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Oxford word of the Year: कैसे चुना जाता है ऑक्सफोर्ड का वर्ड आफ द ईयर?

ऑक्सफोर्ड पिछले अट्ठारह सालों से लगभग हर साल किसी एक शब्द को वर्ड ऑफ द ईयर घोषित करता आ रहा है। 2022 के लिए उसने गोब्लिन मोड को वर्ड ऑफ द ईयर चुना है। आइये जानते हैं ऑक्सफोर्ड द्वारा कैसे चुना जाता है साल का शब्द?

How is Oxford choose the word of the year 2022

Oxford word of the Year: पृथ्वी पर संभवत: मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो अपनी भावनाएं या विचार व्यक्त करने के लिए शब्दों से काम लेता है। शब्द हजारों साल से मानव सभ्यता के सहचर रहे हैं। अच्छे-बुरे अरबों शब्द आज हमारे बीच चलन में हैं, लेकिन इन्हीं में से कुछ शब्द ज्यादा ही खास बन जाते हैं। ऐसा ही एक शब्द है, 'गोब्लिन मोड'।

यह वह शब्द है, जिसे ऑक्सफोर्ड द्वारा 2022 का 'वर्ड ऑफ द इयर' घोषित किया गया है। गोब्लिन शब्द इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड की लोककथाओं में पाया जाता है। इसका इस्तेमाल सभी प्रकार की बुरी और दुष्ट आत्माओं के लिए किया जाता रहा है।

लेकिन 'गोब्लिन मोड', दरअसल एक स्लैंग शब्द है। यह ऐसे लोगों के लिए प्रयुक्त होता है, जो समाज और लोगों की परवाह किये बिना अपनी मनमानी करते हैं। पहली बार यह शब्द 2009 में ट्विटर पर सामने आया था। लेकिन, इसी साल फरवरी में, एक फेक न्यूज के ट्वीट होने के बाद यह वायरल हो गया।

इस खबर में इतालवी-अमरीकी अभिनेत्री जूलिया फॉक्स को कोट किया गया था कि उनका उनके बॉयफ्रेंड केन्ये वेस्ट से ब्रेकअप इसलिए हुआ कि जूलिया का गोब्लिन मोड में चले जाना केन्ये को पसंद नहीं आया था। हालांकि, जूलिया ने बाद में इंस्टाग्राम पर सफाई दी थी कि उन्होंने यह शब्द इस्तेमाल नहीं किया, पर तब तक गोब्लिन मोड, वायरल मोड में जा चुका था।

ऐसे चुना जाता है वर्ड ऑफ द ईयर

हर साल कुछ शब्द ऐसे होते हैं, जो अपने आकर्षण या निहित अर्थों की वजह से बोलचाल में और मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बहुत ज्यादा इस्तेमाल किये जाते हैं। ऐसे शब्द हमारी जुबान पर चढ़कर, हमारी स्वाभाविक भाषा का हिस्सा बन जाते हैं। ऑक्सफोर्ड के पास लगभग 19 अरब शब्दों का विशाल भंडार है। यह दुनिया भर के अंग्रेजी अखबारों की मदद से नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

ऑक्सफोर्ड के शब्दकोश लेखक (लेक्सियोग्राफर) पूरे साल इस बात पर नजर रखते हैं कि कौन-कौन से शब्दों की लोकप्रियता और उपयोग में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे ही कुछ अत्याधिक प्रचलित शब्दों में से ऑक्सफोर्ड किसी एक को वर्ड ऑफ द ईयर घोषित करता है। इस चयन के पीछे उस शब्द के इस्तेमाल की बारंबारता, लोगों में उसे लेकर उत्साह, उसकी स्वीकार्यता जैसी बातों का ध्यान रखा जाता है।

वर्ष-शब्द के रूप में 'गोब्लिन मोड' का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहली बार था, जब ऑक्सफोर्ड ने चयन प्रक्रिया में आम लोगों को शामिल किया। ऑक्सफोर्ड ने इसके लिए 21 नवंबर से 2 दिसंबर के बीच एक ऑनलाइन वोटिंग की व्यवस्था की, जिसमें प्रतिभागियों को गोब्लिन मोड, मेटावर्स और #आईस्टैंडविद में से किसी एक शब्द को वर्ड ऑफ द ईयर के तौर पर वोट करना था। इस प्रक्रिया में तीन लाख चालीस हजार लोगों ने हिस्सा लिया।

