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Kidney Racket: क्यों होता है किडनी का अवैध कारोबार, जानें अंगदान के कानूनी पक्षों के बारे में

मानव अंगों विशेषकर किडनी की तस्करी पर कानून सख्त होने के बावजूद भी देश में यह अपराध बढ़ता ही जा रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण किडनी से संबंधित बीमारियों का बढ़ना है।

illegal business of kidney, know about the legal aspects of organ donation

2005 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी मंजिल सैनी ने 7 जून (बुधवार) को लखनऊ की पहली महिला पुलिस प्रमुख (एसएसपी) के रूप में कार्यभार संभाला। तभी से मीडिया में मंजिल सैनी व मुरादाबाद में साल 2008 में पोस्टिंग के दौरान उनके द्वारा किडनी रैकेट के भंडाफोड़ करने के किस्से भी खूब सुर्खियों में हैं।

भारत में कानून
भारतीय कानून के तहत अंग प्रत्यारोपण और दान की अनुमति दी गयी है लेकिन इसके अवैध खरीद-ब्रिकी की नहीं। भारत सरकार ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत जीवित और मृत मस्तिष्क वाले डोनर द्वारा पहले से अंगदान की अनुमति है। जबकि, वर्ष 2011 में अधिनियम के संशोधन के जरिए मानव टिशू (ऊतकों) के दान को इसमें शामिल किया गया है। इसलिए यह अब 'ऊतक और अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 2011' कहलाता है।

फिलहाल भारत में मानव अंगों के गैर-कानूनी कारोबार के लिए 5 से 10 साल तक की कैद और ₹20 लाख से ₹1 करोड़ तक के जुर्माने के प्रावधान हैं। जबकि मानव टिशू का कारोबार करने पर एक से तीन साल की कैद और ₹5 से ₹25 लाख तक के जुर्माने की सजा है। इतना सख्त कानून होने के बावजूद भारत में धड़ल्ले से मानव अंगों की खरीद-फरोख्त जारी है।

कितना बड़ा है मानव अंगों का कारोबार?
ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी (GFI) के मुताबिक दुनियाभर में जितने अंगों की तस्करी की जाती हैं, उसमें सबसे अधिक अवैध रूप से किडनी की तस्करी होती है। वहीं हर साल जितने ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) होते हैं, उसमें से 10 प्रतिशत तस्करी के जरिए होते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सालाना 10,000 किडनियों की तस्करी की जाती है, यानी हर घंटे लगभग एक या उससे ज्यादा। वहीं भारत में हर साल 2 हजार लोग अपनी किडनी बेच देते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा भी 2007 का है। जाहिर है कि इसमें और इजाफा हुआ होगा।

क्यों होती है किडनी की तस्करी?
भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में मानव अंगों की डिमांड अधिक है, लेकिन सप्लाई अपेक्षाकृत कम है। इस कारण गैर-कानूनी तरीकों से मानव अंगों खासकर किडनी, लीवर और हार्ट की तस्करी होती है। 4 मार्च 2016 को लोकसभा में सरकार ने बताया था कि देश में 2 लाख किडनियों की जरूरत हैं, लेकिन सिर्फ 6 हजार उपलब्ध हैं। इसी तरह 30 हजार लिवर की जरूरत है, जबकि उपलब्ध सिर्फ डेढ़ हजार है। हार्ट की जरूरत 50 हजार है और 15 ही उपलब्ध हैं। डिमांड अधिक और सप्लाई कम होने के चलते तस्करों के जरिए ज्यादा पैसा देकर अंग खरीदने के कारोबार को बल मिलता है।

ग्लोबल ऑब्जर्वेटरी ऑन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांटेशन के हवाले से बताया गया है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश है, जहां किडनी या शरीर के अन्य अंगों का प्रत्यारोपण सबसे ज्यादा किया जाता है।

गरीबी के चलते भी बेचते हैं अंग
दूसरी तरफ गरीबी, कर्ज को लेकर भी लोग किडनी समेत अपने दूसरे अंगों को बेच देते हैं। साल 2002 में तमिलनाडु के चेन्नई में एक स्टडी हुई थी। इसमें किडनी बेच चुके 305 लोगों से कारण पूछा गया था, तो इनमें से 96 प्रतिशत ने कर्ज को बड़ी वजह बताया था। वहीं दिल्ली में जून 2022 में दिल्ली पुलिस द्वारा किडनी का काला कारोबार करने वाले एक रैकेट का खुलासा किया गया था, जिसमें बेरोजगारों को पैसों का लालच दिखाकर अंग निकालने का धंधा किया जा रहा था।

क्या होती है आयु सीमा?
अंगदान के लिए न्यूनतम आयु सीमा लगभग 18 साल मानी गयी है। लेकिन, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह जीवित दान है या शव दान। जीवित अंगदान के मुताबिक, जो लोग अपना अंगदान करना चाहते हैं, वह एक वसीयत बनाते हैं। जिसमें लिखा होता है कि उनकी मौत के तुरंत बाद उनके शरीर का कौन-कौन सा हिस्सा दान किया जाये। इसमें व्यक्ति जिंदा रहने के दौरान ही अपने शरीर के कुछ अंगों को दान करता है।

वहीं मृत्य अंगदान के मुताबिक मौत के बाद अंग को दान किया जाता है। इसमें आंख, किडनी, लीवर, फेफड़ा, ह्रदय, पैंक्रियाज और आंत का अंगदान किया जा सकता है। अंगदान करने की उम्र सीमा भी होती है, जिसके मुताबिक 18 साल का कोई भी व्यक्ति जो स्वस्थ है, अंगदान कर सकता है। हालांकि, भारत में सबसे कम उम्र की डोनर 6 महीने की बच्ची थी।

भारत में कब-कब किडनी रैकेट का हुआ भंडाफोड़
मई 2023 में विशाखापट्टनम पुलिस ने एक किडनी रैकेट का खुलासा करते हुए एक डॉक्टर समेत पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

जून 2022 में दिल्ली में हौज खास थाना पुलिस ने किडनी की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें शामिल एक डॉक्टर दिल्ली के बड़े हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर रहा था। इन सभी आरोपियों को दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड तीन राज्यों से पकड़ा गया था। वहीं दिल्ली पुलिस ने तब दावा किया था कि पिछले छह महीने में ही ये गिरोह 14 लोगों को टारगेट कर चुका है।

अप्रैल 2022 में कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु में एक नकली किडनी डोनेट करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इस सिलसिले में पुलिस ने तीन विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बेंगलुरु के प्रतिष्ठित अस्पतालों की फर्जी वेबसाइट बनाकर, किडनी डोनर और प्राप्तकर्ता दोनों को निशाना बनाते थे।

जुलाई 2021 में गुवाहाटी से 85 किलोमीटर पूर्व मोरीगांव जिले के धरमतुल गांव में किडनी की अवैध खरीद-फरोख्त चल रही थी। इस बात का खुलासा गांव के ही एक विलेज डिफेंस पार्टी ने किया था। इसके बाद गांव के 12 लोगों ने पुलिस को लिखित में बताया कि वो पैसे के लिए किडनी बेच रहे थे। इस गोरखधंधे में कोलकाता का एक अस्पताल भी शामिल था।

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