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India China Border: भारत की सीमा पर चीन ने बसा दिए गांव; सड़कों, पुलों के बाद अब बांध बनाने की तैयारी

भारत-चीन बॉर्डर पर माहौल को तनावपूर्ण बनाए रखने में चीन कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अब चीन, अरुणाचल प्रदेश के करीब एक बड़ा बांध बनाने जा रहा है।

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India China Border: भारत-चीन सीमा पर चीन लगातार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े कर रहा है। इसी क्रम में अरुणचाल प्रदेश के पास मेडोग बॉर्डर के समीप चीन एक बांध बनाने जा रहा है। यह भारत के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। यह बांध यारलंग सांगपो नदी यानि ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जायेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बांध पर बनने वाले हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की क्षमता 60 गीगा वाट बताई गई है।

चीन इस बांध के जरिए ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को डाइवर्ट कर सकता है या फिर जब चाहे तब तेजी से पानी छोड़कर भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम में बाढ़ जैसे भयंकर हालात पैदा कर सकता है। गौरतलब है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर अब तक चीन 11 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बना चुका है। वहीं इस बांध को लेकर यह जानकारी सामने आई है कि यह चीन के सबसे बड़े थ्री-गोर्जेज डैम के आकार का होगा। जो करीब सवा दो किलोमीटर लंबा और 181 मीटर ऊंचा होगा।

दरअसल, भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है। यह सीमा जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह सरहद तीन सेक्टरों में बंटी हुई हैं - पश्चिमी सेक्टर (जम्मू और कश्मीर व लद्दाख), मीडिल सेक्टर (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) और पूर्वी सेक्टर (सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश)।

तेजी से गांव बसा रहा है चीन

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की एक रिपोर्ट में दावा किया था कि चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश से सटे विवादित इलाके में एक बहुत बड़ा गांव बसा दिया है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने इस इलाके में सालों से सेना की कई चौकियां भी बना रखी है। विभिन्न सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से भी दावा किया गया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में तवांग से लगी सीमा के पास गांवों को बसाया है। भारत-भूटान-चीन ट्राई जंक्शन से लगभग 9 किलोमीटर दूर भूटानी क्षेत्र में भी चीन ने पंगडा नाम से एक गांव बसाया था।

नवंबर 2021 में एक अनाधिकृत रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया कि चीन ने LAC (Line of Actual Control) के करीब 600 गांवों को बसाने का फैसला किया है। इनमें से आधे यानि तकरीबन 300 गांव बस भी गए हैं। साथ ही उत्तराखंड और लद्दाख के पास भी चीन ने अपनी तरफ गांव और एयरबेस बना लिए हैं। वैसे चीन की ओर से LAC पर कितने गांवों को बसाया गया है, इसका केंद्र सरकार अथवा शोध संस्थानों के पास कोई स्पष्ट सार्वजनिक डाटा नहीं है।

चीन ने इन इलाकों में बनाया पुल

जनवरी 2022 में 'द टेलीग्राफ' के मुताबिक इंटेल लैब में कार्यरत भू-स्थानिक खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने एक सैटेलाइट तस्वीर शेयर की थी। जिसमें बताया गया कि चीनी सेना, पैंगोंग त्सो झील के पास उत्तर और दक्षिण किनारों को जोड़ने के लिए एक पुल बना रही है। जो भारत के सामरिक लिहाज से सही नहीं है। दरअसल, पैंगोंग झील के पास चीन द्वारा यह दूसरा पुल बनाया जा रहा है। इंडिया टुडे की भी एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने डोकलाम में विवादित इलाके के पास एक नया पुल बनाया था।

चीन LAC पर तेजी से बना रहा है सड़कें

दिसंबर 2022 में ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) की रिपोर्ट में बताया गया कि 2022 की शुरुआत में ही चीन ने LAC के 150 मीटर के दायरे तक एक लंबी 'सील' सड़क का निर्माण कर लिया था। जिससे सैन्य और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिल सके और युद्ध की स्थिति में तेजी से एलएसी के करीब पहुंच बना सके। वैसे तो चीन लगातार ही पूरे एलएसी के करीब जहां-तहां सड़कों का निर्माण कर रहा है लेकिन चीन की किसी भी सरकारी एजेंसी ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि कितनी सड़कें बनाई जा रही हैं।

'द हिंदू' की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन अक्साई चिन वाले इलाके में तेजी से नेशनल एक्सप्रेस G695 बना रहा है। यह एक्सप्रेसवे भारत की सीमा के करीब से होकर चीन के झिंजियांग को तिब्बत से जोड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक G695 राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे विवादित अक्साई चिन क्षेत्र से गुजरने वाला दूसरा राष्ट्रीय हाइवे होगा। इससे पहले 1950 के दशक में G219 हाइवे का निर्माण हुआ था। डोकलाम के आसपास के इलाकों में कई नयी सड़कें बनाई गई हैं। इसके अलावा, चीन ने पाकिस्तान को जोड़ते हुए लगभग 1300 किलोमीटर लंबा काराकोरम हाईवे बना लिया है जोकि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर के इलाकों से गुजरता है।

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन का एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और अक्साई चीन जैसे विवादित इलाकों में बन रहा है। भारत ने कई बार इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरता है। यह एक हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जो चीन के काशगर प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान में बंदरगाह, हाइवे, मोटरवे, रेलवे, एयरपोर्ट और पावर प्लांट्स के साथ दूसरे इंफ्रस्क्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को डेवलप किया जाएगा। 2442 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 46 बिलियन डॉलर लागत का अनुमान बताया गया है।

यह भी पढ़ें: Joshimath and China Border: सामरिक रूप से भी खतरनाक है जोशीमठ का भू धसांव

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