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आर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम के खतरों पर अधूरी जानकारी, उठ रहे हैं कई प्रश्न

सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से कैंसर हो सकता है। यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कही है। संगठन ने चेतावनी जारी कर कहा कि कोका-कोला समेत अन्य ड्रिंक्स और फूड आइट्म को मीठा करने के लिए इस्तेमाल किये जा रहे आर्टिफिशियल स्वीटनर (एस्पार्टेम) से कैंसर का खतरा हो सकता है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स में छपी एक खबर के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) जुलाई में एस्पार्टेम को ऐसे पदार्थों की लिस्ट में शामिल करेगी, जिनसे कैंसर हो सकता है या फिर खतरा बढ़ सकता है। डब्ल्यूएचओ का यह फैसला खाद्य उद्योग और नियामकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि एस्पार्टेम का इस्तेमाल तो तमाम कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, च्युइंग गम जैसी चीजों में हो रहा है।

Incomplete information on the dangers of artificial sweetener aspartame, many questions are arising

इस शोध ने दुनियाभर के लोगों का ध्यान तो आकर्षित किया है। मगर अभी भी कई सवाल उठ रहे हैं जिनके जवाब आने बाकी हैं।

क्या दशकों से लोगों को गुमराह किया गया?
वॉशिंगटन पोस्ट में खबर के मुताबिक अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन ने 1981 में एस्पार्टेम को लोगों के उपयोग के लिए मंजूरी दी थी। लेकिन, फिर से अब इसकी जांच की जा रही है। तो क्या लगभग चालीस साल तक इस खतरे की जानकारी होते हुए भी लोगों को गुमराह किया गया?

अभी जानकारी आधी-अधूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अभी यह नहीं बताया है कि एस्पार्टेम युक्त उत्पाद का कितनी मात्रा में सेवन सुरक्षित है? दरअसल, नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ का कोई कितना सेवन कर सकता है, यह सुझाव डब्ल्यूएचओ की एक अलग एक्सपर्ट कमेटी देती है। आमतौर पर यह सुझाव वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) और फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की ज्वाइंट एक्सपर्ट कमेटी ऑन फूड एडिटिव्स (JECFA) देती है। इस नाते अभी इस शोध पर और भी स्पष्टीकरण की जरूरत है।

एक संस्थान, दो रिपोर्ट्स
JECFA साल 2023 में फिर से एस्पार्टेम के इस्तेमाल की समीक्षा कर रही है। जबकि साल 1981 में इसी कमेटी ने कहा था कि अगर एक सीमा तक रोज एस्पार्टेम का सेवन किया जाए तो यह सुरक्षित है। उदाहरण के लिए 60 किलोग्राम वजन वाला एक शख्स अगर दिन में 12-36 कैन डाइट सोडा पीता है तो वह जोखिम उठा रहा है। एक ही संस्थान की दो बातों से लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति बन सकती है।

लाखों लोग मारे गये, WHO ने तब क्यों नहीं चेताया?
साल 2013 में न्यू हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (एचएसपीएच) के शोध से पता चलता है कि दुनियाभर में इस एस्पार्टेम युक्त पेय पीने से हर साल लगभग 180,000 मौतें हो जाती हैं। जिनमें 25,000 अमेरिकी भी शामिल हैं। इस शोध में चीनी युक्त मीठे पेय पदार्थों के सेवन को 133,000 मधुमेह, 44,000 हृदय रोग और 6,000 कैंसर से होने वाली मौतों से जोड़ा गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि इनमें से 78% मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हुईं थीं। गौरतलब है कि एक दशक पहले हुई इस स्टडी के वक्त WHO ने लोगों को क्यों आगाह नहीं किया?

भारत ने भी नहीं उठाये ठोस कदम
दुनिया के 90 देशों में एस्पार्टेम का इस्तेमाल होता है, जिनमें भारत भी शामिल है। साल 2009 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के खाद्य सुरक्षा और विनियामक निकाय यानी FSSAI ने इस कृत्रिम चीनी के इस्तेमाल के संबंध में गाइडलाइंस जारी की थी। जिसमें कहा गया था कि जिस भी प्रोडेक्ट में इसका इस्तेमाल हो उस पर इसके नाम का साफतौर पर जिक्र होना चाहिए। यानी FSSAI को इसके खतरों की जानकारी थी लेकिन उन्होंने भी भारतीय जनता को साफतौर पर अथवा खुलकर समय रहते क्यों नहीं चेताया?

