अंधेरे में जिंदगी बिता रहा था यह 'सूरज,' एक एनजीओ ने बचाई जान

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली के एनजीओ ने उत्‍तर प्रदेश के मथुरा में पिछले कई वर्षों से कैद एक हाथी की जान बचाई है। इस हाथी का नाम सूरज है और इसे कई वर्षों तक चेन से बांध कर रखा गया था और इस हाथी का एक कान भी नहीं था।

पिछले कई दशकों से सभी तकलीफों और मुश्‍किलों को झेल रहे हाथी सूरज की तकलीफ को एनजीओ वाइल्‍ड लाइफ ने 10 घंटों तक चलाए गए रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के बाद खत्‍म कर दिया।

सूरज एक मंदिर का हाथी रहा है और कई वर्षों तक उसे कांटे वाले तारों से बांधकर रखा गया था। हालांकि एनजीओ के लिए उसे कैद से छुड़ाना आसान नहीं था क्‍योंकि स्‍थानीय लोगों की ओर से एनजीओ के रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन का विरोध शुरू हो गया था।

आगे की तस्‍वीरों में देखिए सूरज की कुछ तस्‍वीरें।

20 दिसंबर को हुआ रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन

20 दिसंबर को हुआ रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन

एनजीओ के मुताबिक 20 दिसंबर को करीब 10 घंटे के रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के बाद सूरज को बचाया गया। टीम में 20 लोगों की टीम थी जिसमें डॉक्‍टर्स भी शामिल थे। सूरत को स्‍पेशल तरीके से बनाई गई एंबुलेंस के जरिए हाथियों के लिए बने कंजर्वेशन सेंटर में ले जाया गया। एनजीओ की टीम के साथ पुलिस की गाड़‍ियां भी गई थीं।

कैद से हुआ आजाद

कैद से हुआ आजाद

सूरज को कैद से आजाद कराकर जिस सेंटर में रखा गया है वह मथुरा में है और अब वह पूरी जिंदगी यहीं पर बिताएगा। एनजीओ के साथ मौजूद डॉक्‍टरों की टीम के मुताबिक सूरज के शरीर पर कई घाव हैं। उसकी आंखों और पैरों में इंफेक्‍शन है और उसकी पूंछ में भी काफी गहरे घाव हैं।

पूरे दिन कंटीले तारों से बंधा रहता था

पूरे दिन कंटीले तारों से बंधा रहता था

एनजीओ की को-फाउंडर गीता शेषमनी के मुताबिक सूरज को मंदिर के एक अंधेरे कमरे में रखा जाता था। पूरा दिन वह चेन और कांटे वाले तारों से बंधा रहता था और ऐसे में उसकी जान बचाना बहुत जरूरी था। आधी रात में एनजीओ से रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन शुरू किया और इसमें उसे जिले के डीएम की भी मदद मिली थी। इसके अलावा प्राइवेट सिक्‍योरिटी की भी मदद ली गई थी।

सेंटर में होगा सूरज का इलाज

सेंटर में होगा सूरज का इलाज

सूरज की उम्र 45 वर्ष है और एनजीओ की मानें तो अब सेंटर में प्रशिक्षित डॉक्‍टरों की टीम सूरज का इलाज करेगी। साथ ही उसे भरपूर पोषण से युक्‍त खाना भी दिया जाएगा। इस एनजीओ ने पहली बार किसी मंदिर के हाथी की जान बचा

शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना

शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना

इस एनजीओ के को-फाउंडर कार्तिक सत्‍यनारायण कहते हैं कि जंगलों से पकड़े गए हाथियों को बांधकर रखा जाता है। मंदिरों में जरूर हाथियों की पूजा होती है लेकिन उन्‍हें बहुत ही बुरी स्थितियों में रखा जाता है। उन्‍हें शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

मंदिर ने किया नियमों का उल्‍लंघन

मंदिर ने किया नियमों का उल्‍लंघन

कार्तिक की मानें तो न सिर्फ सूरज को रखने वाले मंदिर बल्कि देश के कई मंदिरों में हाथियों को रखते समय नियमों का उल्‍लंघन किया है। उन्‍हें उम्‍मीद है कि अब इसके बाद मंदिरों में बंधे हाथियों और उनकी बुरी दशा पर लोगों का ध्‍यान जाएगा।

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