Illegal Immigrants: बिना वीजा भारत में कैसे रहते हैं बांग्लादेशी, क्या कहता है भारत का कानून?
जुलाई 2022 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक बीते पांच सालों में 2,399 बांग्लादेशी नागरिकों को धोखाधड़ी से भारतीय दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। बीते दिनों उत्तर प्रदेश की एटीएस ने देवबंद (सहारनपुर) में दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया।
इनकी पहचान हबीबुल्लाह मिस्बाह उर्फ नाजिर और अहमदुल्लाह उर्फ अब्दुल अवल के रूप में हुई। जो सालों से यूपी के सहारनपुर में छिपकर रह रहे थे। पूछताछ के दौरान इन्होंने खुलासा किया कि वे अवैध रूप से बॉर्डर पार करके यहां आये थे। दोनों ने जाली दस्तावेजों की मदद से भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन भी कर रखा था।

सवाल यह है कि क्या भारत में बॉर्डर पार करके दाखिल इतना आसान है? आखिर कैसे ये अवैध लोग सुरक्षाबलों को चकमा देकर बिना अनुमति के घूस जाते हैं? कौन करता है इनकी मदद और क्या है भारत का कानून?
अवैध बांग्लादेशी और उनका अवैध दाखिला
अप्रैल 2022 में इंडिया टूडे ने एक स्टिंग के जरिये खुलासा किया था कि कैसे बांग्लादेशी लोगों से 15 से 18 हजार रुपये लेकर बांग्लादेश से भारत में अवैध तरीके से एंट्री कराई जाती है। इसके लिए बॉर्डर पार कराने वाले दलाल दोनों तरफ के सीमा रक्षकों द्वारा संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों देशों की जाली आईडी भी बनाकर देते है, वह भी किसी लोकल पते के साथ। ताकि अगर वे बांग्लादेश में पकड़े जाते हैं, तो बांग्लादेशी पते की जरूरत होती है और अगर वे भारत में पकड़े जाते है, तो भारतीय पते की जरूरत होती है। फिर उन्हें छुड़ाना आसान हो जाता है।
इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि भारत में घुसने के लिए बांग्लादेशी लोग पश्चिम बंगाल के मसलंदापुर, हंसखली और बनगांव जैसे मार्गों का इस्तेमाल करते हैं। ये लोग दिन में नहीं बल्कि बॉर्डर क्रॉस करने के लिए रात होने का इंतजार करते हैं। एक दलाल कम से कम हफ्ते में तीन-चार लोगों को बॉर्डर पार करवाता है।
नदी के रास्ते भी आते हैं बांग्लादेशी
भारत और बांग्लादेश तकरीबन 4,096 किलोमीटर लंबी (2,545 मील) अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। जिसमें 54 नदियां और सैंकड़ों छोटी-छोटी नहरें-नाले दोनों देशों के बीच बहती हैं। उन नदियों और नहरों-नालों पर कोई बाड़ नहीं लगाया है। ऐसे में बांग्लादेशी इनका लाभ उठाकर भी आसानी से भारत में अवैध प्रवेश कर जाते है।
मुस्लिम स्कॉलर ने बताया कैसे भारत आते हैं बांग्लादेशी
बीते सप्ताह ही एक बांग्लादेशी मुस्लिम स्कॉलर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। जिसमें बांग्लादेशी मुस्लिम स्कॉलर ने भारत में होने वाली अवैध घुसपैठ का तरीका बताया था। उसने जानकारी दी कि बांग्लादेशी लोग स्टूडेंट वीजा की मदद से भारत में प्रवेश करते हैं। वीजा की अवधि खत्म होने बाद कोई छोटे-मोटे काम करने, दुकान चलाने के बहाने रूक जाते हैं। 80 से 90 प्रतिशत छात्र इसी तरह से भारत में हमेशा के लिए रहने लगते हैं।
भारत में रहते हैं 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी
भारत में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को लेकर कोई निश्चित संख्या अब तक सरकार के पास नहीं है। संख्या को लेकर विवाद और उलझन हमेशा बना रहता है। साल 2004 में तत्कालीन गृह मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने संसद में बताया था कि भारत में एक करोड़ 20 लाख बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं।
जबकि नवंबर 2016 में राज्यसभा में रखे गये एक लिखित प्रश्न के जवाब में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि भारत में लगभग दो करोड़ अवैध प्रवासी (बांग्लादेश) रह रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अक्सर ही बांग्लादेशी नागरिकों के बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने की खबरें आती हैं। साथ ही कहा कि भारत में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या का कोई सटीक डेटा होना संभव नहीं है, क्योंकि कई लोग किसी भी औपचारिक पंजीकरण प्रक्रिया को दरकिनार कर प्रवेश करते हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक असम और पश्चिम बंगाल दो ऐसे राज्य हैं, जहां बांग्लादेश से कथित अवैध घुसपैठ सबसे ज्यादा है। असम में 1979-85 के बीच अवैध अप्रवासियों के खिलाफ छह साल लंबा आंदोलन चला था। बांग्लादेश से अवैध आप्रवासन पूर्वोत्तर के कई छात्रों, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लिए एक प्रमुख मुद्दा रहा है।
जाली दस्तावेज पेश करने पर क्या है सजा?
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 198 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी प्रमाण पत्र को यह जानते हुए कि यह किसी भौतिक तथ्य के संबंध में गलत/झूठा है। उसको सही साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करता है। तब ऐसे शख्स को दंडित किया जायेगा। वहीं यदि कोई व्यक्ति किसी न्यायिक कार्यवाही (Judicial Proceeding) में ऐसे झूठे प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करता है तो उसे अधिकतम 7 साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है। किसी अन्य तरह की कार्यवाही में ऐसे झूठे प्रमाण पत्र को इस्तेमाल करने का दोषी पाये जाने पर उसे अधिकतम 3 साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
अवैध घुसपैठ पर सजा
अवैध घुसपैठियों को विदेशी एक्ट, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) एक्ट, 1920 के अंतर्गत जेल भेजा जा सकता है या निर्वासित किया जा सकता है। 1946 और 1920 के एक्ट केंद्र सरकार को भारत में विदेशियों के प्रवेश, निकास और निवास को रेगुलेट करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
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