क्या है एस्पार्टेम?
एस्पार्टेम एक लोकप्रिय आर्टिफिशियल स्वीटनर है, जो शुगर फ्री के नाम से भी प्रचलित है। एस्पार्टेम को चीनी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा शून्य होती है। आर्टिफिशियल स्वीटनर कुछ प्राकृतिक और कुछ केमिकल्स को मिलाकर बनाया जाता है। डायबिटीज के मरीज भी चीनी की जगह आर्टिफिशियल स्वीटनर का ही इस्तेमाल करते हैं। इसका स्वाद चीनी की तरह ही होता है लेकिन चीनी की तुलना में यह 200 गुना अधिक मीठा होता है।

कैलोरी कंट्रोल काउंसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक एस्पार्टेम वैश्विक स्तर पर लगभग 6,000 उत्पादों में पाया जाता हैं। जिनमें कार्बोनेटेड शीतल पेय, पाउडर शीतल पेय, च्यूइंग गम, कन्फेक्शन, जिलेटिन, मिठाई मिश्रण, जमे हुए डेसर्ट, दही, टेबलटॉप मिठास, और कुछ फार्मास्यूटिकल्स जैसे विटामिन और शुगर-फ्री शामिल हैं।

सॉफ्ट ड्रिंक में लगभग 95 प्रतिशत एस्पार्टेम का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा लगभग 90 प्रतिशत रेडी-टू-ड्रिंक टी में इसका इस्तेमाल होता है। अब इस 'एस्पार्टेम' को जुलाई महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संभावित कैंसर फैलाने वाले पदार्थों की श्रेणी में रखा जा सकता है।

IARC की हो रही है आलोचना
जाहिर है कि 'एस्पार्टेम' एक बहुत बड़ा मार्केट है। इसी वजह से अमेरिका में कोका-कोला और पेप्सीको जैसे प्रमुख सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों और अमेरिकन बेवरेज एसोसिएशन ने अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) की समीक्षा रिपोर्ट्स पर आपत्ति जताई है।

टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्वीटनर एसोसिएशन (ISA) ने कहा कि इस तरह की समीक्षा से ग्राहक गुमराह हो सकते है। एसोसिएशन के महासचिव फ्रांसिस हंट-वुड ने कहा कि आईएआरसी कोई फूड सेफ्टी निकाय नहीं है। उसकी एस्पार्टेम की समीक्षा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है और व्यापक रूप से गलत रिसर्च पर आधारित है। आईएआरसी की समीक्षा और फैसले कोई मायने नहीं रखते। गौरतलब है कि आईएआरसी ने तो रातों-रात लाल मांस और मोबाइल फोन को भी संभावित कैंसरकारक घोषित कर दिया था।

पहले भी सतही जानकारियां दी गयी
आर्टिफिशियल स्वीटनर के बढ़ते उपयोग ने दुनिया भर में चिंता पैदा की है। क्योंकि बीते साल फ्रांस में एक स्टडी की गयी थी, जिसके मुताबिक जो लोग ज्यादा अर्टिफीशियल स्वीटनर, खासतौर पर एस्पार्टेम और एसेसल्फेम-के का इस्तेमाल करते थे, उनमें कैंसर पैदा होने की आशंका ज्यादा थी। यह स्टडी तकरीबन 1,00,000 लोगों की मेडिकल हिस्ट्री पर आधारित थी।

बीते मई महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आर्टिफिशियल स्वीटनर को लेकर भी नये गाइडलाइंस जारी किये थे। जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने अध्ययन में पाया था कि आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल से बच्चों या फिर बड़ों में बॉडी फैट कम नहीं होते हैं। इसके अलावा इसके ज्यादा इस्तेमाल से टाइप -2 शुगर का भी खतरा बढ़ जाता है।

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