त टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है कि यह हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है।
स्पेस स्टेशन का मकसद
• वैज्ञानिक अनुसंधान: आईएसएस में छह आधुनिक लेबोरेटरी हैं, जो पृथ्वी के पर्यावरण और ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के लिए नई रिसर्च करने में मदद करती हैं ।
• मनुष्यों के अंतरिक्ष में प्रवेश के नए द्वार: स्पेस स्टेशन इंसानों के अंतरिक्ष में प्रवेश के नए रास्ते खोलता है। इसका उपयोग अंतरिक्ष में रहने और काम करने के बारे में अधिक जानने के लिए किया जाता है, जिससे मनुष्यों को पहले से कहीं अधिक दूर तक अंतरिक्ष में भेजना संभव हो पाता है।
• चिकित्सा अनुसंधान: हमारे शरीर के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने और बीमारियों के लिए नए उपचार तैयार करने के लिए स्पेस स्टेशन का उपयोग चिकित्सा अनुसंधान के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अंतरिक्ष वातावरण में प्रोटीन क्रिस्टल उगाने से वैज्ञानिकों को कई बीमारियों का बेहतर इलाज करने में मदद मिलती है, जिनका वर्तमान में कोई इलाज नहीं है।
• नई तकनीकों का परीक्षण: स्पेस स्टेशन का उपयोग अंतरिक्ष में उपयोग के लिए नए उपकरणों और तकनीकों का परीक्षण करने के लिए किया जा सकता है।
फिलहाल किन देशों के पास है अपना अंतरिक्ष स्टेशन?
2023 तक, पृथ्वी के निचले ऑर्बिट (एलईओ) में पूरी तरह से एक्टिव दो स्पेस स्टेशन हैं- अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) और चीन का तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन (टीएसएस)। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के अनुसार, आईएसएस यूरोप, अमेरिका, रूस, कनाडा और जापान के बीच एक सामूहिक परियोजना है। चीन का तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन (टीएसएस) दूसरा एक्टिव स्पेस स्टेशन है, जिसे 2021 में लॉन्च किया गया था। आईएसएस और टीएसएस के अलावा अंतरिक्ष में, यूएसएसआर के सैल्यूट्स, रूस के मीर, नासा के स्काईलैब और चीन के तियांगोंग 1 और तियांगोंग 2 सहित कई इनैक्टिव स्पेस स्टेशन भी हैं।
आईएसएस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
1. चंद्रमा के बाद आईएसएस रात के आकाश में दूसरी सबसे चमकीली चीज़ है, और इसे बिना दूरबीन के भी देखा जा सकता है।
2. आईएसएस का वजन लगभग 4,20,000 किलोग्राम है, जो लगभग 320 कारों के बराबर है।
3. आईएसएस में 50 से अधिक कंप्यूटर हैं जो स्पेस स्टेशन पर सभी प्रणालियों को नियंत्रित करते हैं, और आईएसएस पर सभी इलेक्ट्रिक उपकरण आठ मील लंबी केबलिंग से जुड़े हुए हैं।
4. आईएसएस के अंदर दो बाथरूम, एक जिम, छह शयन कक्ष और एक 360 डिग्री वाली खिड़की भी है।
5. आईएसएस इंसानों द्वारा अब तक बनाई गई सबसे महंगी चीज़ है। ऐसा अनुमान है कि इसे बनाने में $150 बिलियन अमरीकी डालर खर्च किए गए और इसके संचालन के लिए प्रति वर्ष $4 बिलियन अतिरिक्त खर्च किए जाते हैं।












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