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Website Ban: जानिए किस कानून के सहारे सरकार बैन करती है वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों को

Website Ban: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा पिछले दो सालों में 150 से अधिक वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों को भारत विरोधी सामग्री प्रसारित करने के आरोप में प्रतिबंधित किया गया है। ये प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 69 A के तहत लगाए गए हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि पिछले दो सालों में भारत विरोधी सामग्री प्रसारित करने के कारण 150 से अधिक वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों को मंत्रालय द्वारा ब्लॉक किया गया है।

जिन यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक किया गया है, उनमें खबर विद फैक्ट्स, खबर तेज, इंफॉर्मेशन हब, फ्लैश नाउ, मेरा पाकिस्तान, हकीकत की दुनिया और अपनी दुनिया टीवी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन यूट्यूब चैनलों के 12.1 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर थे और इन सामग्रियों को 1324.26 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले थे।

in which law the indian government bans websites and YouTube channels

हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अलग अलग समय में गलत सूचना फैलाने और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालने का प्रयास करने वाले यूट्यूब चैनलों और वेबसाइटों को आईटी नियमों के तहत ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं।

कब-कब की गई देश विरोधी वेबसाइटों/यूट्यूब चैनलों पर कार्रवाई?

12 जनवरी 2023 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फर्जी खबरें और गलत सूचनाएं प्रसारित करने के आरोप में छह यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन सभी यूट्यूब चैनलों के कुल मिलाकर 20 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स थे और इन्हें 51 करोड़ से अधिक व्यूज मिले थे।

सितंबर 2022 में खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 10 यूट्यूब चैनलों के 45 वीडियो को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। इन वीडियो को कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख से भी ज्यादा व्यूज मिले थे। इन चैनलों ने अपने वीडियो के जरिए सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की थी। इनमें से कुछ वीडियो का इस्तेमाल अग्निपथ योजना, भारतीय सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा, कश्मीर आदि मुद्दों पर गलत सूचना फैलाने के लिए किया जा रहा था।

अगस्त 2022 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आठ यूट्यूब न्यूज चैनलों, एक फेसबुक अकाउंट और दो फेसबुक पोस्ट को ब्लॉक करने के निर्देश दिया थे। ब्लॉक किए गए यूट्यूब चैनलों को कुल 114 करोड़ से अधिक के व्यूज मिले थे और 85 लाख से अधिक लोगों ने इन यूट्यूब चैनलों को सब्सक्राइब किया था। इन वीडियो के जरिए भारत विरोधी फर्जी और भ्रामक सामग्री प्रसारित की गई थी।

जुलाई 2022 में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मंत्रालय ने साल 2021-22 में देश के खिलाफ काम करने वाले यूट्यूब चैनलों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है। राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने इस दौरान 94 यूट्यूब चैनलों, 19 सोशल मीडिया अकाउंट और 747 यूआरएल को ब्लाॅक किया है।

22 अप्रैल 2022 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 यूट्यूब न्यूज चैनलों और एक फेसबुक अकाउंट को ब्लाॅक करने का निर्देश दिया था। ब्लॉक किए गए सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म में पाकिस्तान स्थित छह यूट्यूब चैनल और भारत स्थित 10 यूट्यूब चैनल शामिल थे। इन सभी यूट्यूब चैनलों की कुल व्यूअरशिप 68 करोड़ से भी अधिक की थी। इन चैनलों का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों, देश में सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित मामलों पर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाने के लिए किया गया था।

4 अप्रैल 2022 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 22 यूट्यूब न्यूज चैनलों, तीन ट्विटर अकाउंट, एक फेसबुक अकाउंट और एक न्यूज वेबसाइट को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। इन चैनलों की कुल व्यूअरशिप 260 करोड़ से भी अधिक थी। इन यूट्यूब चैनलों का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से संवेदनशील विषयों पर फर्जी समाचार फैलाने और सोशल मीडिया पर गलत सूचना को प्रसारित करने के लिए किया जा रहा था। जिन 22 यूट्यूब चैनलों को मंत्रालय द्वारा ब्लॉक किया गया था, उनमें से चार चैनलों का संचालन पाकिस्तान से किया जा रहा था और तीनों ट्विटर अकाउंट का संबंध भी पाकिस्तान से ही था।

फरवरी 2022 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विदेश से संचालित 'पंजाब पॉलिटिक्स टीवी' के ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। 'पंजाब पॉलिटिक्स टीवी' का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' से है। इस चैनल ने उस समय पंजाब में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की थी। ब्लॉक किए गए ऐप, वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिक वैमनस्य, अलगाववाद, भारत की एकता और अखंडता को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था।

जनवरी 2022 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा वित्त पोषित 35 यूट्यूब चैनलों सहित दो वेबसाइटों को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। इन यूट्यूब चैनलों के कुल सब्सक्राइबर्स एक करोड़ 20 लाख से भी अधिक थे और उनके वीडियो को 130 करोड़ से अधिक व्यूज मिले थे। इसके अतिरिक्त, दो ट्विटर अकाउंट, दो इंस्टाग्राम अकाउंट और एक फेसबुक अकाउंट को भी ब्लॉक किया गया था। इन यूट्यूब चैनलों पर भारत विरोधी समाचार प्रसारित किए जाते थे। भारतीय खुफिया एजेंसियां इन सोशल मीडिया अकाउंट्स और वेबसाइटों की बारीकी से निगरानी कर रही थीं।

दिसंबर 2021 में खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पाकिस्तान से संचालित 20 यूट्यूब चैनलों और दो वेबसाइटों को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। इन चैनलों पर भारत से संबंधित संवेदनशील विषयों के बारे में फर्जी खबरें फैलाई जा रही थीं। इन चैनलों का इस्तेमाल कश्मीर, भारतीय सेना, भारत में अल्पसंख्यक समुदाय, राम मंदिर, जनरल विपिन रावत जैसे विषयों पर भ्रामक और विभाजनकारी सामग्रियों को प्रसारित करने के लिए किया जा रहा था।

आईटी की किस धारा के तहत होती है इन पर कार्रवाई?

गौरतलब है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 को 9 जून 2000 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया था और 17 अक्टूबर 2000 से यह कानून प्रभावी है। इस अधिनियम में निहित धारा 69A के तहत अगर केंद्र सरकार चाहे तो वह किसी भी ऑनलाइन सामग्री या सोशल मीडिया अकाउंट, जो भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, विदेशी राष्ट्रों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध के लिए खतरा पैदा करती हो, को ब्लॉक कर सकती है और साइबर अपराधी को गिरफ्तार भी कर सकती है। इसके बाद साल 2009 में इस अधिनियम में और भी संशोधन किये गए थे।

इसके अतिरिक्त, साल 2021 में नये आईटी नियम भी बनाए गए थे, जिसके दिशा-निर्देशों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत के संविधान और कानूनों का पालन करना होगा। साथ ही, उन्हें भारत में एक मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक नोडल संपर्क अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी, जो सोशल मीडिया पर सामग्री से संबंधित शिकायतों की जांच करेगा और उन पर की गई कार्रवाई को विस्तृत रूप से एक मासिक अनुपालन रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित करने के लिए बाध्य होगा।

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