जब कुदरत दें ये संकेत तो समझिए की आने वाला है भूकंप

नयी दिल्ली। यूं तो भूकंप के पूर्वानुमान की कोई वैज्ञानिक प्रणाली मौजूद नहीं हैं। लाख कोशिशों के बावजूद वैज्ञानिक भूकंप के बारे में पूर्वानुमान हासिल करने में कामियाब नहीं हो पाएं हैं। हलांकि कोशिशें अभी भी जारी हैं। लेकिन आपको बता दें कि भूकंप आने से पहले प्रकृति हमें आहट देती हैं। हमें संभलने के लिए संकेत देती हैं।

कहते हैं कि भले इंसान और विज्ञान भूकंप की आहट को महसूस कर पाने में असफल रहे हो, लेकिन पशु-पक्षियों का व्यवहार ऐसे संकट को तेजी से भांप सकता है। इन जीव-जंतुओं को भूकंप से पहले ही उसका पूर्वाभास हो जाता है। आपको बतातें है उन संकेतों के बारे में जिसे देखकर आप भूकंप का पूर्वानुमान लगा सकते हैं।

कैसे जानें भूकंप की आहत

कैसे जानें भूकंप की आहत

कहा जाता है कि जमीन के भीतर रहने वाला सांप धरती की कंपन को सबसे तेजी से महसूस कर लेता है। चूंकि वे धरती के माध्यम से तरंग के रूप में आने वाले संकेतों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में उसे भूकंंप आने का अहसास पहले ही हो जाता हैं। पुराने लोग मानते है कि भूकंप से पहले सांप अपने बिल से बाहर आ जाते हैं।

जानिए भूकंप के संकेत

जानिए भूकंप के संकेत

कहते हैं कि वफादार जानवर कुत्ता धरती के कंपन तो इंसानों के पहले महसूस कर लेता हैं। पुरानी कहावत है कि जब अचानक से कुत्ते घबराए हुए इधर-उधर चक्कर लगाएं तो मान लेना चाहिए कि भूकंप आ सकता है।

इन्हें मिलते हैं संकेत

इन्हें मिलते हैं संकेत

लोग मानते हैं कि भूकंप की कंपन को गाय पहले ही महसूस कर लेते हैं। उसे इसका पूर्वाभास हो जाता है। भूंकप आने से चंद सेकेंड पहले अक्सर गाय खूंटे से भागने का प्रयास करती है।

गायों को होता है भूकंप का पूर्वाभास

गायों को होता है भूकंप का पूर्वाभास

पुराने जमाने के लोग अब भी मानते हैं कि भूकंप आने से पहले गाय बार-बार जमीन पर सींगों का प्रहार करती है और उससे मिट्टी को उछालती है।

इनको होता है भूकंप का पूर्वाभास

इनको होता है भूकंप का पूर्वाभास

कहा जाता है कि भूकंप आने पर मोर उच्च स्वर में बोलने लगते हैं। इससे पूर्व वे बार-बार अपना स्थान बदलते हैं। पक्षी अपना घोंसला छोड़ देते हैं।

इन्हें मिलते हैं संकेत

इन्हें मिलते हैं संकेत

ज्योतिष के मुताबिक शनि और मंगल को भूकंप का कारक माना जाता है। जब इनकी दृष्टि एक-दूसरे पर होती है तो भूकंप जैसी आपदाएं आती हैं। हलांकि ये ज्योतिष का अनुमान हैं।

इन्हें मिलते हैं संकेत

इन्हें मिलते हैं संकेत

कहा जाता है कि पूर्णिमा, अमावस्या जैसी तिथियों पर भौगोलिक संरचना में बदलाव होता है। इसके नजदीक ग्रहण लगते हैं तो वहीं जब मंगल, शनि, सूर्य, गुरु की परस्पर दृष्टि होती है तो ज्योतिषीय योग के मुताबिक इससे भूकंप आने की संभावना बढ़ जाती है।

इनको होता है भूकंप का पूर्वाभास

इनको होता है भूकंप का पूर्वाभास

कहा जाता है कि जब चींटियां लंबी-लंबी कतार बनाकर अपने बिलों से बाहर निकलने लगती हैं तो भूकंप आने की संभावना हो सकती है, क्योंकि उन्हें भूकंप की आहट मिल जाती है, जिसे पाकर वो ऐसा करती हैं।

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