Samosa: दिल्ली दरबार से लेकर विदेशी राजनयिक की पसंद समोसे की अद्भुत है कहानी
Samosa: खाने-खिलाने का शौक हिंदुस्तानी संस्कृति में बहुत पुरानी परंपरा है। अगर आप परहेज़ी स्वभाव के नहीं हैं तो यहां के हज़ारों व्यंजन चखते-चखते उम्र निकल जाएगी। यहां के मसाले तो पूरी दुनियां में राज करते हैं। राज तो हमारा समोसा भी करता है। राज्य कोई भी हो समोसा हर जगह मिल जाएगा। यही एक ऐसा व्यंजन है, जिसकी दर्जनों वैरायटी है। आलू से लेकर मटन - चिकेन तक, ड्राई फ्रूट्स से लेकर चॉक्लेट और चीज तक हर तरह के समोसे भारत में मिलते हैं।
मध्यपूर्व एशिया से आया समोसा
कहते हैं कि भारत में समोसा मध्यपूर्व एशिया से आया। 10वीं से लेकर 13वीं सदी की अरब कुकरी बुक में इसका जिक्र आता है, इसे वहां संबोसाक कहा गया था। अरब से चलकर यह समोसा दिल्ली दरबार में पंहुचा, लेकिन तब इसे तला नहीं जाता था, बल्कि तंदूर में पकाया जाता था। समोसा को भारत आये हुए एक हजार साल हो अधिक हो गया। आज यह भारत के आम लोगों के साथ साथ खास लोगों की पसंद बन गया है। जी 20 की बैठक में भारत ने अपने तमाम विदेशी मेहमानों के जायके में भी समोसा को शामिल किया।

उत्तर भारत के लोगों को बेहद पसंद है समोसा
मैदा और आलू के बने समोसे को उत्तर भारत के लोग बहुत पसंद करते हैं। आलम यह है कि कई गलियां, कई दुकानें समोसे के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। हेल्थ, बॉडी और फिगर की चिंता करने वाले भी समोसा सामने आने पर खुद को नहीं रोक पाते। हालांकि तली-भुनी चीजें और ज्यादा मसालें शरीर को नुकसान ही पहुंचाते हैं। बावजूद समोसा टनों में बिकता है ।
उत्तर भारत ही क्यों, दक्षिण में भी समोसा का खूब चलन है। कोयंबटूर में प्याज का समोसा लोग चाव से खाते हैं। भले ही इसे "ओनियन पप्सू" कहते हैं। तमिलनाडु के इसे "सैमसा" भी कहते हैं। जब तक सिनेमा हॉल में पॉपकॉर्न का चलन नहीं था तब तक फिल्म देखने जाने वालों की पसंद ओनियन सैमसा या पुप्सू ही हुआ करता था। हैदराबाद भी समोसा की वैरायटी के लिए जाना जाता है। शाकाहारी और मांसाहारी समोसा की फेमस दुकाने एक नहीं कई हैं हैदराबाद में।
प्रयागराज में रोजाना पांच लाख से ज्यादा समोसा की खपत
यूपी के प्रयागराज जिले में प्रतिदिन पांच लाख से ज्यादा समोसा बिक जाते हैं। प्रयागराज के लोकनाथ मोहल्ले में मेवे का समोसा मिलता है, जिसको बड़ी संख्या में लोग रोजाना खाते हैं। हालांकि यह दूसरे समोसे की अपेक्षा थोड़ा महंगा होता है, लेकिन इसकी मांग भरपूर है। यह सभी तरह के मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स डालकर बनाया जाता है। एक बार खाने के बाद उसको बार-बार खाने का मन करेगा।
पंडित नेहरू से लेकर हरिवंश राय बच्चन तक रहे हैं शौकीन
खास बात यह है कि मेवे के समोसे के शौकीन पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, राजनेता और स्वतंत्रता सेनानी मदन मोहन मालवीय, साहित्यकार महादेवी वर्मा, साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन भी रहे हैं, जो अपने इलाहाबाद प्रवास (अब प्रयागराज) के दौरान समोसा जरूर खाया करते थे।
स्वाद और फैशन के साथ बदल रहा है समोसा
हम सभी जानते हैं कि समोसा में मुख्य रूप से आलू भरते हैं। लेकिन समय के साथ खूब प्रयोग होते रहे हैं। दिल्ली के चांदनी चौक में हरी मटर के समोसे खाने लोग दूर दूर से आते हैं। कनॉट प्लेस में छोले भरकर जंबो समोसा बनाया जाता है। दिल्ली में सीआर पार्क, जहां बंगाली लोग ज्यादा रहते हैं, वहां मटन के समोसे मिलते हैं। कैलाश कॉलोनी मार्केट में हल्के मसाले वाले कीमा चिकन से भरे समोसे भी काफी लोकप्रिय हैं। लखनऊ में काफी दिनों से बेक किया समोसा मिल रहा है ताकि समोसा कहने के बाद पछताने की जरुरत न पड़े।
मुगलकालीन दस्तावेज़ आईने अकबरी में भी है जिक्र
13वीं शताब्दी के कवि अमीर खुसरो ने भी समोसा का जिक्र किया है। 14वीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आए इब्नबतुता ने मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार के बारे में लिखा है कि वहां भोजन में मसालेदार मीट, मूंगफली और बादाम को आलू के साथ मिलाकर बेहद लज़ीज समोसा परोसा जाता था। बादशाह समेत सभी लोग उसे बड़े चाव से खाते थे। 16वीं शताब्दी के मुगलकालीन दस्तावेज़ आईने अकबरी में भी समोसे की तारीफ की गई है।
धरती से अंतरिक्ष तक समोसा की यात्रा
अमेरिकी अंतरिक्ष केंद्र नासा से अंतरिक्ष में कदम रखने वाली दूसरी भारतीय अमेरिकन महिला सुनीता विलियम्स अपने साथ समोसे को भी अंतरिक्ष पर ले गई थीं। वह भी इसकी दीवानी थीं। शायद यह दुनिया का पहला व्यंजन है जो पृथ्वी से ऊपर अंतरिक्ष तक की यात्रा कर चुका है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन भी समोसे का जायका पसंद करती थीं।
खास बात यह है कि समोसे की उम्र एक हजार साल से ज्यादा की हो गई है, बावजूद इसके रूप-रंग में कोई परिवर्तन नहीं आया। यह पहले भी तिकोना होता था और आज भी तिकोना ही होता है।












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