दिलचस्प बात यह है कि यह चुनाव भी लॉबीइंग से अछूता नहीं रहा। एक वेबसाइट पीसी गेमर ने लोगों से अपील की कि वे अपने छोटे-छोटे मतभेदों को भूलकर लिजलिजे #आईस्टैंडविद या पूरी तरह बुरे भविष्य के प्रतीक मेटावर्स की बजाय, गोब्लिन मोड को अपना वोट दें। अब इसे अपील का असर कहें या कुछ और, आश्चर्यजनक रूप से 93% प्रतिशत ने गोब्लिन मोड के पक्ष में मतदान किया। जबकि, काफी चर्चित रहे मेटावर्स को उपविजेता के रूप में महज 4% वोट ही मिले।

बीते सालों में ये रहे हैं विजेता

ऑक्सफोर्ड पिछले अट्ठारह सालों से लगभग हर साल किसी एक शब्द को वर्ड ऑफ द ईयर घोषित करता आ रहा है। इनमें सुडोकू व पॉडकास्ट (2005), कार्बन न्यूट्रल (2006), अनफ्रेंड (2009), बिग सोसाइटी (2010), जिफ (2012), सेल्फी (2013), पोस्ट-ट्रुथ (2016), यूथ क्वेक (2017), टॉक्सिक (2018), क्लाइमेट इमरजेंसी (2019) जैसे कुछ बेहद सरल और कई एकदम मौलिक शब्द शामिल हैं।

ऑक्सफोर्ड अभी तक सात बार दो-दो शब्दों को संयुक्त विजेता के रूप में भी चुन चुका है। लेकिन, उसने दो बार भाषा प्रेमियों को बुरी तरह चौंका दिया था। पहली बार 2015 में, जब उसने किसी शब्द की बजाय एक ईमोजी को वर्ष शब्द घोषित किया। और, दूसरी बार 2020 में, जब उसने किसी एक शब्द की बजाय वर्ड्स ऑफ अनप्रेसेडेंटेड ईयर की घोषणा करते हुए कहा कि इस साल को किसी एक शब्द में नहीं समेटा जा सकता।

ऑक्सफोर्ड अकेला नहीं, सबकी ढपली अलग-अलग

वर्ड ऑफ द ईयर चुनने और घोषित करने के मामले में भले ही ऑक्सफोर्ड का दबदबा हो, लेकिन ऐसा करने वाला वह अकेला नहीं है। लगभग आधा दर्जन ऐसे संस्थान और भी हैं, जो अलग-अलग तरीकों से चुनकर अलग-अलग शब्दों को वर्ड ऑफ द ईयर घोषित करते हैं।

जैसे कि कैम्ब्रिज ने होमर (डाकवाहक कबूतर) को, कॉलिन डिक्शनरी ने पर्माक्राइसिस (लंबा खिंच रहा अस्थिरता और असुरक्षा का दौर) को, जर्मन लैंग्वेज सोसायटी ने स्मैश (किसी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए प्रयुक्त स्लैंग शब्द), ऑस्ट्रेलिया की नेशनल डिक्शनरी मैक्वेरी ने टील (बेचलरों का हैंडबैग), मरियम-वेबस्टर ने गैसलाइटिंग (वे मनोवैज्ञानिक उपाय, जिनसे किसी व्यक्ति को उसके खुद के विचारों की वैधता पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया जा सके) को 2022 के लिए वर्ड ऑफ द ईयर घोषित किया है। ये सभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थाएं हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि असल में वर्ड ऑफ द ईयर किसे माना जाना जाये।

अंग्रेजी शब्दों के बोझ तले दब जाते हैं हिंदी शब्द

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा और करीब 62 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिंदी में एक से बढ़कर एक शब्द हैं और यह नये शब्दों को अपनाने में भी कभी पीछे नहीं रही है। फिर भी, जब वर्ष शब्द के चुनाव की बात आती है तो अंग्रेजी ही हावी रहती है। हालांकि, ऑक्सफोर्ड ने वर्ष का हिंदी शब्द के लिए एक अलग श्रेणी बना रखी है। इसके अंतर्गत 2019 में संविधान और 2020 में आत्मनिर्भरता को वर्ष का शब्द चुना जा चुका है।

लेकिन, हिंदी के कद को देखते हुए यह ऊंट के मुँह में जीरा जैसी स्थिति है। इससे निकलने का एक ही तरीका है। वह यह कि हम इसके लिए ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज जैसे अंग्रेजीपरस्त संस्थानों की प्रतीक्षा करने की बजाय स्वयं की अपनी व्यवस्था कायम करें।

भारत सरकार और हर तीन साल में आयोजित होने वाला विश्व हिंदी सम्मेलन तथा मारीशस स्थित विश्व हिंदी सचिवालय साथ मिलकर इस मामले में एक सार्थक भूमिका अदा कर सकते हैं। 12 वां विश्व हिंदी सम्मेलन दो महीने बाद फिजी में आयोजित होने जा रहा है। इस अवसर का लाभ उठाया जा सकता है।

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