Himachal Election: ‘सत्ता परिवर्तन का रिवाज रहा कायम, AAP फुस्स!’ जानें हिमाचल चुनाव से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
हिमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां पर कोई भी पार्टी लगातार जीत का दावा नही कर सकती। यहां पर तकरीबन 4 दशकों से चुनाव हमेशा ‘जनता’ जीतती आई है। हिमाचल प्रदेश की जनता ने एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा को बरकरार रखा रखा है।

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Himachal Election facts: हिमाचल प्रदेश का चुनाव हमेशा सोच और आंकड़ों से अलग होता है। यहां के चुनावों के दौरान बहुत से ऐसे दिलचस्प और रोचक तथ्य हैं, जिससे जानने के बाद आप भी कहेंगे कि यह राज्य बहुत ही अनोखा है। आज हम आपको हिमाचल विधानसभा नतीजों से जुड़े ऐसे ही कुछ रोचक जानकारियां देंगे।
कांग्रेस ने मारी बाजी
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बाजी मार ली है। इस बार हिमाचल में कांग्रेस ने 40 सीटों पर जीत दर्ज की और 35 के बहुमत के आंकड़े को भी पार कर लिया। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को इस चुनाव से बड़ा झटका लगा है। हिमाचल चुनाव में पार्टी को केवल 25 सीटें ही मिल सकी है यानि जादुई आंकड़े से 10 सीट कम। आइए, अब आपको हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े कुछ रोचक तथ्य और फैक्टर बताते हैं। इस चुनाव में ऐसा क्या हुआ, जो आपको जानना चाहिए।
हर बार सत्ता बदलने का 'रिवाज'
साल 1990 के चुनाव के बाद से हिमाचल प्रदेश का 'चुनावी रिवाज' बदल गया है। जी हां! रिवाज इसलिए क्योंकि 1990 के बाद हर पांच साल में यहां की जनता सरकार को बदल देती है। तब से लेकर अभी तक यही रिवाज हिमाचल प्रदेश में चलता आ रहा है। साल 1990 से पहले यहां हमेशा कांग्रेस ही राज करती रही है लेकिन भाजपा ने 1990 में सरकार बनाई थी। इसके बाद जितनी बार विधानसभा का चुनाव हुआ, तब-तब सरकार बदली है। साल 1993, 1998, 2003, 2007, 2012, 2017 हर बार सरकार का चेहरा बदला है।
AAP हो गई टांय-टांय फिस्स!
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से 67 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। इनमें से कोई भी प्रत्याशी ज्यादा वोट नहीं ला पाया। एक भी सीट AAP को नहीं मिली। सबसे बड़ी बात ये है कि AAP के सभी प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। इसमें कई बड़े चेहरे भी शामिल हैं।
100 पार 1181 मतदाता
हिमाचल प्रदेश के कुल 55 लाख 74 हजार 793 मतदाताओं में से 1181 ऐसे हैं, जो 100 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। वहीं इनमें पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। 767 महिलाएं हैं, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 414 हैं।
दुनिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र
ताशीगंग मतदान केंद्र दुनिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र माना गया है। यह समुद्र तल से 15,256 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हालांकि, दुर्गम इलाके के बावजूद मतदान केंद्र में तकरीबन 98% वोटिंग हुई। इस मतदान केंद्र में मतदाताओं की संख्या 52 है, जिसमें से 51 ने वोटिंग की।
12 हजार फीट पर 65 मतदान केंद्र
चुनाव आयोग ने 10 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर 65 मतदान केंद्र बनाए गए थे। 12 हजार फीट की ऊंचाई से उपर मतदान केंद्रों की संख्या 20 थी। समुद्र तल (Sea Level) से सबसे न्यूनतम ऊंचाई ऊना के चिंतपूर्णी मतदान केंद्र को माना गया।
भाजपा की हार का मुख्य कारण
वैसे तो हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के कई कारण हैं लेकिन एक मुख्य कारण पुरानी पेंशन योजना की मांग को माना गया है। दरअसल कांग्रेस की पांच साल बाद हिमाचल प्रदेश की सत्ता में वापसी का मुख्य आधार पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली का वादा और सत्ता विरोधी माहौल रहा है। कांग्रेस ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, 300 यूनिट नि:शुल्क बिजली देने, महिलाओं को प्रति महीने 1500 रुपये देने और कई अन्य वादे किए थे, जो उसके पक्ष में काम कर गये।
सबसे दिलचस्प फैक्ट
इस बार कांग्रेस को चुनाव में 43.9% वोट मिले और पिछली बार से 18 सीटें बढ़ गईं। दिलचस्प बात यहां ये है कि भाजपा को इस बार कांग्रेस से महज 0.9% ही कम वोट मिले हैं लेकिन सीटों में अंतर 13 का है।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बनाया रिकॉर्ड
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक बार फिर सेराज सीट से चुनाव जीत लिया है और इसी के साथ एक ही सीट से लगातार 6 बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस के चेतराम ठाकुर को 38 हजार से ज्यादा वोटों से हराया है।
बीजेपी को अपनों ने दिया धोखा
भाजपा को अपनों ने ही 18 सीटों पर धोखा दिया। दरअसल, भाजपा के 18 बागी नेताओं ने ही भाजपा के खिलाफ प्रतिद्वंदी बनकर चुनाव लड़ा था। जिसका हर्जाना भाजपा को चुनावों के बाद आये नतीजों में भुगतना पड़ा।












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