Income Tax Return: आईटीआर भरते समय हो जाती हैं गलतियां? जानें क्या सावधानी रखें

आईटीआर के बारे में बात करने से पहले इनकम टैक्स अर्थात आयकर के बारे में जानना जरूरी है। आयकर, वह टैक्स है जो केंद्र सरकार द्वारा व्यक्तियों, निगमों और अन्य संस्थाओं द्वारा अर्जित एक निश्चित आय पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगाया जाता है।

इसका उपयोग सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और सेवाओं को क्रियान्वयन रूप देने के लिए किया जाता है।

Income Tax Return

आईटीआर क्या है?
आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) एक प्रकार से आयकर रिटर्न फार्म होता है, जिसको ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरा जाता है। आयकरदाता हर वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच अपनी आय व आयकर कटौती का ब्यौरा आयकर विभाग को देता है। इसके माध्यम से ही आयकर दाता आयकर विभाग से अपनी आय से अधिक आयकर कटौती को वापिस लेता है। इस प्रकार हम कह सकते है कि सरकार को अपनी आय के बारे में जानकारी देना तथा आय से अधिक आयकर कटौती के रिफंड के लिए किए गए आवेदन को ही आईटीआर कहते है।

'आईटीआर' आवेदन करते समय आवेदक से कुछ गलतियां हो जाती है, जिसके चलते आवेदक को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि आयकर विभाग आपको आयकर रिटर्न डिफेक्टिव (दोषपूर्ण) की श्रेणी में डाल सकता है। हालांकि इसमें कोई घबराने वाली बात नहीं होती है, इसको आवश्यक संशोधन द्वारा दूर किया जा सकता है। तो चलिए आज आईटीआर भरते समय किन-किन बातों/सावधानियां का ध्यान रखना चाहिए, इस विषय पर चर्चा करते हैं, जिससे दोषपूर्ण आवेदन से बचा जा सके।

सही आईटीआर फार्म का चयन
भारत में मुख्यतः 7 प्रकार के आईटीआर फार्म भरे जाते हैं, जो अलग-अलग आयकरदाता द्वारा भरे जाते हैं। इसलिए सबसे पहले उपयुक्त आईटीआर फार्म का चयन करना जरूरी है।

आईटीआर-1 को सहज फॉर्म भी कहा जाता है। अधिकतर लोग इसी फॉर्म का प्रयोग करते हैं। इसको वेतनभोगी वह कर्मचारी भर सकता है, जिसकी आय का माध्यम सैलरी, प्रॉपर्टी, किराए, पेंशन ब्याज सहित कुल आय ₹50 लाख तक है।
आईटीआर-2 सामान्यतः उन व्यक्तियों द्वारा भरा जाता है, जो हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) से हैं। इन्होने संपत्ति के माध्यम से आय अर्जित की होती है, न कि किसी बिजनेस अथवा पेशे से, तथा उनकी कुल आय ₹50 लाख से अधिक होती है।

आईटीआर-3 फॉर्म एचयूएफ का वह व्यक्ति भरता है जो किसी व्यापार अथवा काम के मालिक/साझेदार होने से आय अर्जित करता है और आय ₹2 करोड़ सालाना से अधिक है।

सुगम फॉर्म, भारत का वह व्यक्ति, एचयूएफ अथवा किसी कंपनी/फर्म का साझेदार या किसी व्यवसाय अथवा पेशे (डॉक्टर, वकील आदि) से आय अर्जित करते हैं, वह आईटीआर-4 फॉर्म भरते हैं। इसमें अर्जित की गई आय पर कोई सीमा नहीं है।

आईटीआर-5 संस्थाओं जैसे एलएलपीएस, एओपीएस, बीओआईएस के रूप में पंजीकृत द्वारा भरा जाता है।
आईटीआर-6 को वह कंपनी भरती है जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 11 से संबंधित छूट का दावा नहीं करती।

आईटीआर-7 राजनैतिक दल, वैज्ञानिक अनुसंधान संघ, विश्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान, कॉलेज अस्पताल, चिकित्सा संस्थान, कोष, समाचार एजेंसियां तथा अन्य व्यावसायिक ट्रस्ट द्वारा यह फार्म भरना होता है।

किन बातों का ध्यान रखें?
सबसे पहले तो आपको ध्यान देना होगा कि आईटीआर समय से भरें और सत्यापित जरुर करें। दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि आईटीआर भरने में अधिक समय लगता है, इसलिए इसे समय से भरना चाहिए। आयकर विभाग द्वारा निर्धारित समय से आईटीआर न भरने पर आप पर जुर्माना भी लग सकता है। इसके साथ ही साथ टैक्स रिटर्न फाइल के बाद, ई-फाइल को ई-सत्यापित और ऑफलाइन सीपीसी-बेंगलूरू द्वारा सत्यापित कराना चाहिए।

आईटीआर फार्म भरते समय ध्यान रखें कि आपकी व्यक्तिगत जानकारी (नाम की स्पेलिंग, पता, ईमेल, चालू मोबाइल नंबर आदि) आपके पैन कार्ड, आधार कार्ड व आईटीआर फॉर्म में समान होनी चाहिए। गलत जानकारी के कारण आयकर विभाग द्वारा आपको डिफेक्टिव श्रेणी में डाला जा सकता है।

कुछ लोग टैक्स बचाने के चक्कर में आईटीआर में गलत जानकारी भर देते हैं। जैसे बच्चों की पढ़ाई से सबंधित गलत जानकारी, झूठा दान, फर्जी किराये की रसीदें, फर्जी बिल अथवा फर्जी लोन के कागज आदि। ऐसी गलत जानकारी देने से आयकर विभाग द्वारा कार्यवाही की जा सकती है।

आईटीआर में सिर्फ आय का ही ब्यौरा नहीं, बल्कि नुकसान की भी जानकारी देनी चाहिए। नुकसान की जानकारी से आप उसे अपने लाभ से घटा (समायोजित) सकते हैं। जिसका आपको आयकर में लाभ मिलता है।

आईटीआर भरते समय कर छूट आय व कर मुक्त आय की सही जानकारी अलग कालम में भरें। जैसे कृषि आय, लाभांश, लंबे समय के पूंजीगत लाभों पर मिलने वाली छूट का ब्यौरा, आदि।

पिछले वर्षों में दाखिल आईटीआर
वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 15 मार्च 2023 तक कुल आईटीआर 6.63 करोड़ भरी गई, जो वर्ष 2020-21 की तुलना में 16.7 लाख अधिक थी। जिसमें सबसे ज्यादा आईटीआर 3.03 करोड़ (कुल आईटीआर का करीब 46%), आईटीआर-1 फार्म के द्वारा भरी गयी। वहीं आईटीआर-2 के तहत 57.6 लाख (9%), आईटीआर-3 के माध्यम से 1.02 करोड़ (15%), आईटीआर-4 से 1.75 करोड़ (26%), आईटीआर-5 फॉर्म द्वारा 15.1 लाख (2%), आईटीआर-6 के तहत 9.3 लाख (1.4%) और आईटीआर-7 के द्वारा 2.18 लाख आईटीआर भरी गयी थी।

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